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नेपाल में भूकंप से मरने वालों की संख्या हो सकती है 10000: कोइराला

 

काठमांडू: बीते शनिवार से अब तक भूकंप के करीब 68 झटके झेल चुके नेपाल में चारों ओर तबाही का मंजर है। मंगलवार तड़के फिर भूकंप के झटकों से नेपाल के लोग सहम गए। सोमवार सुबह भी काठमांडू में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने बताया कि मरने वालों की संख्या बढ़कर दस हजार तक जा सकती है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि बचाव का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। लेकिन यह नेपाल के लिए मुश्किल की घड़ी है, जो बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। नेपाल के गृहमंत्रालय की तरफ से जो ऑकड़े जारी किए गए हैं, उसमें मृतकों की संख्या 4349 बताई गई है। लेकिन यह ऑकड़ा अगर 10000 पर पहुंचता है तो वर्ष 1934 में आए भूकंप के दौरान हुई 8500 मौतों से अधिक हो जाएगा। आपको बता दें, शनिवार को जब भूकंप आया था तो उस समय कोइराला विदेश दौरे पर थे।Nepal_010

युद्धस्तर पर बचाव कार्य

भूकंप के बाद रविवार रात से हो रही बारिश नेपाल ने हालात को बद से बदतर बना दिया। वहीं, काठमांडू सहित नेपाल के कई हिस्सों में बारिश से बचाव व राहत कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अभी भी मलबे में हजारों की संख्या में लोग फंसे हैं। नेपाल आर्मी व भारत की तरफ से राहत व बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय राहत दल भी बचाव के लिए नेपाल पहुंच गए हैं। भारत ने वायुसेना के 13 विमान राहत कार्य के लिए लगाए हैं। भारत की तरफ से एनडीआरएफ की 10 टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं। कई भरतीय मेडिकल टीमों समेत कई मेडिकल टीमें भी घायलों को उपचार मुहैया करा रही हैं। वहीं, भारत से अलग-अलग मंत्रालयों के अधिकारियों की एक टीम नेपाल के लिए रवाना हुई है। इस टीम में गृह, रक्षा, विदेश व एनडीएम के अधिकारी शामिल हैं। यह टीम वहां राहत और बचाव के काम पर नजर रखेगी। गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव बीकेप्रसाद टीम की अध्यक्षता कर रहे हैं।

भूकंप से धराशायी नेपाल की अर्थव्यवस्था

राजनीतिक अस्थिरता से उबर पटरी पर आ रही नेपाल की अर्थव्यवस्था को शनिवार को आए विनाशकारी भूकंप ने कई दशक पीछे धकेल दिया है। भूकंप के शक्तिशाली झटकों से आर्थिक हानि का आंकड़ा नेपाल के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से भी अधिक हो सकता है। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के शुरुआती अनुमान के अनुसार लामजुंग में आए 7.9 तीव्रता वाले भूकंप से नुकसान 10 अरब डॉलर तक का हो सकता है। इसमें कोडारी में रविवार को आए 6.7 तीव्रता वाले भूकंप से हुई तबाही को भी जोड़ लिया जाए तो नुकसान का आंकड़ा नेपाल की जीडीपी से अधिक हो सकता है। वर्ष 2013 में नेपाल का जीडीपी 19.29 अरब डॉलर था। 1934 के बाद यहां सर्वाधिक शक्तिशाली भूकंप आया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस भूकंप की मार से उबरने में नेपाल को कई वर्ष लग जाएंगे।

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अपनी जगह से 10 फुट दक्षिण में खिसका काठमांडू

भीषण भूकंप से सिर्फ तबाही ही नहीं हुई बल्कि नेपाल में भौगोलिक बदलाव भी आए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार काठमांडू 30 सेकंड में अपनी धुरी से 10 फुट दक्षिण की ओर खिसक गया है। इसके साथ ही पृथ्वी के एक बड़े भू-भाग में भी बदलाव दर्ज किए गए हैं। वाडिया भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने नासा के हवाले से यह जानकारी दी है।

कंपन में 1689 परमाणु बमों के विस्फोट जितनी ऊर्जा

तीन दिन पहले नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप से सिर्फ इलाहाबाद ही नहीं तकरीबन आधा देश अनायास ही नहीं हिला। दरअसल धरती में दस किमी अंदर उतनी ऊर्जा बनी, जितनी 1689 परमाणु बमों को फोड़े जाने से बनती। इसीलिए शायद पृथ्वी के सामान्य होने की प्रक्रिया धीमी है और जब-तब कंपन हो रहा है।

300 ऑस्ट्रेलियाई लापता

नेपाल में भूकंप की त्रासदी में ऑस्ट्रेलिया के 300 से अधिक नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। कैनबरा टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के विदेशी मामलों और व्यापार विभाग की ओर से यात्रा पर गए 549 रजिस्टर्ड नागरिकों में से अब तक करीब 200 लोगों से ही संपर्क हो सका है। बाकी लोगों को कुछ भी पता नहीं है। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री जूली बिशप ने कहा है कि सरकार ने नेपाल को 30 लाख डॉलर का सहायता पैकेज देने व लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की खोज किए जाने के लिए आश्वस्त किया है।

पीएम मोदी की तारीफ

भूंकप से तबाह नेपाल की ओर तुरंत मदद का हाथ बढ़ाने वाले पीएम मोदी अपने ‘क्विक एक्शन’ के कारण छा गए। 7.9 तीव्रता वाले भूकंप के तुरंत बाद नेपाल व भारत के प्रभावित हिस्सों को लेकर बचाव दल भेजने के कारण संसद से लेकर सोशल मीडिया पर भी मोदी की तारीफ हो रही है। संसद की कार्यवाही शुरू होते ही राज्यसभा में सपा के सांसद राम गोपाल यादव ने केंद्र सरकार के प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने नेपाल के लोगों और वहां फंसे भारतीयों को लेकर तेज एक्शन लिया। इसकी तारीफ की जानी चाहिए।

