पोखरा विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारियों द्वारा अध्ययन अवकाश का दुरुपयोग
पोखरा विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारियों द्वारा अध्ययन अवकाश (स्टडी लीव) के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। वर्ष २०७४ से विश्वविद्यालय के ५१ शिक्षक–कर्मचारी अध्ययन के लिए देश और विदेश गए थे, लेकिन कई लोगों ने समझौते के अनुसार सेवा नहीं दी।
महालेखा परीक्षक की ६३वीं वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, ५१ कर्मचारियों में से ३ ने कबूलनामे के अनुसार काम नहीं किया। कुछ ने आंशिक रूप से ही सेवा दी, जबकि कुछ बिना विश्वविद्यालय की अनुमति लिए दूसरी शैक्षिक डिग्री करने चले गए।
इस कारण पोखरा विश्वविद्यालय को १ करोड़ १२ लाख २६ हजार रुपये का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में इस राशि को १० प्रतिशत ब्याज सहित वसूलने की सिफारिश की गई है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, अध्ययन अवकाश लेकर पूर्णकालिक काम करने वाले कुछ प्राध्यापकों ने राशि वापस भी की है। कार्यवाहक उपकुलपति विष्णुराज तिवारी ने बताया कि एक–दो लोगों ने पैसा लौटाया है।
विश्वविद्यालय शिक्षक–कर्मचारी नियमावली २०५५ के नियम २७ के अनुसार, अध्ययन अवकाश के बाद सेवा में वापस न आने या निर्धारित अवधि तक काम न करने पर संबंधित कर्मचारी से वेतन, भत्ता और अन्य सुविधाओं की राशि वार्षिक १० प्रतिशत ब्याज सहित दोगुनी करके वसूली की जा सकती है।
पूर्व उपकुलपति केशरजंग बराल का कहना है कि अध्ययन अवकाश को योजनाबद्ध ढंग से प्रबंधित न करने के कारण समस्या बढ़ी। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में भी एक प्राध्यापक बिना जानकारी दिए अध्ययन अवकाश पर चला गया था, जिसे वापस बुलाया गया था।
विश्वविद्यालय में २०७४ के बाद अध्ययन अवकाश लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी। कई शिक्षक विदेश जाकर वहीं बस गए और वापस नहीं लौटे। इससे विश्वविद्यालय को आर्थिक और शैक्षिक दोनों तरह का नुकसान हो रहा है।
इससे पहले त्रिभुवन विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों और निजामती कर्मचारियों के भी अध्ययन अवकाश लेकर वापस न लौटने के मामले सामने आए थे। त्रिभुवन विश्वविद्यालय ने जांच समिति बनाकर राशि वसूली शुरू की है।
विश्वविद्यालय के ३९८ प्राध्यापकों पर अध्ययन अवकाश के दुरुपयोग का आरोप लगा था, जिनमें से ४४ प्राध्यापकों ने ११ करोड़ रुपये वापस किए हैं। जांच समिति के संयोजक जीवन काफ्ले के अनुसार, ६१ प्राध्यापकों ने राशि लौटाने के लिए आवेदन दिया है।
इधर, अध्ययन अवकाश पर गए सरकारी कर्मचारियों की भी सरकार तलाश कर रही है। २१ जेठ को भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय ने अवकाश पर गए कर्मचारियों को तीन दिन के भीतर संपर्क में आने का निर्देश दिया।
निजामती किताबखाना के अनुसार, कुल ७,०५९ सरकारी कर्मचारियों ने विभिन्न प्रकार की छुट्टियाँ ली हैं, लेकिन कितने कर्मचारी वापस लौटे और कितने नहीं, इसका स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।
निजामती किताबखाना के महानिर्देशक श्रवणकुमार पोखरेल ने बताया कि संबंधित मंत्रालयों के माध्यम से कर्मचारियों की खोज की जा रही है।

