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आठ – दलीय  अग्रगामी मोर्चा  की घोषणा : विनोदकुमार विमल

 

संविधान संशोधन, संघवाद को मज़बूत करना  और सामाजिक लोकतंत्र मुख्य एजेंडा 

 विनोदकुमार विमल, १६ अगस्त, काठमांडू । जनता समाजबादी पार्टी  नेपाल, जनमत पार्टी, आम जनता पार्टी, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी, प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी, नेपाल संघीय समाजवादी  पार्टी, बहुजन एकता पार्टी नेपाल और खुम्बुवान राष्ट्रीय मोर्चा  ने संयुक्त रूप से एक अवधारणा  पत्र जारी करके 23 श्रावण , 2083 को एक ‘अग्रगामी  मोर्चा’ की घोषणा की ।  `मोर्चा ` ने घोषणा की है कि वह संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य को मजबूत करने और राज्य के सभी स्तरों पर हाशिए पर मौजूद  समुदायों जिनमें मधेशी, आदिवासी समुदाय, थारू, दलित, महिलाएं, मुस्लिम और पिछड़े वर्ग शामिल हैं, के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष जारी रखेगा । मोर्चे का मुख्य  उद्देश्य राजनीतिक सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण, तानाशाही और अधिनायकवादी प्रवृत्तियों को खत्म करना है, और देश में स्वतंत्रता, समानता, लोकतांत्रिक गणराज्य, समावेशी लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों को सुनिश्चित करना  है l 

मोर्चा  ने यह निष्कर्ष निकाला है कि मौजूदा संविधान में संरचनात्मक खामियों और अस्पष्टताओं के कारण संघवाद को लागू करने में जो चुनौतियां पैदा हुई हैं, उनसे निपटने के लिए संविधान में संशोधन, उसे संशोधित या फिर से लिखने की आवश्यकता है । अवधारणा पत्र  में कहा गया है कि राजनीतिक स्थिरता, प्रतिनिधित्व में समानता, प्रांतों के पुनर्गठन और न्याय प्रणाली में सुधार सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक संशोधन आवश्यक हैं ।

मोर्चा  ने कहा है कि वह नेपाली समाज की विविधता जो कई जातियों, भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों वाला है, का सम्मान करते हुए हाशिए पर मौजूद वर्गों और समुदायों के उत्थान को प्राथमिकता देता है ।
मोर्चा  ने पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन व्यवस्था, स्वतंत्र न्यायपालिका, सक्षम लोक प्रशासन और गुणवत्तापूर्ण व सुलभ शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विकास को भी प्राथमिकता दी है ।

मोर्चा   के नेतृत्व को आम सहमति से या ज़रूरत पड़ने पर रोटेशन सिस्टम के ज़रिए चुनने का प्रावधान किया गया है । फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में जब भी संभव हो, आम सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी; हालाँकि, अगर आम सहमति नहीं बन पाती है, तो फ़ैसले लोकतांत्रिक तरीक़ों से लिए जाएँगे ।  अवधारणा पत्र  में यह भी कहा गया है कि गठबंधन में शामिल पार्टियों को एक ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ (साझा न्यूनतम कार्यक्रम) का पालन करना होगा और मोर्चा  के फ़ैसलों को मानना ​​होगा ।

अवधारणा पत्र पर उपेन्द्र यादव (अध्यक्ष, जनता समाजवादी पार्टी,  नेपाल), डॉ. सीके राउत (अध्यक्ष, जनमत पार्टी), प्रभु साह (अध्यक्ष, आम जनता पार्टी), रेशम लाल चौधरी (संरक्षक, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी), संतोष परियार (अध्यक्ष, प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी), रिजवान अंसारी (अध्यक्ष, नेपाल संघीय  समाजवादी पार्टी), डॉ. हरिनंदन कुमार रंजन (अध्यक्ष, बहुजन एकता पार्टी), और रामकुमार राई  ( अध्यक्ष, खुम्बुवान राष्ट्रीय मोर्चा )  ने हस्ताक्षर किए हैं ।

मोर्चा  का ऐलान: किसने क्या कहा ?

