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चीखती दूल्हन

 

कञ्चना झा:राखी आज जिंदा हैर्।र् इश्वर की कृपा ही कहना चाहिए नहीं तो परिवारवालों ने उसे जान से मारने में कोई कसर बाँकी नहीं छोडÞा था। आखिर कहाँ जा रही है समाज की मानसिकता, एक गंभीर प्रश्न बन कर खड हो गया है।Dulhan-01.jpeg_thumb
इक्कीसवीं सदी में हैं हम और आप। विज्ञान चांद और मंगल प्रवेश कर रहा है। विचारधाराएं बदल रही है, आम आदमी भी अपने अधिकार के प्रति सचेत बन रहा है। गली-गली में महिला अधिकार और उत्थान की बातें हो रही है, राष्टी्रय और अन्तर्रर्ाा्रीय स्तर पर आयोजित बडी सभाओं में महिला सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता पर बहस चल रही है। मगर व्यवहार में देखा जाए तो मानव समाज पतन की ओर उन्मुख है।
कम से कम सप्तरी जिला राजविराज नगरपालिका -२ की २६ वषर्ीया राखी झा की कहानी तो यही प्रमाणित कर रही है। हंसता-खेलता परिवार था राखी का। तीन बहन और एक भाई। सदरमुकाम राजविराज से करिब ८ किमी दक्षिण में अवस्थित वरही वीरपुर गाँव के रहने वाले राखी के पिता छोटी-मोटी नौकरी करते थे। आमदनी कम होते हुए भी परिवार में खुशियाली थी। ये अलग बात है कि राखी के परिवारवालों नें उसे अच्छी शिक्षा नहीं दिया। स्थानीय एक आरा मसिन में काम करने वाले राखी के पिता सूरज नारायण झा की इतनी आमदनी नहीं थी कि सभी बच्चांे को स्कूली शिक्षा दे सकें।
बच्चे को शिक्षा देने की जगह सूरज नारायण को बेटी की शादी ज्यादा आवश्यक लग रही थी। बहुत लोगों को कह रखा था। संयोग से एक लडका मिल भी गया। मध्यस्थकर्ता ने कहा- दो लाख रूपया दहेज के लगेंगे। सूरज नारायण राजी हो गया और  राखी का विवाह तय हो गया, राजविराज स्थित एक मन्दिर के पुजारी राधा वल्लव झा के बेटे प्रवीण झा से। शादी भी हो गयी, हैसियत के अनुसार सूरज नारायण ने बारातियों के स्वागत में खर्च भी किया।
शादी के कुछ ही दिन बिते थे कि अब प्रवीण के परिवार वालों ने राखी पर ताना कसना शुरु कर दिया। मायके से ये नहीं लायी वो नही लायी।  धीरे-धीरे बात तानों तक ही सीमित नहीं रही, राखी पर दबाब दिया जाने लगा। शादी के समय में जो दहेज मिला वो पर्याप्त नहीं था, हमें और चाहिए। राखी को पता था कि उसकी शादी में जो कर्जा लिया गया, अब भी फिर्ता नहीं हो पाया है और पैसे पिताजी कहाँ से लाऐंगे।
प्रवीण साउदी अरब में काम कर रहा है। राखी ने यह बात पति को बतलायी तो वो भी कुछ नहीं बोला। जब नेपाल आया तो उसने भी परिवारवालों की मांग में हामी भरी। फिर शुरु हुआ राखी पर मारपीट का सिलसिला।  मैथिली भाषा में अपनी बात रखते हुए राखी कहती है- ससुर और घरवाला मिलकर पिटलक अर्थात -ससुर और श्रीमान ने मिलकर पिर्टाई की।) वह आगे कहती है कि दहेज और नहीं लाने पर जला कर मार देने की धमकी देते हैं। राखी की सास बीमार है लेकिन दहेज की बात करें तो वह सबसे आगे रहती है। राखी को कई बार घर से निकाल दिया गया है।
