नहीं रहे प्राज्ञ तथा साहित्यकार दधिराज सुवेदी
काठमांडू, चैत १४ –
साहित्यकार प्राज्ञ दधिराज सुवेदी का ७८ वर्ष की उम्र में निधन हो गया गया है । २००३ साल में भोजपुर के दिङ्ला में जन्मे उनके अभी दो पुत्र, एक पुत्री और पत्नी हैं । पिछले कुछ समय से वो कैंसर रोग से पीडि़त थे । उनका इलाज किया जा रहा था ।
इलाज के ही क्रम में विराट मेडिकल कालेज एण्ड टिचिङ अस्पताल बुढीगंगा मोरङ में आज (बुधवार) सुबह तीन बजे निधन हो गया है । उनका विराटनगर स्थित परोपकार घाट में बुधवार दाहसंस्कार किया जाएगा ।
नेपाली भाषा और साहित्य में योगदान देने वाले सुवेदी ने विराटनगर को अपना कर्मक्षेत्र बनाया था । कर्मशील ब्यक्तित्व के रूप में परिचित उन्होंने खोज तथा अनुसन्धान मूलक दर्जनौं ऐतिहासिक पुस्तक की रचना की है । सुवेदी लेखन और समालोचना पसंद करते थे ।
उनके भाई दिनेशराज सुवेदी के अनुसार नगरपञ्चायत में बहिदार पद से उनकी उनका नौकरी जीवन शुरु हुआ था । बाद में वो नेपाल खानेपानी संस्थान स्थापना होने पर नगरपालिका के अन्तर्गत काम करके निवृत्त हुए । विराटनगर के आदर्शरात्री और कन्या क्याम्पस स्थापना होने के बाद कुछ वर्ष वहाँ बच्चों को भी पढ़ाया ।
इसके बाद पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय में सूचना अधिकृत के रूप में १२ वर्ष तक काम किया । सुवेदी के मौलिक कृति एक दजर्न, सम्पादित कृति १५०, उनके ही विशिष्ट सम्पादन में ‘बरगाछी’ पुस्तक का प्रकाशन हुआ । इस पुस्तक प्रकाशन के समय प्रतिबन्धित समय था उन्होंने वीपी कोइराला की सानिध्य में रहकर बरगाछी का प्रकाशन किया था ।
सुवेदी के समग्रह समालोचना विश्व विद्यालयों में पढ़ाई जाती है । उन्होंने विभिन्न लेखकों के लगभग दो सौ किताबों में भूमिका भी लिखा है । मोरङ में साहित्य की उत्पति और विकास को लेकर भी उनकी कृति प्रकाशित है ।
अपने सम्पूर्ण जीवन नेपाली साहित्य और सामाजिक कार्य में समर्पण करने वाले सुवेदी ने अन्य साहित्यकारों के संस्मरण को समेट कर दर्जनों पुस्तक प्रकाशन किया है । वो साहित्य क्षेत्र के एक स्तम्भ थे । सुवेदी ने अपने जीवनकाल में ही अपने नाम से राष्ट्रीय साहित्य तथा पत्रकारिता पुरस्कार स्थापना कर हरेक वर्ष वितरण करते आए थे ।


