विद्युत व्यापार सम्झौता पर हस्ताक्षर, विद्युत उर्जा विकास पर नयाँ आयाम
२०७१ कार्तिक ४ गते, काठमाणडू । भारत के महामहिम प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी के अगष्त २०१४ मे हुये नेपाल भ्रमण के दौरान जो निर्णय किया गया था उसके अनुसार भारत सरकार और नेपाल सरकार के बीच ‘विद्युत उर्जा व्यापार, सीमापार प्रसारण अन्तरसंजाल तथा ग्रिड जडान’ सम्झौता पर हस्ताक्षर किया गया है । भारत सरकार के उर्जा मन्त्रालय के सचिव श्री पी.के. सिन्हा और नेपाल सरकार के उर्जा मन्त्रालय के सचिव श्री आर.के. क्षेत्री ने आज २१ अक्टोबर २०१४ को काठमाण्डौ मे हस्ताक्षर किया । दोनो सचिव ने ४ सेप्टेम्बर २०१४ को ही सम्झौता के प्रारम्भिक मस्यौदा पर हस्ताक्षर किया था । उसकेबाद इसे दोनो देश के मन्त्री परिषद् से अनुमोदन कराया गया था । आज समझौता के नेपाल के उर्जा मन्त्री तथा सरकार के मुख्य सचिव मौजुद थे तो वहीं भारत के राजदूत महामहिम रजींत राय तथा भारतीय दूताबास के प्रथम सचिव श्री आशेस सिन्हा की भी उपस्थिति थी ।
इस सम्झौता से नेपाल और भारत के बीच सीमापार विद्युत प्रसारण , ग्रिड जडान तथा विद्युत व्यापार आसान हो जायेगा । यह सम्झौता भविष्य मे नेपाल मे निर्माण होनेवाले विद्युत आयोजना से उत्पादित अतिरिक्त विजुली पारस्परिक रुप मे दियेगये शर्तो के आधार पर भारतीय कम्पनी को नेपाल से विद्युत आयात करने मे मदत करेगा । इस सम्झौता अन्तर्गत दोनो देश के बीच स्थापित संयुक्त कार्य समूह का पहला बैठक नोभेम्बर २०१४ मे आयोजित किया गया था । नेपाल अभी भारत से २०० मेगावाट विद्युत आयात कररहा है । अभी नयाँ क्रोसबोर्डर प्रसारण लाईन का निर्माण कार्य जारी है जिससे इसकी क्षमता आगामी दो वर्षो मे दोब्बर हो जायेगी ।
दोनो पक्ष ने सेप्टेम्बर २०१४ मे आईबीएन और जीएमआर के बीच ९०० मेगावाट क्षमता का अपर कर्णाली जलविद्युत परियोजना निर्माण के लिये विद्युत विकास सम्झौता पर हुये हस्ताक्षर का स्वागत किया है । एसजेभीएन और आईबीएन के बीच नौ सय मेगावाट क्षमता का अरुण थर्ड सम्बन्धि पीडीए वार्ता अभी जारी है जिसपर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का नोभेम्बर २०१४ मे होनेवाले भ्रमण के समय मे हस्ताक्षर होने की सभांवना है ।
नोभेम्बर २०१४ मे काठमाण्डौ मे होनेवाले अठारहवाँ सार्क सम्मेलन से पहले अतिरिक्त ७० मेगावाट विजली आपूर्ति करने को नेपाल सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार व्दारा विचार किया जारहा है ।

