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नेपाली फिल्मों की छलांग सुनहरे भविष्य की आशा : लिलानाथ गौतम

लिलानाथ गौतम, हिमालिनी अंक नवंबर 024।

नेपाली फिल्म निर्माताओं के लिए एक परेशानी है– हिन्दी फिल्म । हॉल में नेपाली फिल्म रिलीज करने से पूर्व वे हिन्दी फिल्मों की ओर जरुर नजर लगाते हैं । बाजार में रिलीज हुई हिन्दी फिल्म हो या आनेवाले हिन्दी फिल्म को ध्यान में रख कर ही वे अपनी नेपाली फिल्म का रिलिज डेट तय करते हैं । इसके पीछे एक ही कारण है– हिन्दी फिल्मों के कारण अपना फिल्मी करियर डूब ना जाए ! नेपाली फिल्म निर्माता कई महीने पहले अपना फिल्म रिलीज का डेट तय करते हैं । लेकिन घोषित मिति में कोई अच्छी सी हिन्दी फिल्म रिलीज हो जाती है तो नेपाली फिल्म निर्माता अपने रिलीज डेट को ही स्थगित कर देते हैं । यह उनकी बाध्यता भी है । नेपाली फिल्मों की तुलना में हिन्दी फिल्मों के प्रति दर्शकों का आकर्षण उनके लिए परेशानी बन जाती है ।

यहां एक बात स्मरणीय है, काठमांडू, पोखरा, वीरगंज जैसे नेपाल के मुख्य शहरों में सामान्यतः दो से तीन हफ्ता तक हिन्दी फिल्मों के लिए दर्शक मिल जाता है, लेकिन वहीं कई नेपाली फिल्म दो दिन भी नहीं टिक पाता । जिससे निर्माता और निदेर्शक निराश हो जाते थे । लेकिन पिछले दो महिनों में परिस्थिति ठीक उलटा हो गयी है । इस अवधि में नेपाली फिल्मों ने हिन्दी फिल्मों को हॉल से उतार दिया है । हिन्दी फिल्मों की तुलना में नेपाली फिल्मों ने दर्शकों को ज्यादा आकर्षित किया है । जिससे नेपाली फिल्म निर्माता उत्साहित हैं और सुनहरे भविष्य की कल्पना में खो बैठे हैं ।

हां, दशहरे से पूर्व रिलीज ६ नेपाली फिल्मों ने इसतरह दर्शकों को आकर्षित किया है कि जो इससे पहले कभी नहीं हुआ था । तथ्यांक अनुसार डेढ़ महीने में नेपाली फिल्मों ने ६५ करोड़ का व्यापार किया है । इस अवधि में कामेडी, सामाजिक कथावस्तु से लेकर एक्सन विषयवस्तु में आधारित फिल्म रिलीज हुई है, उन सब को दर्शक ने पसन्द किया है । दशहरे से पूर्व सबसे पहले आश्विन ३ गते ‘खुस्मा’ रिलीज हुई थी, जिसने बाक्स आफिस में एक हद तक की सफलता प्राप्त की । खुस्मा में धीरज मगर और उपासना सिंह ठकुरी मुख्य अभिनेता हैं । निर्देशक अशोक थापामगर के अनुसार खुस्मा ने ६ करोड रूपये से अधिक की कमाई की है ।
उसके बाद आश्विन १७ गते ‘बेहुली फ्रम मेघौली’ रिलीज हुई थी, इसके निर्माता निश्चल बस्नेत हैं । बस्नेत स्वयम् और स्वस्तिमा खडका इस फिल्म के मुख्य कलाकार हैं । लगभग ४ करोड की कमाई होने के बाद निर्माता बस्नेत ने ‘बेहुली फ्रम मेघौली’ को हॉल से निकाला, जो आज के दिन ओटिटी प्लेटफॉर्म में है ।

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एक सप्ताह के बाद आश्विन २४ गते एक साथ तीन फिल्म रिलीज हुई । जो बाजार बिस्तार की दृष्टिकोण से एक टर्निङप्वाइट बन रही है । हां, ‘छक्कापञ्जा ५’ ‘१२ गाउँ’ और ‘ज्वाइँ साब’ में से दो फिल्मों ने आक्रामक व्यापार किया । तुलनात्मक रूप में ‘ज्वाइँ साब’ का प्रदर्शन कमजोर रहा, तब भी ‘ज्वाइँ साब’ के निर्माता इसके व्यापार से खुश हैं । जानेमाने फिल्मकर्मी विराज भट्ट के सुपुत्र समीर भट्ट ने ‘१२ गाउँ’ से फिल्मी जगत में डेभ्यू किया है, जो एक सफल कलाकार के रूप में नजर आ रहे हैं । ‘१२ गाउँ’ ने तीन हफ्तों में २४ करोड़ की कमाई की है । कुछ सालों से ‘छक्का पञ्जा’ सीरीज निर्माण कर रहे हास्यकलाकार दीपकराज गिरी और दीपाश्री निरौला की ‘छक्का पञ्जा ५’ की कमाई भी २० करोड़ से ऊपर हो गयी है । लेकिन कथावस्तु, कलाकार और प्रस्तुति आकर्षक होते हुए भी जितु नेपाल और नीति शाह अभिनीत फिल्म ‘ज्वाइँ साब’ प्रतिस्पर्धा में पीछे पड़ गयी । निर्देशक बसन्त निरौला ने कहा है कि ‘ज्वाइँ साब’ ने ५ करोड़ की कमाई की है, जो सन्तोषप्रद है । यहीं एक और टर्निङप्वाइन्ट बन कर आ जाता है– ‘पूर्ण बहादुरको सारंगी ।’