जनता समाजवादी पार्टी , नेपाल के राष्ट्रीय  उपेंद्र यादव ने कहा कि यह अग्रगामी  मोर्चा उन उपलब्धियों, जैसे –  संघवाद, समावेशिता, लोकतंत्र, गणतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करने और बाकी बचे अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है । संविधान बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए, उन्होंने  कहा कि पहले कुछ पार्टियों ने संविधान सभा के ज़रिए संविधान लागू करने के बजाय सिर्फ़ “संविधान की किताब” पास कर दी थी । यह कहते हुए कि देश अभी संविधान के दायरे से बाहर चल रहा है, उन्होंने संवैधानिक संशोधनों के ज़रिए भेदभाव और असमानता को खत्म करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया ।

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जनता समाजवादी पार्टी, नेपाल  के संरक्षक महंथ ठाकुर ने कहा है कि राजनीति कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो आसान रास्ते पर चलती हो । उन्होंने कहा, “राजनीति में कोई भी हमेशा सीधे और आसान रास्ते पर चलकर आगे नहीं बढ़ सकता; राजनीति अपने आप में एक ‘गंदा खेल’ है ।” उन्होंने बताया कि अक्सर सत्ता और नेतृत्व के पदों तक पहुँचने के लिए  अष्टावक्र की तरह ही टेढ़े – मेढ़े रास्तों से गुज़रना पड़ता है और कई चुनौतियों व मुश्किलों का सामना करना पड़ता है । 

जनमत पार्टी के अध्यक्ष  डॉ. सी.के. राउत ने कहा कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश संकट का सामना कर रहा है । उन्होंने याद दिलाया कि जब भी देश पर संकट आया है, ताकतें एकजुट हुई हैं । उन्होंने बताया कि साल  2007  से पहले और बाद में भी इसी तरह संगठित होकर वे आगे बढ़े थे ।  उन्होंने कहा कि यह मोर्चा पिछली गलतियों को सुधारकर आगे बढ़ने के संकल्प के साथ बनाया गया है । मोर्चा  का मकसद बताते हुए उन्होंने  कहा, “यह मोर्चा  सत्ता के लिए नहीं, बल्कि संघर्ष के लिए बनाया गया  है ।`

आम जनता पार्टी के अध्यक्ष  प्रभु साह ने कहा है कि देश को मौजूदा, कभी न खत्म होने वाले संकट से बाहर निकालने के लिए एक नए राजनीतिक मोर्चे की ज़रूरत है । अध्यक्ष साह ने कहा  कि मौजूदा राजनीति में धोखा, बेईमानी और अनैतिकता फैली हुई है और इसे खत्म करना ज़रूरी है । उन्होंने यह भी  कहा कि नए बने मोर्चे का मकसद सत्ता हासिल करना या पद बांटना नहीं, बल्कि देश को खुशहाली की ओर ले जाना है ।

प्रगतिशील लोकतान्त्रिक  पार्टी की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष संतोष परियार ने घोषणा की है कि ‘ अग्रगामी मोर्चा ‘ नेपाली राजनीति में संघीय व्यवस्था, गणतंत्र और समावेशिता जैसी उपलब्धियों की रक्षा करने में अहम भूमिका निभाएगा । उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी ताकतें युवाओं के सपनों और आदर्शों का फायदा उठा रही हैं और कहा कि इस मोर्चा  का गठन इन्हीं आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किया गया है ।

नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के संरक्षक रेशम लाल चौधरी ने सरकार पर चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया है । उन्होंने कहा कि हालांकि सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने चुनाव से पहले दावा किया था कि वह विदेश में रह रहे युवाओं को वापस लाएगी, अच्छा शासन सुनिश्चित करेगी और देश को नए तरीके से चलाएगी, लेकिन असलियत इसके ठीक उलट निकली है ।

प्रगतिशील लोकतान्त्रिक  पार्टी के नेता जनार्दन शर्मा ने कहा कि एक ‘ अग्रगामी मोर्चा ‘ को एक संयुक्त पहल के तौर पर बनाया गया है, क्योंकि देश अपने इतिहास के एक अहम मोड़ पर पहुँच गया है ।  मोर्चा के लिए  अवधारणा पत्र  जारी करते हुए, शर्मा ने घोषणा की कि इस मोर्चा  की स्थापना लोकतांत्रिक समाज को अपनाकर संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य को संस्थागत रूप देने के लिए की गई है ।

नेपाल संघीय समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष  रिज़वान अंसारी ने कहा कि संविधान को अंतिम रूप देने के लिए एक प्रगतिशील मोर्चा बनाया गया है । उन्होंने पिछली गलतियों और कमियों को सुधारकर आगे बढ़ने का संकल्प भी जताया l 

