रसुवा-नुवाकोट बाढ़: सुरक्षाकर्मी कहाँ-कहाँ तैनात हैं और राहत कहाँ तक पहुँची ?
काठमांडू, 1 सितंबर । नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। 10 भदौ (नेपाली कैलेंडर के अनुसार) को आई इस भीषण बाढ़ के बाद से प्रभावित क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर खोज, बचाव और राहत कार्य जारी हैं।
बड़े पैमाने पर बचाव और क्षति का आँकड़ा
जिला प्रशासन कार्यालय से प्राप्त 16 भदौ की सुबह तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 3,162 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। हालांकि, त्रासदी में 151 लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि 61 लोग घायल बताए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अभी भी 2,251 लोग लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है।
सुरक्षाबलों और विदेशी विशेषज्ञों की तैनाती
बाढ़ से मची तबाही के बीच राहत और बचाव कार्यों के लिए नेपाली सेना (Nepal Army) और सशस्त्र प्रहरी बल (Armed Police Force) को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया है। इसके अलावा, नेपाल विद्युत प्राधिकरण की टीमें और मित्र राष्ट्रों के विशेषज्ञ दल भी प्रभावित इलाकों में मौजूद हैं। ये दल न केवल लोगों की जान बचाने में लगे हैं, बल्कि अवरुद्ध सड़कों की मरम्मत और बुनियादी ढांचे को फिर से सुचारू करने का प्रयास भी कर रहे हैं।
सुरंगों और कीचड़ के बीच चुनौतीपूर्ण बचाव कार्य
इस बाढ़ ने जलविद्युत परियोजनाओं और आसपास के क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया है। विशेष रूप से त्रिशुली 3-ए, 3-बी, त्रिशुली-1, चिलिमे, रसुवागढ़ी और लांगटांग क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है। बचाव दलों को सुरंगों (टनल), दलदल और भारी कीचड़ के कारण काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद, सुरक्षाकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर मलबे और दलदल के बीच फंसे लोगों की तलाश में दिन-रात जुटे हुए हैं।
राहत सामग्री का वितरण
विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियों द्वारा बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुँचाने की कोशिश की जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में विस्थापित हुए लोगों के लिए भोजन, दवाइयां और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि, भूस्खलन और सड़कों के कट जाने के कारण कुछ दुर्गम इलाकों में राहत सामग्री पहुँचाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।