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शुभदीपावली के अवसर पर ‘पूर्ण बहादुरको सारंगी’ को रिलीज किया गया है, जो शुरु के तीन दिन दर्शकों की नजर में नहीं पड़ा था । लेकिन जब फिल्म देखनेवाले कुछ दर्शकों की रोती हुई तस्वीर और भीडियो सामाजिक सञ्जाल में आने लगी, तब दर्शकों की उत्सुकता बढ़ने लगी, कुछ ही दिनों में ‘पूर्ण बहादुरको सारंगी’ ने कई फिल्मों का रेकर्ड ब्रेक करना शुरु किया । बताया गया है कि सबसे कम समय (१० दिनों) में सबसे अधिक कमाई करनेवाला फिल्म का रिकार्ड अब ‘पूर्ण बहादुरको सारंगी’ को मिल गया है । आज भी कई हॉलों में हाउसफुल है ।

यहां एक बात स्मरणीय है, उल्लेखित तीन नेपाली फिल्मों के कारण ही बलिउड के बहुप्रतिक्षित फिल्म ‘सिंघम अगेन’ और ‘भूल भुलैया ३’ फिल्म हॉल में पीछे पड़ गया है । अर्थात् नेपाली फिल्मों की तुलना में हिन्दी फिल्मों के दर्शक कम हो गए हैं । समीक्षा हो रही है कि अब नेपाली फिल्म भी विश्व बाजार में प्रतिस्पर्धा के लायक हो रही है । वैसे तो ‘पूर्णबहादुरको सारंगी’ में कोई चर्चित स्टार (कलाकार) नहीं है । हरदम साइड रोल में दिखनेवाले विजय बराल इस फिल्म में लीड रोल में हैं । उनके साथ प्रकाश सपुत, मुकुन भुसाल, अञ्जना बराइली, बुद्धि तामाङ, माओत्से गुरूङ, अलिशा बास्तोला जैसे कलाकार हैं । फिल्म को सरोज पौडेल ने निर्देशन किया है । लेखन भी पौडेल का ही है ।

सेभेन सिस सिनेमा और बासुरी फिल्मस् की प्रस्तुति में विनोद पौडेल और प्याट्रिक सुवेदी द्वारा निर्मित ‘पूर्ण बहादुरको सारंगी’ सामाजिक कथावस्तु में आधारित फिल्म हैं, व्यापार की दृष्टिकोण से जिसने आज तक की इतिहास को रेकर्ड ब्रेक किया है । नेपाल से बाहर भी ‘पूर्ण बहादुरको सारंगी’ का डिमाण्ड उच्च है । फिल्म निर्माता का कहना है कि अमेरिका में एक साथ सबसे अधिक हॉल में लगनेवाली नेपाली फिल्म का रेकर्ड भी ‘पूर्ण बहादुरको सारंगी’ को मिल रहा है । बताया गया है कि ‘पूर्ण बहादुरको सारंगी’ आज के दिन दैनिक ३ करोड़ से अधिक व्यापार कर रही है । मार्गशीर्ष प्रथम हफ्ता ‘पूर्णबहादूरको सारंगी’ को सबसे अधिक शो (४२० शो) मिल रहा है । इस फिल्म में अपने बेटे के भविष्य को लेकर एक पिता की ओर से किए गए संघर्ष को दिखाया गया है ! जो दर्शक, फिल्मकर्मी से लेकर राजनीतिक नेताओं के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है ।
नेपाली फिल्मों के उत्साहजनक व्यापार को देखकर सिनेमा हॉल के सञ्चालक तथा वितरकों की साझा संस्था नेपाल चलचित्र संघ के अध्यक्ष नरेन्द्र महर्जन ने खुशी व्यक्त की है कि दर्शकों की ओर से नेपाली फिल्मों को प्राप्त इसतरह की ममता फिल्म उद्योग के लिए सुखद और गौरव का विषय है । उनका यह भी कहना है कि कथा और कन्सेप्ट अच्छा रहता है तो हर तरह की फिल्म चल सकती है ।
फिल्म बजार के इतिहास को देखे तो एक साल में मुश्किल से ५–६ नेपाली फिल्म सफल होती है । बांकी फिल्मों को अपना निवेश कलेक्सन करना भी मुश्किल पड़ता है । लेकिन पिछली बार ६–७ महीनों की अवधि में लगभग एक दर्जन नेपाली फिल्मों ने अपना निवेश सुरक्षित किया है । नया साल २०८१ के शुरुआत के दिन में ही रिलीज ‘मनसरा’ और ‘बोक्सीको घर’ हो या उसके बाद रिलिज ‘जारी’, ‘गाउँ आएको बाटो’ और ‘शाम्बाला’ ही क्यों ना हो, सभी ने अपना निवेश सुरक्षित किया है । पिछले सात महीनों में ११ फिल्म बॉक्स अफिस में सफल माना गया है, इसमें से चार फिल्म ब्लाकबस्टर साबित हो गया है । जो नेपाली फिल्म बजार के लिए सुखद् पक्ष है ।

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लिलानाथ गौतम

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