काठमांडू में महामना मालवीय मिशन द्वारा `भारत रत्न` मदन मोहन मालवीय की 164 वीं जयंती आयोजित
हिमालिनी डेस्क, काठमांडू, 26 दिसंबर, 2025 । पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर, 1861 को प्रयागराज में हुआ था । उन्होंने एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई । बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से, महान व्यक्ति मालवीय ने अपना अधिकांश समय यहीं बिताया । उन्होंने अपने समय की कठिनाइयों के बीच विश्व स्तरीय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना करके पूरी दुनिया के सामने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया । उन्हें वर्ष 2014 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया था । प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली तत्कालीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार ने 24 दिसंबर, 2014 को पंडित मदन मोहन मालवीय को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने का ऐलान किया था ।

महामना मालवीय मिशन नेपाल ने नेपाल में प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती के अवसर पर सभाओं और संगोष्ठियों का आयोजन करता आ रहा है, और इस वर्ष भी 25 दिसंबर को `भारत रत्न` महामाना पंडित मदन मोहन मालवीय की 164 वीं जयंती के अवसर पर एक संवाद का आयोजन किया । यह कार्यक्रम भारतीय दूतावास के सहयोग से आयोजित किया गया था । कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथियों द्वारा पंडित मदन मोहन मालवीय के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया ।

इस कार्यक्रम में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सम्मानित पूर्व छात्र एक साथ आए और अपने साझा अनुभवों का जश्न मनाया, साथ ही महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की विरासत को भी उजागर किया, जिन्होंने 1916 में एशिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक की स्थापना की थी ।
इस अवसर पर बीएचयू के तीन पूर्व छात्रों, इंदिरा गिरी, डॉ. कोकिला वैद्य और विजय थापा को सम्मानित किया गया । इंदिरा गिरि को शिक्षा क्षेत्र में उनके लंबे समय से चले आ रहे सक्रिय योगदान के साथ-साथ नेपाल में बहुदलीय लोकतंत्र की बहाली के लिए चलाए गए द्वितीय जन आंदोलन में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया । डॉ. कोकिला वैद्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रतिष्ठित पदों पर रहते हुए स्वास्थ्य सेवा में उनके अद्वितीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया । इसी प्रकार, विजय थापा को भाषा, साहित्य और कला के क्षेत्रों में उनके योगदान के सम्मान में सम्मानित किया गया ।
प्रधानमंत्री सुशीला कार्की का प्रतिनिधित्व करती हुई महिला, बाल एवं वरिष्ठ नागरिक मामलों की मंत्री श्रद्धा श्रेष्ठ ने कहा कि मालवीय की शिक्षाएँ, जिनमें शिक्षा, करुणा और उत्तरदायित्व शामिल हैं, उनकी मुख्य विरासत हैं । उन्होंने कहा कि कई नेपाली छात्रों ने बीएचयू से शिक्षा प्राप्त की है, जो नेपाल और भारत के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती है ।
पूर्व वित्त मंत्री डॉ. महेश आचार्य, जिन्होंने 50 साल पहले बीएचयू में पढ़ाई की थी, ने कहा कि पंडित मालवीय एक बहुआयामी व्यक्तित्व थे, जिन्होंने न केवल स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, बल्कि शैक्षिक, सामाजिक और राष्ट्रीय सुधारों में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया ।
भारतीय दूतावास में काउंसलर (राजनीतिक) गीतांजलि ब्रैंडन ने कहा कि पंडित मालवीय एक बहुआयामी व्यक्तित्व थे, जिनकी विरासत ने भारतीय इतिहास और समाज पर गहरी छाप छोड़ी है । उन्होंने कहा कि पंडित मालवीय एक महान सामाजिक और राष्ट्रीय सुधारक थे और उन्होंने भारत में शिक्षा क्षेत्र में सुधार लाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था । उन्होंने कहा कि नेपाल के छह प्रधानमंत्रियों ने बीएचयू के पूर्व छात्र रहे हैं और यह भारत और नेपाल के बीच गहरे संबंधों को दर्शाता है ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महामना मालवीय मिशन के अध्यक्ष योगाचार्य जीएन सरस्वती ने की । अवसर पर उन्होंने कहा कि पंडित मालवीय एक बहुआयामी व्यक्तित्व थे, जिनकी विरासत पर उन्होंने गहरा प्रभाव डाला । महामाना मालवीय मिशन के महासचिव प्रो. डॉ. कुल प्रसाद कोइराला ने स्वागत भाषण दिया और पूर्व राजदूत विष्णुहरि नेपाल ने पंडित मालवीय की शिक्षाओं और विरासत पर प्रकाश डाला । कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमेश पोखरेल ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मिशन के उपाध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता, मिथिलेश कुमार सिंह ने किया ।
इस अवसर पर बीएचयू की पूर्व छात्रा सुरम्या पोखरेल ने कथा नृत्य में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जबकि सुजाता बराल ने कथक नृत्य में कृष्ण भजन प्रस्तुत किया । इसी तरह डॉ. शांतिस्वरूप भटनागर द्वारा रचित बीएचयू कुलगीत को डॉ. रमेश पोखरेल, हरिदत्त फुलारा और कृष्णराम खत्री ने गाया । कुलगीत की प्रस्तुति में तीर्थराज पोखरेल ने हारमोनियम, दुर्गा प्रसाद खातीवड़ा ने बांसुरी और नागेंद्र न्योपाने ने तबला बजाया था । उपस्थित अतिथियों ने इन प्रस्तुतियों की सराहना की ।
सांस्कृतिक संस्थान (राष्ट्रीय नृत्य हॉल) में आयोजित समारोह में भारतीय दूतावास के प्रेस, सूचना और संस्कृति प्रभाग के प्रथम सचिव और स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक वशिष्ठ नंदन विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे । इसी प्रकार, समारोह में पूर्व मंत्रियों, पूर्व कुलपतियों, प्रोफेसरों, नेपाल-बीएचयू के पूर्व छात्रों, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कलाकारों सहित 500 से अधिक लोगों ने भाग लिया ।

