करीब दो वर्षराखी ने शारीरिक और मानसिक यातना सही लेकिन पिछले दिनों कुछ ऐसी घटना हो गयी, जिसे राखी सहन न कर सकी और न्याय की मांग करते हुए वह सडÞक पर आ गयी। साउदी अरब मंे रह रहे प्रवीण ने स्थानीय कुछ गुण्डे को पैसे देकर राखी को जान से मार देने के लिए कहा। गुण्डे राखी के घर गये, राखी पर आक्रमण भी हुआ, वह भाग गयी। गाँव वालों को पता चल गया तो दौडÞकर राखी के सहयोग लिए आगे आए। गुण्डे और गाँव वालांे के बीच झडÞप भी हर्ुइ। एक दो लोग घायल भी हुए।
इस घटना के बाद राखी घर की चार दिवारी से बाहर आ गई और गाँव वालांे की सहायता से उसने राजविराज में पत्रकार सम्मेलन मार्फ अपनी दुःख भरी कहानी सुनायी। आँख से आँसू निकालते हुए राखी ने न्याय की भीख मांगी और सभी सञ्चारकर्मियों सेे सहयोग के लिए याचना भी की।
पत्रकार सम्मेलन में उपस्थित गाँववालों ने स्थानीय प्रशासन को धमकी दी कि दोषी को २४ घण्टे के अन्दर गिरप्तार नहीं किया गया तो कडÞे आन्दोलन में उतरेंगे। संक्रमण से गुजर रहे इस मुल्क में प्रशासन सीधे साधे आदमी की बात ही नहीं सुनता लेकिन जब आन्दोलन की धमकी दी जाती है तो तुरन्त सक्रिय हो जाता है। बात बहुत आगे पहँुच चुकी देखकर सप्तरी जिला के निमित्त पुलिस प्रमुख ने कहा की मारपीट में जो संलग्न थे उसके विरुद्ध मुद्दा दायर हो चुका है और दोषी को कडÞी से कडÞी सजा मिलेगी।
दोषी को सजा मिलती है या नहीं यह तो भविष्य ही बतायेगा फिलहाल राखी को सलाम। बडी हिम्मत के साथ उसने न सिर्फअपनी जान बचायी, बल्कि घर-घर में महिला पर हो रहे अत्याचार की कहानी उसने समाज के सामने रख दी है।
अभी राखी ससुराल में ही रहती है। गाँववालो नें उसे खिलाने-पिलाने की जिम्मेवारी ली है। आज इस घर से तो कल उस घर से उसे खाना मिल जाता है। वह न्याय की खोज में है, वह तमाशा बन गयी है लेकिन स्थानीय अधिकारवादी सब चुप्पी साधे हुए है। बात बडे सञ्चार माध्यम के मार्फ जगजाहिर हो चुका है लेकिन न तो स्थानीय और ना ही तो राजधानी में बैठे हुए कथित अधिकारवादी नें इस घटना पर कोई आवाज उर्ठाई है। प्रशासन और अधिकारवादी की चुप्पी और गाँव वालें के दबाब  के कारण राधाबल्लभ भी अभी चुप है। स्थानीय गाँववासी के अनुसार राधाबल्लभ का कहना है कि राखी को प्रवीण पसन्द नहीं करता। गाँववालों की बात मानी जाय तो राधाबल्लभ की नियत  ठीक नहीं दिखती। वह खुद ही बहू के साथ रहना चाहता है। राधाबल्लभ ने खुलकर गाँववासी के आगे कह दिया है कि मेरा बेटा नहीं रखेगा तो मैं इसे रखूंगा। राधाबल्लभ के इस बयान ने तो सारे रिश्ते नातों पर ही कालिख पोत दी है। और साथ ही साथ दहेज के नाम पर हो रहे अत्याचार को गंभीरता से अध्ययन करने की नई चुनौती खडÞी कर दी है। दहेज के कारण महिला पर हो रही यातना क्या सिर्फदहेज के कारण ही है या कारण कुछ और है – िि
मिौन प्रशासन

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