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रसुवा-नुवाकोट बाढ़: 11 जलविद्युत परियोजनाओं में 898 कर्मचारी अब भी लापता, सैकड़ों सुरंगों में फंसे

 

काठमांडू।

भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ को पाँच दिन बीत चुके हैं, लेकिन रसुवा और नुवाकोट जिले की जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे सैकड़ों श्रमिकों और तकनीशियनों का अब तक पूरा बचाव नहीं हो सका है। कई लोग अब भी सुरंगों और पावरहाउस के भीतर फंसे होने की आशंका है।

नेपाल के स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादकों के संगठन इप्पान (IPPAN) के अनुसार, 11 जलविद्युत परियोजनाओं के 898 कर्मचारी और मजदूर अब भी संपर्क से बाहर हैं। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जो बाढ़ के समय सुरंगों और पावरहाउस के भीतर मौजूद थे।

पाँच दिन बाद भी सुरंगों में फंसे लोगों का कोई पता नहीं

बाढ़ आने के पाँच दिन बाद भी पर्याप्त जनशक्ति, आधुनिक उपकरण और सरकारी तत्परता के अभाव में सुरंगों में फंसे लोगों की स्थिति अज्ञात बनी हुई है। परियोजना संचालकों का कहना है कि समय पर बचाव न होने से अंदर फंसे लोगों की हालत लगातार गंभीर होती जा रही है।

लापता लोगों के परिजन परियोजना कार्यालयों और सरकारी निकायों से लगातार गुहार लगा रहे हैं।

परिजनों का दर्द: “क्या एक महीना इंतजार करना पड़ेगा?”

रसुवा के धुन्चे में कई परिवार अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। म्याग्दी से अपने लापता पिता की तलाश में पहुंचे एक बच्चे के मामा जसिन्द्र रसाइली ने भावुक होकर कहा,

“सिर्फ हमारे गांव और पड़ोसी जिले से ही 20 से अधिक लोग लापता हैं। हमें विश्वास है कि वे सुरंग के भीतर जीवित हैं। चार दिन से यहां हैं, सरकार ने केवल हेलीकॉप्टर से वीडियो बनाया, लेकिन सुरंग के भीतर जाने की हिम्मत किसी ने नहीं की।”

उन्होंने सरकार से सवाल किया,

“प्रशासन कहता है कि सुरंग साफ करने में कम से कम एक महीना लगेगा। क्या यह देखने के लिए भी एक महीना इंतजार करना होगा कि अंदर कोई जीवित है या नहीं? क्या हमारे अपनों की जान इतनी सस्ती है?”

सरकार ने देरी की वजह बताई

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन प्राधिकरण (NDRRMA) का कहना है कि दुर्गम भूगोल, आधुनिक उपकरणों की कमी और भारी मलबे के कारण बचाव अभियान में देरी हुई है।

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प्राधिकरण के कार्यकारी प्रमुख धर्मराज उप्रेती ने बताया कि शिकायतें बढ़ने के बाद भारत और चीन के विशेषज्ञ दलों तथा अत्याधुनिक तकनीक को बचाव अभियान में लगाया गया है।

उनके अनुसार,

  • अत्याधुनिक स्कैनिंग मशीनें प्रभावित क्षेत्रों में भेजी गई हैं।

  • ये मशीनें दिन-रात स्कैन कर जीवित या मृत लोगों का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं।

  • कठिन भू-संरचना के कारण अभियान अपेक्षा से अधिक समय ले रहा है।

सबसे अधिक प्रभावित प्रमुख परियोजनाएं

परियोजना

स्थिति

अपर त्रिशूली-1 (216 मेगावाट)

576 लोग संपर्क से बाहर थे; 254 का बचाव हुआ, लगभग 300 अब भी सुरंग में फंसे बताए जा रहे हैं।

लाङटाङ खोला (20 मेगावाट)

42 लोग संपर्क से बाहर; 18 का बचाव, 25 अब भी सुरंग में फंसे हैं।

अपर त्रिशूली-3A (60 मेगावाट)