 जनता समाजवादी पार्टी नेपाल के नेता जितेंद्र सोनल ने कहा कि अग्रगामी मोर्चा  का गठन इसलिए किया गया क्योंकि पहले से हासिल की गई उपलब्धियों के खोने का खतरा मंडरा रहा है  । उन्होंने बताया कि इस मोर्चा  को संघर्ष से मिली उपलब्धियों की रक्षा करने, गणतंत्र को संस्थागत रूप देने और लोगों के अधिकारों व पहचान से जुड़े बाकी मुद्दों को आगे बढ़ाने के मकसद से बनाया गया  है ।

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अग्रगामी मोर्चे के अवसर और चुनौतियाँ  

इस लेख को तैयार करते समय, मैंने ‘ अग्रगामी मोर्चा`  के अवसरों  और चुनौतियों के बारे में जनता समाजवादी पार्टी , नेपाल के कुछ बुद्धिजीवियों और नेताओं से टेलीफ़ोन पर बातचीत की । उनके विचार यहाँ संक्षेप में दिए गए हैं ।

राष्ट्रीय योजना आयोग  के पूर्व सदस्य और अर्थशास्त्री डॉ. उमाशंकर प्रसाद कहते हैं, “मौजूदा हालात में नेपाल की जनता अगले 20 सालों तक देश चलाने के लिए एक लोकप्रिय नेता और लोकप्रिय पार्टी की तलाश में है । समय और हालात को देखते हुए एक अग्रगामी  मोर्चा बनाया गया है; हमें इसे एक अवसर के तौर पर देखना चाहिए ।” अग्रगामी मोर्चा  के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में डॉ. उमाशंकर प्रसाद का कहना है कि उपेंद्र यादव  जो नेपाल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय, दोनों ही जगहों पर एक लोकप्रिय और जाने – माने नेता हैं, के अलावा मोर्चा  में ऐसे नेताओं की कमी है । मोर्चा  में कम से कम पाँच या छह ऐसे नेताओं की ज़रूरत है जो उपेंद्र यादव की तरह सामाजिक बदलाव लाने में सक्षम हों । इसलिए, उपेंद्र यादव के स्तर के नेताओं को तैयार करना, जो सामाजिक बदलाव ला सकें मोर्चा  के लिए एक बड़ी चुनौती है ।

जसपा, नेपाल के बौद्धिक नेता भुवनेश्वर प्रसाद चौधरी कहते हैं, “समय और हालात के दृष्टिकोण  से एक अग्रगामी मोर्चा  बनाना, आदिवासी जनजातियों, मधेशियों, थारुओं, दलितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों जैसे पिछड़े समुदायों के लिए एक सुनहरा  अवसर  है ।”  अवसरों  के साथ – साथ, बौद्धिक नेता चौधरी का कहना है कि इस मोर्चे के सामने कई चुनौतियां भी हैं, जैसे –  कि मोर्चे के भीतर वैचारिक मतभेद, स्थानीय स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में दिक्कतें, नेतृत्व में नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व, भविष्य का संगठनात्मक ढांचा कैसा होगा, आगामी चुनावों के लिए उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया में समस्याएं और मोर्चे की  अल्पकालिक और दीर्घकालिक नीतियों आदि को लागू करने में आने वाली समस्याएँ ।

जसपा,  नेपाल की वन एवं पर्यावरण समिति के सदस्य और सलाहकार माधव देव ने अग्रगामी  मोर्चे के गठन को एक बहुत ही सकारात्मक कदम बताया है । उनका कहना है कि यह मोर्चा राज्य द्वारा शोषित, उत्पीड़ित और हाशिए पर धकेले गए मधेसी समुदाय का विश्वास जीत सकता है और मधेश  केंद्रित पार्टियों की मांगें आसानी से पूरी की जा सकती हैं । आने वाले दिनों में सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में उनका कहना है कि मोर्चा  से जुड़े नेताओं के निजी अहंकार और अहमियत को लेकर विवाद हो सकते हैं, पदों और जिम्मेदारियों के तालमेल न बैठने से विवाद हो सकते हैं, और आगामी प्रांतीय व स्थानीय चुनावों में सीटों के बंटवारे पर सहमति न बन पाने के कारण भी विवाद हो सकते हैं ।

