Fri. Oct 16th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

चीन की चेतावनी: छोचेन नदी के आसपास ग्लेशियर अब भी टूटने के खतरे में, बड़े जोखिम की आशंका

 

काठमांडू।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि छोचेन नदी के प्रभाव से बने गड्ढे (क्रेटर) के आसपास स्थित ग्लेशियर अब भी टूटने की स्थिति में हैं। मंत्रालय के अनुसार इससे भविष्य में बड़ा प्राकृतिक खतरा पैदा हो सकता है।

ड्रोन वीडियो, पैनोरमिक तस्वीरों और घटनास्थल पर तैनात आपातकालीन दल से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्युरेपुछ्याङ त्साङ्पो नदी पर बने प्राकृतिक अस्थायी बांध से पानी लगातार बह रहा है। एसएआर (सिंथेटिक अपर्चर रडार) उपग्रह चित्रों के विश्लेषण के मुताबिक छोचेन नदी के प्रभाव क्षेत्र में बने जलाशय का जल क्षेत्रफल लगभग 83 हजार वर्ग मीटर है। यह सोमवार सुबह 11 बजे की तुलना में 25 हजार वर्ग मीटर और सोमवार शाम 7 बजे की तुलना में 14 हजार वर्ग मीटर कम हो गया है। अनुमान है कि इस जलाशय में अब भी करीब 6 लाख 50 हजार घन मीटर पानी मौजूद है।

नीचे की ओर तीन स्थानों पर पानी जमा

गड्ढे से करीब 2.5 किलोमीटर नीचे तीन छोटे जलभराव क्षेत्र बने हुए हैं। ये सभी पानी की निकासी प्रणाली से जुड़े हैं और वहां से पानी बाहर निकल रहा है। हालांकि चीन का कहना है कि आसपास के ग्लेशियरों के टूटने की आशंका अभी भी बनी हुई है, इसलिए संभावित खतरा पूरी तरह टला नहीं है।

यह भी पढें   भारत के साथ व्यापार घाटा कम करने और निवेश बढ़ाने के लिए संयुक्त पहल जरूरी: अञ्जन श्रेष्ठ

14 सदस्यीय आपातकालीन जल विज्ञान टीम तैनात

चीन के जल संसाधन मंत्रालय की 14 सदस्यीय जल विज्ञान आपातकालीन निगरानी टीम को तीन समूहों में बांटकर प्युरेपुछ्याङ त्साङ्पो, तुङलिन त्साङ्पो और जिरोङ त्साङ्पो नदियों में जल प्रवाह की निगरानी और उपकरण स्थापित करने के लिए भेजा गया है।

पहली टीम ने प्युरेपुछ्याङ त्साङ्पो में निगरानी की, जहां सोमवार सुबह 9 बजे जल प्रवाह 45 घन मीटर प्रति सेकेंड मापा गया। वहीं तुङलिन त्साङ्पो के गुओपा स्टेशन पर जल प्रवाह 56.3 घन मीटर प्रति सेकेंड दर्ज किया गया।

दूसरी टीम तुङलिन त्साङ्पो के निचले तटीय क्षेत्र सेछ्योङ के पास निगरानी केंद्र स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थान तलाश रही थी, लेकिन लगातार भूस्खलन के कारण स्थान चयन में कठिनाई आई।

तीसरी टीम ने जिरोङ त्साङ्पो के मुख्य प्रवाह पर स्थापित आपातकालीन जल विज्ञान केंद्र में उपकरणों की स्थापना और परीक्षण पूरा किया। यह केंद्र केरुङ बंदरगाह से लगभग 7 किलोमीटर ऊपर स्थित है। सोमवार सुबह 9 बजे जिरोङ बंदरगाह पर जल प्रवाह करीब 125 घन मीटर प्रति सेकेंड आंका गया।

यह भी पढें   नेपाल 2027-2029 कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का सदस्य निर्वाचित, हासिल किए सर्वाधिक वोट

पानी का बड़ा हिस्सा निकल चुका, लेकिन खतरा बरकरार

मंगलवार सुबह 8 बजे ड्रोन से ली गई तस्वीरों के अनुसार छोचेन नदी के गड्ढे में जमा पानी का बड़ा हिस्सा बाहर निकल चुका है और निचले क्षेत्रों में नदी का प्रवाह सामान्य स्थिति में लौटता दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि गड्ढे के आसपास ग्लेशियरों के टूटने का खतरा अभी भी बना हुआ है।

नेपाल की ओर बड़े हिमताल नहीं, चीन की ओर 14 झीलें

रिमोट सेंसिंग उपग्रह चित्रों के विश्लेषण के अनुसार जिरोङ (केरुङ) बंदरगाह के ऊपर जिरोङ त्साङ्पो नदी बेसिन के नेपाल वाले हिस्से में 0.1 वर्ग किलोमीटर से बड़े मलबे से अवरुद्ध कोई हिमताल नहीं मिला है।

इसके विपरीत चीन की सीमा के भीतर 0.1 वर्ग किलोमीटर से बड़े 14 हिमताल पाए गए हैं। इनमें से 11 तुङलिन त्साङ्पो और उसकी सहायक नदियों में तथा 3 जिरोङ त्साङ्पो और उसकी सहायक नदियों में स्थित हैं।

यह भी पढें   मिथिला चित्रकला के कैनवास पर नवदुर्गाः ९ रूपों का कलात्मक चित्रण और दैनिक जीवन में उनका महत्व

पहचाने गए इन 14 हिमतालों में से 10 को उच्च जोखिम और 4 को मध्यम या निम्न जोखिम की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि पिछले एक महीने के उपग्रह विश्लेषण में इन झीलों के जल क्षेत्रफल में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया। वैज्ञानिकों ने हिमतालों की प्राकृतिक स्थिति, निचले क्षेत्रों की आबादी और बुनियादी ढांचे तथा दूसरे छिंगहाई-तिब्बत पठार वैज्ञानिक अभियान के निष्कर्षों के आधार पर इनके फटने का खतरा जताया है।

भोटेकोशी की विनाशकारी बाढ़ की पृष्ठभूमि

गत भाद्र 10 को लाङटाङ लिरुङ हिमालय से विशाल हिमखंड और चट्टान टूटकर गिरने से मलबे ने ल्हेन्दे घाटी में अस्थायी बांध बना दिया था। बाद में यह बांध टूटने से भोटेकोशी में विनाशकारी बाढ़ आई, जिसने नेपाल में भारी तबाही मचाई।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार इस बाढ़ में अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल सरकार और कई मित्र देशों की सहायता से राहत, खोज और बचाव अभियान अभी भी जारी है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com