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तंबाकू मनुष्य ही नहीं पर्यावरण के स्वास्थ्य के लिए भी घातक है : डॉ मनोज कुमार तिवारी

 

*विश्व तंबाकू निषेध दिवस(31मई) पर विशेष*

डॉ मनोज कुमार तिवारी वाराणसी । तंबाकू के दुष्प्रभाव से लोगों को जागरूक करने तथा इससे निजात पाने के प्रयासों को वढावा देने के लिए 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व तंबाकू निषेध दिवस का नारा (थीम) है- *पर्यावरण की रक्षा करें* तंबाकू मानव के लिए अनेक रोगों का कारण है। तंबाकू से जल, वायु, जंगल व भूमि व्यापक रूप से प्रदूषित होता है।

*तंबाकू का पर्यावरण पर दुष्प्रभाव:-* तंबाकू की फसल के कारण जंगल कट रहें हैं। तंबाकू के सेवन से वातावरण में अनेक हानिकारक पदार्थ पैदा होते हैं। तंबाकू के निर्माण, पैकेजिंग एवं परिवहन से भी पर्यावरण में अनेक प्रकार के प्रदूषण बढ़ते हैं। तंबाकू के कारण हजारों टन जहरीले पदार्थ व ग्रीन हाउस गैसेस पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहीं हैं। तंबाकू की खेती कृषि योग्य भूमि के पोषक तत्वों को हानि पहुंचाती हैं। तंबाकू निर्माण से रासायनिक कचरा पैदा होता है।

एक और जहां पर्यावरण मंत्रालय ने तंबाकू उद्योग को अत्यधिक प्रदूषण कारी उद्योग के कैटेगरी में रखा है तो वही बीड़ी उद्योग को कुटीर उद्योग का दर्जा प्राप्त है। तंबाकू निर्माण इकाईयों से पानी दूषित होता है। सेंट्रल टोबैको रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीटीआरआई) के अनुसार आधा हेक्टेयर तंबाकू की फसल ठीक करने के लिए 1 हेक्टेयर जंगल की लकड़ी की आवश्यकता होती है। सीटीआरआई के अनुसार तंबाकू का उत्पादन करीब 3000 लाख किलोग्राम है एक किलोग्राम तंबाकू के उपयोग योग्य बनाने के लिए 8 किलोग्राम लकड़ी की आवश्यकता होती है। एक अनुमान के अनुसार हर वर्ष 24000 लाख किलोग्राम लकड़ी तंबाकू ठीक करने हेतु जलती है। 300 सिगरेट तैयार करने के लिए एक पेड़ काटा जाता है। 2010 में भारत में 10000 मिलियन सिगरेट का उत्पादन किया गया अनुमान के अनुसार लगभग 6750 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन हुआ होगा।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तंबाकू छोड़ने का निश्चय करने वालों में से केवल 30% लोग ही तंबाकू छोड़ने के उपाय को अपनाने में सफल होते हैं। एक अनुमान के अनुसार पूरी दुनिया में प्रति 6 सेकंड पर एक व्यक्ति की मौत का कारण तंबाकू होता है। भारत में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या लगभग 27 करोड़ है। ग्लोबल एडल्ट तंबाकू सर्वेक्षण ( 2016-17) के अनुसार भारत में 42.47% पुरुष तथा 12.24% महिलाएं तंबाकू का प्रयोग करते हैं।

*सेकंड हैंड स्मोकिंग:*
ऐसे मामले हैं जिसमें व्यक्ति स्वयं धूम्रपान नहीं करता किंतु उसके परिवार के सदस्य एवं आसपास के लोगों द्वारा धूम्रपान करने के कारण श्वांस के माध्यम से वे धूम्र ग्रहण करते हैं।सिगरेट व बीड़ी पीने वाले जो धुआं छोड़ते हैं उसमें सामान्य हवा की अपेक्षा 3 गुना ज्यादा निकोटीन, 3 गुना टार एवं 50 गुना अमोनिया होता है। बच्चों में सेकंड हैंड स्मोकिंग के कारण दिल का दौरा पड़ने या स्ट्रोक का खतरा बहुत अधिक रहता है। इससे महिलाओं में बांझपन का भी खतरा बढ़ जाता है। एक अनुमान के अनुसार भारत में 50% लोग सेकंड हैंड स्मोकिंग के शिकार होते हैं।

