Sat. Aug 8th, 2020

साहित्य समाज को जोड़ता है और कला दिलों को : बाबा योगेन्द्र

n-1काठमांडू ,८ अगस्त | इक नाम इक शोहरत , काफी नहीं इंसा के लिए | जिन्दगी मिली है तो ऐसे जियो , तेरे बाद भी तेरा नाम और पहचान रहे ।

हिमालिनी के मंच द्वारा संस्कार भारती के संस्थापक साहित्य, कला, संस्कृति के लिए समर्पित व्यक्तित्व श्रद्धेय योगेन्द्र बाबा जी के सम्मान में दिनांक ७ अगस्त २०१५ को अभिनन्दन समारोह आयोजित किया गया । यह कार्यक्रम कमलादी के सी.डबल्यू पार्टी पैलेस में सम्पन्न हुआ । कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथियों की सहभागिता रही । माननीय प्रेम लश्करी, दयाराम अग्रवाल, खुशीलाल मंडल, पूर्व मंत्री अनिल झा, डिम्पल झा, देवेश झा, डा. रामदयाल राकेश, पुष्पा ठाकुर, चंदा चौधरी, मिथिलेश झा, सीमा सिंह आदि कई जाने माने व्यक्तियों की उपस्थिति में बाबा योगेन्द्र जी को हिमालिनी के प्रबन्ध निदेशक श्री सच्चिदानन्द मिश्र जी ने शॉल, रुद्राक्ष माला और हिमालिनी के प्रधान संपादक श्री रमेश झा, संपादक श्वेता दीप्ति और महाप्रबन्धक कविता दास ने पुष्प गुच्छा प्रदान कर सम्मानित किया । प्रबन्ध निदेशक महोदय ने बाबा जी को सम्बोधन करते हुए कहा कि हिमालिनी के लिए आज सौभाग्य की बात है कि वो अपने मंच से उन्हें सम्मानित करने जा रही है जो मानवता, नैतिकता और सम्पूर्णता के परिचायक हैं । हमारी परम्परा रही है कि जो हमारे पथप्रदर्शक होते हैं, हमारे आदर्श होते हैं उनके प्रति हम श्रद्धानत होते हैं । आज हिमालिनी इस पूण्य कार्य को करके इसी परम्परा को आगे बढ़ा रही है । यों तो कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनके लिए हमारे भाव, हमारे शब्द n-2कम पड़ जाते है. फिर भी हम अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की कोशिश तो जरुर करते हैं ।

यह भी पढें   दुनियाभर में करोना संक्रमितों की संख्या एक करोड़ 92 लाख से अधिक

योगेन्द्र बाबा अपने आप में एक सम्पूर्ण परिचय हैं । भारत के विखण्डन का आपने दर्द झेला और यही वजह रही कि आप पूरी तरह राष्ट्र को समर्पित हो गए । संघ से आप आबद्ध हैं । संस्कार भारती संस्था के आप संस्थापक हैं और इसके साथ ही साहित्य, कला, संगीत, संस्कृति और परम्परा के संवाहक भी । आज हमारा समाज जिस तरह भटकाव की राह पर है, पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव हमारी संस्कृति पर हावी हो रहा है ऐसे में n-3आवश्यकता महसूस होती है कि कुछ ऐसा हो, कोई ऐसा हो जो हमारी संतति को भटकाव से रोक सके । संस्कार भारती एक ऐसी संस्था है जो पौर्वात्य संस्कृति के साथ सुसंस्कृत करती है आने वाली पीढी को । सम्पूर्ण भारत से इस संस्था की कड़ियाँ जुड़ी हुई हैं । नेपाल में आए विनाशकारी भूकम्प ने सिर्फ हमें दर्द नहीं दिया । इस दर्द को मित्र राष्ट्र ने भी महसूस किया और संस्कार भारती ने भारतीय कला जगत को एक मंच पर लाकर भूकम्प पीड़ितों के लिए सहयोग राशि इकट्ठी की । स्वयं बाबा ने इसकी प्रेरणा दी । चित्रकला से आपका लगाव है और एक कोमल मन ही कला का परिचायक होता है । एक कोमल मन, शुद्ध विचार और मानवता जिनके अन्दर कूट कूट कर भरी है बस वही हैं योगेन्द्र बाबा ।

बाबा योगेन्द्र ने अपने मंतव्य में कहा कि साहित्य ही समाज को जोड़ता है और कला ही दिलों को । कोई भी प्रांत और कोई भी समुदाय इससे वंचित s-3नहीं रह सकता । हम सुख में और दुख में साथ होते हैं । उन्होंने n-4विनाशकारी भूकम्प की चर्चा करते हुए कहा कि यह सच है कि हमने गँवाया है, खोया है किन्तु यह बाबा पशुपति नाथ और गौतम बुद्ध की धरती है, नेपाल फिर सम्भलेगा और दुगुनी रफ्तार से आगे बढ़ेगा । बस साहस और सम्बल की अपेक्षा है । उन्होंने कहा कि कोई तो वजह होगी और खासियत होगी यहाँ की मिट्टी में जो नाथों के नाथ पशुपति नाथ और अहिंसा और शांति के दूत बुद्ध ने इस धरती को अपने अवतार के लिए चुना ? मुझे पूरा विश्वास है कि यह धरती फिर संवरेगी और आगे बढ़ेगी ।

यह भी पढें   सुनसरी प्रहरी कार्यालय का एक जवान कोरोना संक्रमित

समारोह को पूर्व मंत्री अनिल झा, हिमालयन टी.वी.के दयाराम अग्रवाल ने भी सम्बोधित किया । बाबा के आग्रह पर सीमा सिंह जी और गंगाराम अकेला ने अपनी कविताओं का वाचन भी किया । एक सुखद अनुभूति के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई । इस सम्मान कार्यक्रम का सफल संचालन करते हए हिमालिनी की सम्पादक डा.श्वेता दीप्ति ने अपनी कविता सुनाकर श्रोताओं को मुग्ध किया | डा. दीप्ति ने बाबा योगेन्द्र के व्यक्तित्व और उनके जिवनी पर भी प्रकाश डाला | धन्यबाद ज्ञापन के क्रम में हिमालिनी की महाप्रबन्धक कविता दास ने कहा की अज की उपस्थिति हमारा हौसला बढ़ती है और हम इस तरह n-5के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजना करेंगें |( ही.स.)

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: