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पाकिस्तान के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा सैन्य बल पर खर्च होता है : श्वेता दीप्ति

 

श्वेता दीप्ति, हिमालिनी, नोवेम्बर | आतंकवादी संगठनों में एक चर्चित संगठन है, जम्मू कश्मीर लिबरेशन फरंट (जेकेएलएफ) । यह जम्मू और कश्मीर का अलगाववादी संगठन है । जिसकी स्थापना अमानुल्लाह खान और मकबूल भट्ट ने किया है । यह मूलतः प्लेबिसाइट फरंत की मिलिटेंट शाखा थी लेकिन २९ मई, १९७७ को बर्मिंघम, इंग्लिस्तान में यह जम्मू कश्मीर लिबरेशन फÞ्रंट में परिवर्तित हो गया । उस समय से १९९४ तक यह एक सक्रिय मिलिटेंत संगठन रहा है । यूनाइटेड किंगडम, यूरोप, संयुक्त राज्य और मध्य पूर्व के कई नगरों में इस संगठन की शाखाएँ मौजूद हैं । १९८२ में पाक अधिकृत कश्मीर के आजाद कश्मीर क्षेत्र में इसकी एक शाखा स्थापित हुई थी, जबकि १९८७ में भारत की कश्मीर घाटी में इसकी एक शाखा स्थापित हुई । जेकेएलएफÞ के केवल मुसलमान सदस्य हैं । इसका अंतिम लक्ष्य एक स्वतंत्र कश्मीर है जो दोनों भारत और पाकिस्तान से मुक्त है ।

पाकिस्तान में स्थित जैश–ए–मुहम्मद एक जिहादी इस्लामी उग्रवादी संगठन है, जिसका एक ध्येय भारत से कश्मीर को अलग करना है हालांकि यह अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के विरुद्ध आतंकवादी गतिविधियों में भी शामिल समझे जाती हैं । इसकी स्थापना मसूद अजÞहर नामक पाकिस्तानी पंजाबी नेता ने मार्च २००० में की थी जिसे वैश्विक स्तर पर आतंकवादी घोषित किया गया है । यह आज भी पाकिस्तान से अपने संगठन को चला रहा है । इस पर प्रतिबंध के पाकिस्तान के दावे खोखले साबित हुए हैं । इसे भारत में हुए कई आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है । कथित तौर पर जनवरी २००२ में इसे पाकिस्तान की सरकार ने भी प्रतिबंधित कर दिया गया था । इसके बाद जैश–ए–मुहम्मद ने अपना नाम बदलकर ‘खÞुद्दाम उल–इस्लाम’ कर दिया । भारत के सुरक्षा विषयों के समीक्षक बी रामन ने इसे एक ‘मुख्य आतंकवादी संगठन’ बताया है और यह भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा जारी आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल है ।

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आतंकवाद और पाकिस्तान
आतंकवाद के इतिहास को याद करें तो यह कह सकते हैं कि आतंकवाद की जड़ कहीं ना कहीं पाकिस्तान में फैली हुई है । इस बात से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी इत्तफाक रखते हैं । हाल ही में अमेरिका में साँसदों को सम्बोधित करते हुए इमरान खान ने माना कि, पाकिस्तान में तीस से चालीस हजार आतंकवादी मौजूद हैं जो वर्तमान में अफगानिस्तान और पाक अधिकृत काश्मीर में आतंकी ट्रेनिंग ले रहे हैं । इसके साथ ही उन्होंने माना कि पाकिस्तान में करीब चालीस आतंकी संगठन सक्रिय हैं जो पाकिस्तानी सीमाओं के भीतर काम कर रहे हैं । उन्होंने पिछली सरकारों को कटघरे में खड़ा करते हुए अपनी सरकार की तारीफ की और कहा कि वो आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से लड़ रहे हैं । यह और बात है कि पाकिस्तान चाहे जितने भी दावे इस मामले में कर ले पर हकीकी तौर पर वो कोई कड़ा कदम नहीं उठाएगा । यह इतिहास बताता है । अगर सरकार को हकीकत पता है तो वह कारवाही करती ना कि किसी और राष्ट्र में जाकर आतंकी संगठनों की गिनती गिनवाती । यही वजह है कि आतंकवाद के सवाल पर पाकिस्तान आज विश्व में ही हाशिए पर है । पाकिस्तान से संचालित आतंकवादी समूहों पर लगाम कसने की दिशा में पर्याप्त कारवाही नहीं करने के कारण ही अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा मदद में कटौती कर दी । आतंकवाद के कारण ही पाकिस्तान को भारत से हमेशा से शत्रुता का रिश्ता रहा है । और आज यह तिक्तता बढती ही जा रही है ।

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हाल ही में एशिया पैसिफिक ग्रूप (ब्एन्) के फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने कहा कि पाकिस्तान, यूएन सिक्योरिटी काउंसिल का प्रस्ताव हाफिज सईद, वैश्विक आतंकवादियों और आतंकवादी समूह जैसे कि जैश–ए–मोहम्मद, लश्कर–ए–तैयबा के खिलाफ लागू करने में विफल रहा है ।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा राष्ट्र के विकास हित में नहीं बल्कि सैन्य बल पर खर्च होता है । वहाँ के सेनाधिकारी सर्वोपरि हैं, जहाँ सरकार की भी नहीं चलती । इन सबकी वजह से आज पाकिस्तान आर्थिक रूप से बदहाल हो चुका है । प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह देता आया है । इस दिशा में एक और कदम उठाया जा रहा है धर्म के नाम पर । मुसलमानों की धार्मिक आस्था और कट्टरता के प्रवृति का फायदा उठाने के लिए पाकिस्तान दुनिया भर के मुसलमानों को एवं खास तौर पर भारतीय मुसलमानों को धर्म के नाम पर यह भ्रम फैला कर गुमराह कर रहा है की “इस्लाम के सुन्दर भविष्य और दुनिया भर के मुसलमानों की सुरक्षा और भविष्य के लिए अल्लाह ने पाकिस्तान को बनाया, इस बारे में लम्बे समय से कई धर्मगुरुओं ने भविष्यवाणी की थी और इसके सबूत उनकी तकरीरों में मिलते है’
इस बात को मुसलमानों के दिमाग में भरने के लिए पाकिस्तान कई काल्पनिक और फर्जी धार्मिक तकरीरे सोशल मीडिया, अपने समर्थित धर्मगुरुओं के माध्यम से प्रचार और प्रसार कर रहा है । पाकिस्तान फिर से खलीफा साम्राज्य के सपने दिखाकर मुसलमानों को भ्रमित कर लामबंद करने का प्रयास कर रहा है ! अर्थात वह विश्व भर के मुसलमानों का मुखिया बनना चाह रहा है । इस बात के लिए वह किसी भी राह को चुन सकता है । हाल ही में कई ऐसे विडियो सामने आए जिनमें स्कूली बच्चों का प्रयोग किया गया और जिनके दिमाग में गोली और बारुद की बातें भरी जा रही हैं ।
आज जहाँ विश्व आतंकवाद से मुक्त होना चाहता है वहीं पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खुले तौर पर (आतंकवाद शब्द का भले ही प्रयोग ना करें) परमाणु युद्ध की धमकी देने से नहीं चूकते । विकास की राह पर न चल युद्ध की राह को चुनना पाकिस्तान बेहतर समझता है । जिसका खामियाजा वहाँ की जनता आज भुगत रही है ।

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