मुझे फंसाने की ताकत राजा ज्ञानेंद्र में नहीं थी, तो बाकी क्या कर लेंगे?”: शेर बहादुर देउवा की विरोधियों को सीधी चुनौती
काठमांडू | 13 अगस्त 2026 । नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के सभापति शेर बहादुर देउवा ने अपने खिलाफ चल रही साजिशों और राजनीतिक घेराबंदी पर बेहद कड़ा पलटवार किया है। अपने विरोधियों और आलोचकों को खुली चुनौती देते हुए देउवा ने सीधे शब्दों में सवाल किया है— **”मुझे मुश्किल में डालने में तो राजा ज्ञानेंद्र तक सफल नहीं हो सके, तो क्या आज के ये लोग कर पाएंगे?”**
हाल के दिनों में विभिन्न मामलों (विशेषकर भ्रष्टाचार और घोटालों की जांच) में अपना नाम उछाले जाने और छवि धूमिल करने की कोशिशों से नाराज देउवा ने गुरुवार को बेहद तल्ख तेवर अपनाए। उनका यह आक्रामक बयान उन राजनीतिक ताकतों के लिए एक सीधा अल्टीमेटम है, जो उन्हें कमजोर आंकने या किनारे लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
“समय देगा करारा जवाब”
नेपाली कांग्रेस के कद्दावर नेता ने न्यायपालिका और आम नागरिकों की समझ पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा, “इस देश की अदालत और यहाँ की जनता सब कुछ बहुत अच्छे से समझती है। जो लोग आज मेरे खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं, उन्हें मेरा जवाब नहीं, बल्कि समय ही करारा उत्तर देगा।” देउवा ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी तरह के दबाव, आरोप या राजनीतिक ब्लैकमेलिंग के आगे झुकने वाले नेता नहीं हैं।
**शाही शासन काल का जिक्र कर दिया कड़ा संदेश**
देउवा ने अपने इस बयान के जरिए नेपाल के उस राजनीतिक इतिहास की याद दिला दी है, जब तत्कालीन नरेश ज्ञानेंद्र शाह ने सत्ता पूरी तरह अपने हाथों में ले ली थी। उस शाही शासन के दौरान देउवा को न केवल सत्ता से हटाया गया था, बल्कि कई तरह की कानूनी और राजनीतिक प्रताड़नाओं से भी गुजरना पड़ा था। देउवा का इशारा साफ है कि जब राजशाही की वह निरंकुश और असीमित ताकत भी उन्हें राजनीति से खत्म नहीं कर पाई, तो आज के दौर में उनके विरोधी उनका बाल भी बांका नहीं कर सकते।
**सियासी गलियारों में हड़कंप**
हाल के दिनों में नेपाल में भ्रष्टाचार की पुरानी फाइलों को लेकर सियासी पारा गर्म है। ऐसे में देउवा का यह ‘दबंग’ बयान एक डिफेंस मैकेनिज्म से ज्यादा एक ‘चेतावनी’ माना जा रहा है। खुद को गणतंत्र और लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ के रूप में पेश करते हुए उन्होंने अपनी राजनीतिक हैसियत का लोहा मनवाने की कोशिश की है।
इस बयान ने नेपाल की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि देउवा के इस ‘ज्ञानेंद्र वाले तंज’ पर सत्ता पक्ष और उनके विरोधी खेमे की तरफ से क्या पलटवार आता है।


