मधेश में साईकिल चढ़कर,छाता ओढ़कर, ढ़किया लेकर, होर्न बजाते हुए एक साथ चल सकते हैं या नहीं – दीपेन्द्र झा
काठमांडू, ११ माघ–
गजेन्द्र नारायण सिह के २१ वीं पुण्य तिथि के अवसर पर हुए कार्यक्रम में बोलते हुए अधिवक्ता दीपेन्द्र झा ने अपनी बातों को रखते हुए कहा कि राजनीति का सफर आसान नहीं होता है । मैं इसबार चुनाव हारकर आया हूँ । वैसे भी राजनीति है ही ऐसी जहाँ या तो लोग जीतते हैं या सीखते हैं तो मैं अभी सीखने के क्रम में हूँ ।
उन्होंने देश के जुझारु नेता के रुप में गजेन्द्र नारायण सिंह को याद किया । आज की राजनीति को मद्दें नजर रखते हुए उन्होंने कहा कि मधेश की राजनीति में ऐसे टुकड़े टुकड़े दल में रहकर हम कुछ नहीं कर पाऐंगे । ये चारों दल अगर मिल जाएं तो बहुत कुछ कर सकते हैं । लेकिन जबतक अलग हैं ये सत्ताधारी से अपनी बात अपनी पहचान, अपनी नागरिकता को लेकर बहस नहीं कर पाऐंगे । उन्होंने बार बार आग्रह किया कि आप एक हो जाएं । उन्होंने प्रश्न किया कि– क्या मधेश में साईकिल चढ़कर,छाता ओढ़कर, ढ़किया लेकर, होर्न बजाते हुए आप सभी एक साथ नहीं चल सकते हैं ? उन्होंने नागरिकता विधेयक को लेकर भी बात की । उन्होंने रेशम चौधरी जी की बात की । उन्हें इस सरकार से कोई उम्मीद नहीं है । इसलिए वो चाहते हैं कि ठीक है हम एक गठबंधन में नहीं आ सकते हैं लेकिन कम से कम कुछ एजेण्डा पर एकजुट होकर अपनी अड़ान तो ले सकते हैं न ।
उन्होंने कहा कि गजेन्द्र नारायण सिंह ने जिस गंभीर रुप से नागरिकता और संघियता के मुद्दें को उठाया था उसे हम आजतक क्यों नहीं सरकार से मनवा पाएं तो यदि हम उनके द्वारा किए गए प्रयास को सफल कर सकें तो यही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।

