बीपी राजमार्ग के अंतर्गत महोत्तरी जिले की बर्दिबास नगरपालिका–3 स्थित कालापानी में स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर दिया है। प्रदर्शनकारी स्थानीय सुकुमवासी और अव्यवस्थित बसोबासी हैं, जिनका आरोप है कि 11 जेठ को वन प्रशासन के साथ हुए विवाद के बाद उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले में चार निर्दोष लोगों को फंसाया गया है। इसी मुद्दे पर बुधवार को कालापानी में हुई सर्वदलीय बैठक में निर्णय लिया गया था कि बर्दिबास नगरपालिकाका मेयर प्रह्लाद कुमार क्षेत्री तीन दिनों के भीतर इन मुकदमों को वापस कराने के लिए पहल करेंगे।
इसी निर्णय के तहत गुरुवार को बर्दिबास नगरपालिका के सभाकक्ष में स्थानीय राजनीतिक दलों, स्थानीय सरकार, पुलिस और प्रमुख जिला अधिकारी की बैठक हुई। बैठक में महोत्तरी के प्रमुख जिला अधिकारी इन्द्रदेव यादव ने स्पष्ट किया कि मामला दर्ज होकर जांच की प्रक्रिया में है, इसलिए उसे तत्काल वापस लेना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इसके बाद बैठक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।
मेयर प्रह्लाद कुमार क्षेत्री ने बताया कि प्रशासन को दिया गया तीन दिन का अल्टीमेटम शुक्रवार को समाप्त हो गया। अल्टीमेटम खत्म होने के बाद शनिवार सुबह से स्थानीय सुकुमवासी और अव्यवस्थित बसोबासी बीपी राजमार्ग जाम कर आंदोलन पर उतर आए।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें हैं—
- स्थानीय लोगों पर दर्ज कथित झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं।
- घटना के लिए जिम्मेदार डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- घटना के समय हुए समझौते को लागू किया जाए।
राजमार्ग पर जाम लगने से सैकड़ों वाहन फंस गए हैं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिला पुलिस कार्यालय महोत्तरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) श्यामकुमार सारु मगर ने बताया कि कालापानी घटना से संबंधित मामला 19 असार को दर्ज किया गया था और फिलहाल उसकी जांच जारी है।
क्या है पूरा मामला?
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद गृह मंत्रालय ने जिला प्रशासन कार्यालयों को सार्वजनिक, ऐलानी, परती और वन क्षेत्र की अतिक्रमित भूमि खाली कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डिविजन वन कार्यालय ने वन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की।
11 जेठ की शाम वन विभाग के कर्मचारी कालापानी स्थित वन क्षेत्र में बसी बस्ती को खाली कराने संबंधी सूचना देने पहुंचे थे। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध करते हुए कर्मचारियों को रात लगभग 12 बजे तक रोककर रखा। इसी दौरान बर्दिबास–3, कालापानी में डिविजन वन कार्यालय की सरकारी गाड़ी में आग लगा दी गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इस भूमि पर रह रहे हैं और उन्हें भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र (लालपूर्जा) दिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि नई सरकार ने भूमि का स्वामित्व देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बजाय बस्ती खाली कराने का आदेश जारी कर दिया, जिससे लोगों में भारी नाराजगी फैल गई।
वन कर्मचारियों को रोके जाने के बाद पुलिस ने रास्ता खुलवाने के लिए लाठीचार्ज किया। इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने वन कार्यालय के सरकारी वाहन को आग के हवाले कर दिया।
प्रशासन का कहना था कि राजाबास, कालापानी, वरडाँडा सहित महोत्तरी के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 1,100 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण कर मकान, झोपड़ियां और खेती की जा रही थी, इसलिए अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया।
हालांकि कालापानी घटना के बाद वन कार्यालय ने माफी मांगते हुए तत्काल कार्रवाई रोक दी थी। युवा नेता शंकर महतो के अनुसार, उस समय प्रमुख जिला अधिकारी के साथ यह सहमति बनी थी कि घटना की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी, घायलों का उपचार राज्य कराएगा और किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। लेकिन अब पुलिस द्वारा मामला दर्ज कर जांच शुरू किए जाने से स्थानीय लोग एक बार फिर आंदोलन पर उतर आए हैं।