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‘सेवा परमो धर्म’

सोशल मीडिया पर मिल रहे थैंक्स पर पीएम ने ट्वीट कर कहा कि जो भी थैंक्स कह रहे हैं, मैं उनकी भावनाओं का सम्मान करता हूं, लेकिन असली धन्यवाद तो इस देश की संस्कृति का है, जो हमें सिखाती है सेवा परमो धर्म।उन्होंने ट्वीट में कहा कि यदि आप किसी को धन्यवाद देना चाहते हैं तो आप भारत की 125 करोड़ जनता को धन्यवाद दें। भारत के लोगों ने नेपाल के लोगों के दर्द को खुद का दर्द बना लिया और पूरा समर्थन दिया।

भूकंप पीड़ित नेपाल में विदेशी मुल्क भी भारत के सहारे

यमन के युद्धग्रस्त क्षेत्र से हजारों भारतीयों और कुछ विदेशियों को भी सकुशल निकाल लाने की भारत की प्रतिष्ठा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ गई है। भूकंप से पीड़ित नेपाल में राहत के साथ सबसे पहले पहुंचे भारत से स्पेन ने भी अपने नागरिकों को बचाकर निकालने की अपील की है, जबकि कुछ अन्य देशों ने भारत का एअर रूट इस्तेमाल करने का आग्रह किया है ताकि राहत पहुंचाई जा सके। हवाई जहाज और बसों के जरिए अब तक लगभग साढ़े पांच हजार लोग नेपाल से निकाले जा चुके हैं। इसमें से 30 विदेशी हैं। विदेश सचिव जयशंकर ने बताया कि स्पेन की ओर से आग्रह आया है कि उनके नागरिकों को भी निकाला जाए। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही भारत ने यमन से भी भारतीयों समेत कुछ विदेशी नागरिकों को भी छुड़ाया था। उससे पहले इराक से भी कई भारतीयों को सकुशल निकाला गया था।

भूकंप पीड़ितों की मदद को बॉलीवुड सक्रिय

नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप और भारी जानमाल के नुकसान से जूझ रहे पीड़ितों की मदद के लिए अब बॉलीवुड भी आगे आ चुका है। अभिनेता अनिल कपूर, दीया मिर्जा व वीर दास जैसे सितारों ने अपने प्रशंसकों और दोस्तों से नेपाल के भूकंप पीड़ितों की मदद को दिल खोलकर सहायता करने का आग्रह किया है।

रोजाना 6 रुपये से बचाएं तबाही का खर्च !

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भूकंप ने मकानों की सुरक्षा के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं। अगर मकान भूकंप की चपेट में आ जाए तो क्या करेंगे? इसके लिए पहले ही मकान का इंश्योरेंस लिया जा सकता है जिसका रोजाना का इनवेस्टमेंट 6 से 12 रुपये तक होगा। अगर किसी प्राकृतिक आपदा में मकान को नुकसान पहुंचता है तो उसे दोबारा बनाने का खर्च आपको नहीं उठाना पड़ेगा। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आग व आपदा से सुरक्षा के मामले में 60 रुपये के प्रीमियम पर एक लाख रुपये का कवर मिल सकता है। इसमें मकान को प्राकृतिक आपदा व मानव निर्मित आपदाओं से सुरक्षा मिलती है। हालांकि जो लोग यह कवर ले सकते हैं, उनमें एक परसेंट से भी कम लोग इसका इस्तेमाल कर पाते हैं।

रोटी तो दूर, कफन भी मयस्सर नहीं

बेबसी का इससे अधिक आलम क्या हो सकता है कि पैसे बैंक में हैं लेकिन उसे निकालने का कोई रास्ता नहीं बचा। शाखाएं बंद हैं और एटीएम ठप। जरूरतमंद बहुत ज्यादा हैं और उपभोक्ता वस्तुएं कम हो गई हैं, लिहाजा कीमतें आसमान छू रही हैं। आपदा की इस घड़ी में नेपाल खासकर काठमांडू के लोगों को रोटी मिलना तो दूर लाशों को ढकने के लिए कफन तक नहीं है।

होम इंश्योरेंस का चलम कम

होम इंश्योरेंस में मकान को फिर से बनाने का खर्च कवर होता है। यह प्रॉपर्टी की कीमत के बराबर नहीं होता है। मकान का सामान्य ढांचा दोबारा खड़ा करने में 1800 रुपये प्रति वर्गफुट की लागत आती है। बेहतर कंस्ट्रक्शन में यह खर्च 3500 रुपये प्रति वर्ग फुट तक जाता है। 2000 वर्ग फुट के मकान के लिए 35-70 लाख रुपये तक इंश्योरेंस लिया जा सकता है। इतने के इंश्योरेंस का प्रीमियम लगभग 2100 से 4200 रुपये सालाना होगा। अगर पॉलिसी 10 साल या इससे लंबे वक्त के लिए लें तो यह प्रीमियम घट भी सकता है, क्योंकि इंश्योरेंस कंपनियां इस पर डिस्काउंट देती हैं। होम इंश्योरेंस के बजाय मकान के कंटेंट्स के लिए बीमा पॉलिसी लेना सस्ता पड़ता है।स्विस आरई की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल प्राकृतिक आपदाओं और इंसानी हरकतों के चलते होने वाली आपदाओं से एशिया में 52 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था, लेकिन इसमें से सिर्फ 10 परसेंट हिस्से की प्रॉपर्टी का ही बीमा हो रखा था।

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