जसपा, नेपाल की सेंट्रल कमिटी की सदस्य विनीता यादव अग्रगामी मोर्चा  का स्वागत करती हैं, लेकिन साथ ही कुछ चुनौतियों के बारे में अपनी राय भी रखती हैं ।  उनका कहना है, “चूंकि इस मोर्चे  से जुड़ी पार्टियों की विचारधाराएं अलग – अलग हैं, इसलिए एक बड़ी चुनौती यह तय करना है कि आने वाले समय में यह मोर्चा  अपने अवधारणा पत्र  में बताए गए एजेंडे को लागू करने में कितना सफल होगा । केंद्रीय सदस्य यादव आगे कहती  हैं कि स्थानीय स्तर पर मोर्चे से जुड़ी पार्टियों के संगठनों को एक मंच पर लाना और आगामी चुनावों में साफ़ – सुथरे और ईमानदार नेताओं का चयन करना भी मोर्चे के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है ।

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जसपा,  नेपाल की केंद्रीय सदस्य हंसा कुमारी साह कहती हैं, ” देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल में, हम ‘अग्रगामी मोर्चा’ के गठन को एक बड़े मौके के तौर पर देख सकते हैं, क्योंकि अलग – अलग राजनीतिक ताकतों के बीच आम मुद्दों पर सहयोग, एकता और आम सहमति बनाने की ज़रूरत है ।” केंद्रीय सदस्य साह ने कहा कि अवसरों  के साथ -साथ मोर्चे  के सामने कई चुनौतियां भी हैं, जैसे कि मोर्चा  से जुड़ी पार्टियों के बीच वैचारिक मतभेद, आगामी चुनावों में उम्मीदवारों के चयन और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के बंटवारे में रुकावटें, और अतीत में देखे गए राजनीतिक गठबंधनों को लेकर जनता की निराशा आदि ।

समाजवादी युवा संघ नेपाल के केंद्रीय कोषाध्यक्ष शत्रुधन  यादव कहते हैं, “इस मोर्चा  के ज़रिए युवाओं को एक मज़बूत ताकत के तौर पर एकजुट करना, दबे – कुचले, हाशिए पर पड़े और वंचित समुदायों के अधिकारों को सुनिश्चित करना, और संघवाद, समावेशिता और सामाजिक न्याय के एजेंडे को सामने लाना संभव है । साथ ही, इस मोर्चा  के माध्यम से अन्य लोकतांत्रिक राजनीतिक ताकतों और नागरिक समाज को भी एक ही मंच पर लाया जा सकता है । इसलिए, इस अग्रगामी मोर्चा  को एक अहम अवसरों  के तौर पर देखा जा सकता है ।” मोर्चा  के सामने आने वाले अवसरों  और चुनौतियों के बारे में बात करते हुए, वे बताते हैं कि पहले बने गठबंधनों में कुछ खास तरह की सोच देखी गई है,  जैसे –  नई पीढ़ी को संगठित न कर पाना, लीडरशिप के स्तर पर अवसरों  की कमी, पुरानी राजनीतिक संस्कृति और मौकापरस्त लोगों को लगातार बढ़ावा देना, राजनीति से जनता का मोहभंग होना और बिखरने की प्रवृत्ति। मौजूदा मोर्चा  के सामने भी ऐसी ही चुनौतियां आ सकती हैं ।

निष्कर्ष 

आठ राजनीतिक दलों ने एक अग्रगामी  मोर्चा बनाने की घोषणा की है, जिसका एजेंडा संवैधानिक संशोधन, संघवाद को मज़बूत करने, सामाजिक न्याय और सामाजिक लोकतंत्र पर केंद्रित है । मधेश – आधारित और हाशिए पर मौजूद समुदायों के अधिकारों की वकालत करने वाले दलों के बीच इस सहयोग ने नेपाली राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है और हलचल पैदा कर दी है । वहीं, इस बहस और लहर को मोर्चा  के लिए एक अवसर और चुनौती के तौर पर देखा जाना चाहिए । इतिहास गवाह है कि पहले भी ऐसे मोर्चे और गठबंधन बने हैं, लेकिन समय के साथ वे कमज़ोर और दिशाहीन हो गए । इसलिए  इस मोर्चे को सिर्फ़ चुनावी चाल या अपने अस्तित्व को बचाने का ज़रिया नहीं बनना चाहिए; बल्कि इसे जनता  की आजीविका और स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए । इसकी अहमियत तभी साबित होगी जब यह मोर्चा कागज़ी घोषणाओं से आगे बढ़कर अपने वादों को ईमानदारी से लागू करेगा ।

विनोदकुमार विमल

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