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जेनजी आंदोलन :राजनीतिक अस्थिरता के कारण नेपाल में विदेशी निवेश निराशाजनक स्थिति में

 

काठमांडू।

जलते भटभटेनी,
विराटनगर का

राजनीतिक अस्थिरता और स्थिर आर्थिक नीतियों के अभाव के कारण नेपाल में विदेशी निवेश निराशाजनक स्थिति में है। नेपाल में हर साल प्रतिबद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का एक-तिहाई भी प्राप्त नहीं हो पाया है। विभिन्न देशों द्वारा हर साल सरकार से निवेश की मंज़ूरी लेने के बावजूद, दो-तिहाई से ज़्यादा राशि प्राप्त नहीं हो पाई है।
नेपाल राष्ट्र बैंक के आर्थिक अनुसंधान विभाग द्वारा नेपाल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर किए गए एक सर्वेक्षण से पता चला है कि प्रतिबद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का केवल लगभग 31.9 प्रतिशत ही वास्तव में प्राप्त हो पाया है।

नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा किए गए विभिन्न सर्वेक्षणों से पता चला है कि निवेश के लिए उपयुक्त माहौल की कमी और नीतिगत जटिलताओं के कारण एफडीआई प्रवाह में कमी आई है।

ऐसे में, भाद्रपद 23 और 24 को जेनजी आंदोलन के दौरान बड़ी होटलों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में हुई लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी ने नेपाल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए जोखिम बढ़ा दिया है। काठमांडू में प्रदर्शनकारियों द्वारा पाँच सितारा हयात रीजेंसी होटल, हिल्टन और एनसेल जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में तोड़फोड़ और आगजनी के बाद, नेपाल की अर्थव्यवस्था पर एक बार फिर काले बादल छा गए हैं। आंदोलन के नाम पर निजी संपत्ति पर हमले से देश के अंदर और बाहर निवेशकों में भय व्याप्त हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि नेपाल में निवेश असुरक्षित है, यह संदेश दुनिया भर में गया है कि पाँच सितारा होटल भी सुरक्षित नहीं हैं।

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नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के निवर्तमान अध्यक्ष राजेंद्र मल्ल के अनुसार, अन्य तत्वों द्वारा जेनजी आंदोलन में घुसपैठ करना और विदेशी निवेश वाली कंपनियों में आग लगाना गलत है। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में नेपाल में विदेशी निवेश आकर्षित करना मुश्किल हो जाएगा और सरकार को इस मुद्दे पर संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह दुनिया भर के दूतावासों और राजनयिक माध्यमों से तुरंत यह संदेश दे कि नेपाल सुरक्षित है।

नेपाल राष्ट्र बैंक के पूर्व कार्यकारी निदेशक नर बहादुर थापा ने कहा कि हिल्टन जैसे बुनियादी ढाँचे में तोड़फोड़ से विदेशी निवेशक और निराश होंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर सरकार प्रबंधकीय और प्रशासनिक सुधार कर सके, तो इससे ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया है कि मौजूदा सरकार शासन में सुधार और भ्रष्टाचार कम करके निजी क्षेत्र के काम करने के लिए अनुकूल माहौल बनाए।

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नेपाली वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ की पूर्व अध्यक्ष भवानी राणा ने भी कहा कि जेनजी आंदोलन के कारण निजी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को हुए नुकसान का सीधा असर विदेशी निवेश पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब घरेलू निवेश सुरक्षित नहीं है, तो विदेशी निवेश पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

जेनजी आंदोलन का असर पर्यटन क्षेत्र पर भी दिखने लगा है। कारोबारियों के मुताबिक, नेपाल आने की तैयारी कर रहे पर्यटकों ने बड़ी संख्या में होटलों की बुकिंग रद्द करवानी शुरू कर दी है। खास तौर पर, चितवन के सौराहा, पोखरा और काठमांडू के होटलों में बुकिंग रद्द होने की संख्या बढ़ गई है।

बताया जा रहा है कि होटल हिल्टन में आगजनी की घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में एक नकारात्मक संदेश गया है और इस वजह से ज़्यादातर बुकिंग रद्द हो गई हैं। अमेरिका और कनाडा के बाद, भारत ने भी नेपाल को जोखिम भरे देशों की सूची में डालना शुरू कर दिया है। भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों को एक सार्वजनिक सूचना जारी कर सूचित किया है कि नेपाल की वर्तमान स्थिति जोखिम भरी है।

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अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण में निजी क्षेत्र की प्रतिबद्धता
इस बीच, वित्त मंत्री रामेश्वर खनल के साथ चर्चा के दौरान, निजी क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण, नवीनीकरण और पुनरुद्धार में सरकार के साथ सहयोग करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। नेपाली वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ के अध्यक्ष चंद्र ढकाल ने कहा कि वे आंदोलन से हुए नुकसान का आकलन करेंगे और पुनर्निर्माण शुरू करेंगे और सरकार का भी सहयोग करेंगे।

उन्होंने अर्थव्यवस्था को बहाल करने और सुशासन बनाए रखने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के बीच एक सतत संवाद तंत्र बनाने का भी सुझाव दिया।

निजी क्षेत्र ने मांग की है कि सरकार विरोध प्रदर्शनों से प्रभावित व्यवसायों को ऋण पुनर्गठन और पुनर्निर्धारण की सुविधाएँ प्रदान करे, निवेश आकर्षित करने के लिए आयकर में छूट प्रदान करे, राजस्व जमा करने की समय सीमा बढ़ाए और जुर्माना माफ करे।

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