लगभग 42 लोग सुरंग में फंसे होने की आशंका।

अपर त्रिशूली-3B

122 लोग संपर्क से बाहर थे; 91 लोगों को जीवित निकाला गया, बाकी की तलाश जारी है।

रसुवागढ़ी परियोजना

93 लोग अब भी संपर्क से बाहर।

रसुवा-भोटेकोशी

4 लोग लापता।

चिलिमे

8 लोग लापता।

मैलुङ खोला

7 लोग लापता।

मिडल त्रिशूली गंगा

2 लोग लापता।

त्रिशूली जलविद्युत

1 व्यक्ति लापता।

देवीघाट जलविद्युत

1 व्यक्ति लापता।
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सुरंगों में ऑक्सीजन और ठंड सबसे बड़ी चिंता

परियोजना प्रतिनिधियों का कहना है कि सुरंगों के भीतर ऑक्सीजन की कमी, लगातार बढ़ती ठंड और भोजन-पानी की अनुपलब्धता के कारण अंदर फंसे लोगों की स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।

लाङटाङ परियोजना के प्रवर्तक विजयमान भट्टराई ने कहा,

“हमारी सुरंग में 25 लोग फंसे हैं, लेकिन चार दिनों तक सरकार ने कोई ठोस बचाव अभियान शुरू नहीं किया।”

विदेशी विशेषज्ञों को अनुमति देने पर विवाद

इप्पान अध्यक्ष मोहन कुमार डाँगी ने आरोप लगाया कि अपर त्रिशूली-1 में कोरियाई विशेषज्ञ बचाव अभियान चलाना चाहते थे, लेकिन सरकार ने अनुमति नहीं दी।

उन्होंने कहा,

“सुरंग में फंसे लोगों को जितनी जल्दी निकाला जाएगा, उनके जीवित मिलने की संभावना उतनी अधिक होगी। यह समय राष्ट्रीयता देखने का नहीं, नागरिकों की जान बचाने का है।”

नेपाल इंजीनियर्स एसोसिएशन, इप्पान और नेपाल टनलिंग एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से सरकार से मांग की है कि निजी कंपनियों को अपने खर्च पर हेलीकॉप्टर और विशेष बचाव उपकरण इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए।

अब तक बचाव अभियान की स्थिति

अपर त्रिशूली-3A (नुवाकोट) में सबसे सक्रिय अभियान चल रहा है।

  • नेपाली सेना के 66 जवान

  • सशस्त्र पुलिस के 18 जवान

  • नेपाल पुलिस के 6 जवान

कुल 90 सदस्यीय संयुक्त टीम सुरंग में प्रवेश का प्रयास कर रही है।

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सेना ने सुरंग की छत (क्राउन हेड) में लगभग 2–3 फुट का छेद बनाया और रस्सी के सहारे भीतर उतरकर आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अब छेद को बड़ा करने या नियंत्रित ब्लास्टिंग के जरिए भीतर पहुंचने की तैयारी की जा रही है।

इसके विपरीत, अपर त्रिशूली-1 और लाङटाङ जैसी दुर्गम परियोजनाओं में अब तक प्रभावी बचाव अभियान शुरू नहीं हो पाया है।

अब तक का आधिकारिक बचाव आंकड़ा

अब तक जलविद्युत परियोजनाओं से 361 लोगों का बचाव किया गया है।

  • अपर त्रिशूली-1 से: 254

  • लाङटाङ परियोजना से: 18

  • अपर त्रिशूली-3B से: 91

इसके बावजूद 898 लोगों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी दी गई है और बड़ी संख्या में लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका बनी हुई है।

स्थिति बेहद चिंताजनक

बाढ़ आए 100 घंटे से अधिक समय बीत चुका है। सुरंगों में कितनी ऑक्सीजन बची है, कितने लोग जीवित हैं, कितने घायल हैं—इसका स्पष्ट पता अब तक नहीं चल पाया है। एक ओर सरकार लगातार बचाव अभियान तेज करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवार अपने प्रियजनों के जीवित मिलने की उम्मीद और उनके शव मिलने के डर के बीच इंतजार कर रहे हैं।

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