रावल के प्रधानमंत्री ओली से 74 सवाल
काठमांडू -2जनवरी
पार्टी के हितों के खिलाफ गतिविधियों के लिए एमाले से निष्कासित पूर्व उपाध्यक्ष भीम रावल ने अध्यक्ष और प्रधान मंत्री केपी शर्मा ओली से 74 सवाल पूछे हैं और कहा है कि उन्होंने ‘मनमाने, निरंकुश और तानाशाही’ फैसले लिए हैं।
उन्होंने ओली पर यह कहते हुए आरोप लगाया कि क्योंकि उन्हाेंने आयोजित 10वीं महाअधिवेशन में ओली के खिलाफ प्रतिस्पर्धा की थी इसलिए उन्हें निष्काशित किया गया ।
पार्टी से निष्कासन के ठीक एक सप्ताह बाद, नेता रावल ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह पार्टी अध्यक्ष ओली के साथ बार बार सहयोग का प्रयास करने पर भी सहकार्य करने में विफल रहे हैं। उनका कहना है कि चूंकि यूएमएल के पास उनसे 4 गते कार्तिक को स्पष्टीकरण मांगने का कोई कारण नहीं था, इसलिए उन्होंने जवाब नहीं दिया और उनके खिलाफ कार्रवाई करने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
विवादास्पद व्यवसायी मीन बहादुर गुरुंग के दान से पार्टी मुख्यालय बनाने के एमाले के फैसले की आलोचना करने के बाद, एमाले सचिवालय ने उसी दिन रावल, स्थायी समिति सदस्य विंदा पांडे और केंद्रीय सदस्य उषाकिरण तिमसेना से स्पष्टीकरण मांगा था ।
नेता रावल ने ओली पर 2074 के चुनावों से पहले सत्ता हितों के लिए माओवादियों के साथ समझौते करने, हितों के टकराव के बाद नेकपा को विभाजित करने, संसद को भंग करने और अस्थिरता पैदा करने, एमाले को विभाजित करने, अलग राय रखने वाले नेताओं को मना करने और संबंधित मुद्दों पर समझौता करने के दर्जनों आरोप लगाए हैं। रावल द्वारा प्रस्तुत 31 पन्नों का लिखित बयान ओली की आलोचना और उन पर लगे आरोपों पर सवाल उठाने, खंडन करने पर केंद्रित है।
रावल ने एमाले अध्यक्ष ओली पर वित्त मंत्री बिष्णु प्रसाद पौडेल के बेटे नवीन और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश कुमार रेग्मी पर ललिता निवाभूमि मामले में मुकदमा न चलाने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है।
“क्या प्राधिकरण के दुरुपयोग जांच आयोग द्वारा मामला दर्ज न करने का निर्णय इसलिए नहीं है क्योंकि तत्कालीन नेकपा महासचिव के बेटे नवीन पौडेल और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश कुमार रेग्मी ने ललिता निवास की जमीन सरकार को वापस करने पर सहमति व्यक्त की थी?”
रावल ने ओली की पिछली कैबिनेट में गृह मंत्री रहे राम बहादुर थापा के बेटे प्रतीक और उनके सुरक्षा सलाहकार इंद्रजीत राय के फर्जी भूटानी शरणार्थी मामले में शामिल होने के सवाल का भी जवाब मांगा।
उन्हाेंने कहा कि जब आप प्रधान मंत्री थे तो 29 असार 2076 को दोबारा रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक कार्यदल का गठन किया गया था और उसी समय कार्यदल का जनादेश गिरोहों के हाथों में आ गया और कथित नाम छुटे हुए 8 सय 75 लाेगाें काे फार्म भरा कर प्रत्येक से 10 से 15 लाख रुपैयाँ लिया गया ?’ सवाल यह है, ‘आपने सार्वजनिक रूप से कहा है कि आप जानते हैं कि नकली भूटानी शरणार्थी बनाने का गिरोह 2012 से सक्रिय है। एक जिम्मेदार पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते आपने सरकार से कार्रवाई की मांग क्यों नहीं की? बाद में जब वह प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की?’
नेता रावल ने ओली पर अवसरवादी होने का भी आरोप लगाया . प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता रावल ने घोषणा की है कि वह “देशभक्तिपूर्ण वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति” का निर्माण करेंगे। उनका कहना है कि वह एक राजनीतिक ताकत बनाएंगे जो राष्ट्रीय स्वतंत्रता, स्वाभिमान और समृद्धि के लिए खड़ी होगी। उन्होंने बताया कि देश के अंदर और बाहर मातृभूमि जागृति अभियान चलाकर पार्टी का गठन किया जाएगा।