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*तंबाकू का दुष्प्रभाव:*
# गुर्दे की बीमारी
# नेत्र रोग
# सांस की समस्याएं
# दांतों की समस्या
# आंतों में सूजन
# त्वचा रोग
# कैंसर
# उच्च रक्तचाप
# दमा

*तम्बाकू के जोखिम कारक:*
# माता-पिता या परिवार के सदस्यों द्वारा तंबाकू का सेवन करना।
# पालन-पोषण का अनुचित ढंग
# रोल मॉडल के द्वारा तंबाकू का सेवन।
# अभिभावकों व शिक्षकों द्वारा बच्चों के प्रति तिरस्कार पूर्ण व्यवहार।
# भावनात्मक स्थिरता की कमी।
# समायोजन क्षमता की कमी।
# मानसिक विकार
# पहचान बनाने की त्रुटिपूर्ण अवधारणा
# समायोजन की क्षमता में कमी
# जागरूकता की कमी
# शिक्षा की कमी
# सामाजिक सांस्कृतिक प्रथाएं
# प्रचार माध्यम
# तंबाकू का सर्व सुलभ होना

*तंबाकू छोड़ने के उपाय:*
# तंबाकू का प्रयोग करने वाला व्यक्ति छोड़ने का पक्का इरादा बनाएं।
# अचानक से बंद न करके धीरे-धीरे तंबाकू की मात्रा में कमी करें।
# तंबाकू छोड़ने में परिवार और मित्रों का सहयोग ले।
# ऐसे लोगों से संपर्क न रखें जो तंबाकू का सेवन करते हैं।
# तंबाकू की तलब महसूस होने पर मुंह में पिसी हुई काली मिर्च, लौंग, छोटी इलाची, टॉफी, च्यूइंगम का प्रयोग करें।
# अपने पास में तंबाकू कदापि न रखें।
# गुनगुने पानी में नींबू का रस व शहद मिलाकर पीने से इसके तलब में कमी आती है
# तंबाकू से होने वाली हाँनियों की सूची अपने कमरे में लगाएं।

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*तंबाकू निषेध से पर्यावरण को लाभ:-*
# जंगलों का कटान रुकेगा
# वायु प्रदूषण कम होने से लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा उपलब्ध होगी
# जल प्रदूषण कम होने से जल जीवों की रक्षा के साथ- साथ पीने योग्य पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
# कृषि योग्य भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी।
# तंबाकू के कचरे से मुक्ति
*उपचार:*
# व्यावहारिक मनोचिकित्सा
# मनोवैज्ञानिक शिक्षा
# अरुचि चिकित्सा
# सामाजिक समर्थन
# निकोटीन प्रतिस्थापना उपचार

व्यक्ति दृढ़ इच्छाशक्ति, परिवार, मित्रों के सहयोग एवं समर्थन तथा मनोवैज्ञानिकों के उचित परामर्श एवं मनोचिकित्सा तथा आवश्यक होने पर चिकित्सक द्वारा प्रदत्त दवाई लेकर तंबाकू की लत पर आसानी से विजय प्राप्त कर सकता है तो आए हम सब विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर यह संकल्प लें की ना तंबाकू का सेवन करेंगे और न दूसरों को करने देंगे। अपने पर्यावरण की रक्षा कर इसे अगली पीढ़ी के उपयोग हेतु संरक्षित करने में सहयोग करें।

डॉ मनोज कुमार तिवारी
वरिष्ठ परामर्शदाता
ए आर टी सेंटर, एसएस हॉस्पिटल, आई एम एस, बी एच यू, वाराणसी

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