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ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेन का कोरोना कोविशील्ड टीका वायरस नए संक्रमण के लिए भी है प्रभावी

 

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित कोरोना का कोविशील्ड टीका वायरस के नए संक्रमण के लिए प्रभावी है। ब्रिटेन के एक मीडिया रिपोर्ट में यह कहा गया है। ब्रिटिश ड्रग्स ग्रुप एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कोविड-19 वैक्सीन ने ‘जीत का फॉर्मूला’ हासिल कर लिया है। कंपनी के सीईओ पास्कल सोरियोट ने यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन 100 प्रतिशत सुरक्षित है। सोरियोट ने यह भी कहा कि वैक्सीन को इसी हफ्ते ब्रिटिश स्वास्थ्य नियामक से मंजूरी मिल सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह वैक्सीन कोरोना वायरस के नए संक्रामक स्ट्रेन के खिलाफ भी यह प्रभावी साबित होगी।

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पास्कल ने कहा कि जहां एक तरफ फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन 95 प्रतिशत और मॉडर्ना 94.5 प्रतिशत प्रभावी हैं, वहीं, हमारी यह वैक्सीन 100 प्रतिशत गंभीर रोगियों की रक्षा करने में सक्षम होगी। सबसे पहले उन कोरोना से संक्रमित 12 से 15 मिलियन लोगों का टीकाकरण किए जाने की योजना है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होगी।

सूत्रों के मुताबिक कोरोना संक्रमण का नया रूप कोविड-19 से एक कदम आगे बढ़ चुका है। यह ब्रिटेन में तेजी से फैल रहा है। पास्क्ल ने कहा, वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कामयाब फॉर्मूला तैयार किया है, जिससे वैक्सीन की प्रतिरोधी क्षमता को और बढ़ाया जा सकता है। जल्द ही इस दावे से जुड़े ट्रायल के कोई नतीजे घोषित किए जाएंगे।

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कोविशील्ड के तीसरे चरण के ट्रायल के जो अंतरिम नतीजे पिछले माह जारी किए गए थे, उनमें टीके की दो खुराक में औसतन 70 फीसदी प्रभावी रहने का परिणाम दिया गया था, जबकि टीके की एक खुराक में 90 फीसदी प्रभावशीलता की बात थी। ब्रिटेन सरकार ने 23 दिसंबर को घोषणा की थी कि ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के निर्माताओं ने मेडिसिन और हेल्थकेयर उत्पादों नियामक एजेंसी (एमएचआरए) को अपना डेटा प्रस्तुत किया था। नए स्ट्रेन का पता लंदन और दक्षिणपूर्व इंग्लैंड में सितंबर माह में लगा था। ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन कोविशील्ड का भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन सीरम इंस्टीट्यूट में हो रहा है।

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