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प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व और नेपाल के राजनीतिक रूपांतरण पर अंतरराष्ट्रीय बहस

 

काठमांडू, 29 अप्रैल 2026। नेपाल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड एंगेजमेंट (एन.आई.आई.सी.ई) ने 29 अप्रैल 2026 को नेपाल के प्रधानमंत्री के नेतृत्व तथा देश में हो रहे व्यापक राजनीतिक रूपांतरण पर चर्चा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया। इस कार्यक्रम में भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, जापान, भूटान और नेपाल सहित 25 देशों के 26 कूटनीतिज्ञों, नीति-निर्माताओं, विद्वानों और विशेषज्ञों ने भाग लिया और नेपाल की विकसित होती शासन व्यवस्था पर अपने-अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का संचालन एन.आई.आई.सी.ई के कार्यक्रम संयोजक एवं अनुसंधान सहायक विवेक धोज थापा ने किया। उन्होंने कहा कि काठमांडू में अक्सर सरकार की विदेश नीति और कूटनीतिक दृष्टिकोण को लेकर बहस होती है, लेकिन यह कम चर्चा होती है कि अन्य देश नेपाल की वर्तमान सरकार को किस दृष्टि से देख रहे हैं। इसी उद्देश्य से एन.आई.आई.सी.ई ने विभिन्न देशों के कूटनीतिज्ञों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व को लेकर वैश्विक दृष्टिकोण समझने का प्रयास किया।

बांग्लादेश के डॉ. साहाब इनाम खान ने कहा कि वर्तमान नेतृत्व ने पारंपरिक राजनीतिक संरचना से अलग रास्ता अपनाते हुए युवाओं की आकांक्षाओं को चुनावी सफलता और शासन संचालन में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संस्थागत मजबूती, संरचित राजनीतिक भागीदारी और स्पष्ट वैचारिक ढांचे की कमी दीर्घकालीन स्थिरता के लिए चुनौती बन सकती है।

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संयुक्त राज्य अमेरिका के डॉ. रोब योर्क ने नेपाल में बढ़ते जनअसंतोष के बावजूद राजनीतिक स्थिरता को अभी भी प्रमुख प्राथमिकता बताया। उन्होंने नेपाल की युवा जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए युवामुखी नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया और चेतावनी दी कि सुधारों को संतुलित ढंग से आगे बढ़ाना आवश्यक है, अन्यथा राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल द्वारा चीन और भारत के बीच अपनाई जा रही रणनीतिक संतुलन की नीति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान से देखा जा रहा है।

चीन के डॉ. चांग चियाडोंग ने नेपाल के नेतृत्व को व्यावहारिक, भ्रष्टाचार विरोधी और जनकेंद्रित बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शासन शैली ने विशेष रूप से युवाओं के साथ गहरा संबंध स्थापित किया है और प्रशासन को अधिक जवाबदेह और प्रत्यक्ष बनाने की दिशा में संकेत दिया है।

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भारत के पूर्व राजदूत श्री मन्जीव पूरी ने कहा कि नेपाल के राजनीतिक रूपांतरण में वैश्वीकरण, प्रवासन, सोशल मीडिया और समाज की बढ़ती आकांक्षाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने भारत–नेपाल संबंधों को साझा सभ्यता, भूगोल और लोगों के बीच गहरे संबंधों पर आधारित बताते हुए कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को अल्पकालिक राजनीतिक बहसों से ऊपर उठाकर आर्थिक सहयोग, संपर्क विस्तार और पारस्परिक लाभ पर केंद्रित करना चाहिए।

भारत के पूर्व उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि नेपाल में चल रहा परिवर्तन कोई एकबारगी घटना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के नेतृत्व द्वारा संचालित निरंतर राजनीतिक विकास की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि उच्च जन अपेक्षाओं के बीच संस्थागत क्षमता ही वास्तविक परीक्षा होगी, और यही स्थिति भारत–नेपाल सहयोग को नए ढंग से मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करती है।

यूरोपीय संघ की जोएल हिवोनेट ने नेपाल के हालिया विकास को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक परिवर्तन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बहिष्करणात्मक राजनीति के प्रति जनता में बढ़ते असंतोष से यह परिवर्तन उत्पन्न हुआ है। उन्होंने सोशल मीडिया की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विप्रेषण पर निर्भर अर्थव्यवस्था दीर्घकालीन स्थिरता के लिए चुनौती पैदा कर सकती है।

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पाकिस्तान की डॉ. आम्ना खान ने नेपाल को एक शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और कूटनीतिक रूप से संतुलित देश के रूप में देखा जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की क्षमता के कारण नेपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त है। उन्होंने शिक्षा साझेदारी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, कूटनीतिक संवाद और प्रत्यक्ष यातायात संपर्क बढ़ाकर द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने का सुझाव भी दिया।

वेबिनार में शामिल सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि नेपाल में हो रहा राजनीतिक रूपांतरण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रुचि का विषय बन गया है और इसे आशावादी दृष्टि से देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस परिवर्तन की दीर्घकालीन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार जन अपेक्षाओं को ठोस उपलब्धियों में कितनी प्रभावी ढंग से बदल पाती है, संस्थागत ढांचे को कितना मजबूत करती है और आर्थिक तथा राजनीतिक स्थिरता को किस तरह बनाए रखती है।

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