रसुवा बाढ़ : लोडशेडिंग का खतरा कितना ? 431 मेगावाट बिजली व्यवस्था से बाहर
रसुवा और नुवाकोट में आई भीषण बाढ़ ने नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। नुवाकोट जिले की कई परियोजनाओं में बिजली उत्पादन और प्रसारण पूरी तरह बाधित हो गया है, जबकि रसुवा की कुछ परियोजनाओं की सुरंगों में दर्जनों कर्मचारी और मजदूर फँसे हुए हैं। राहत दल लगातार उन्हें निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
नुवाकोट में 7 जलविद्युत परियोजनाएँ प्रभावित
नुवाकोट जिले में बाढ़ से कुल 7 जलविद्युत परियोजनाएँ प्रभावित हुई हैं। इनमें 5 संचालित परियोजनाएँ (123 मेगावाट) और 2 निर्माणाधीन परियोजनाएँ (52.6 मेगावाट) शामिल हैं।
प्रभावित संचालित परियोजनाएँ
- ऊपरी त्रिशूली–3ए – 60 मेगावाट
- सौर ऊर्जा परियोजना – 25 मेगावाट
- त्रिशूली जलविद्युत परियोजना – 24 मेगावाट
- देवीघाट जलविद्युत परियोजना – 14.1 मेगावाट
प्रभावित निर्माणाधीन परियोजनाएँ
- ऊपरी त्रिशूली–3बी – 37 मेगावाट
- मिडिल त्रिशूली गंगा – 15.6 मेगावाट
बाढ़ से इन परियोजनाओं की भौतिक संरचनाओं को भारी नुकसान पहुँचा है, जिससे बिजली उत्पादन और प्रसारण दोनों प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार क्षति का पूरा आकलन अभी जारी है और परियोजनाओं को दोबारा चालू होने में कुछ समय लग सकता है।
बिजली आपूर्ति बहाल करने की तैयारी
नेपाल विद्युत प्राधिकरण ने कहा है कि क्षतिग्रस्त विद्युत संरचनाओं की मरम्मत और पुनर्स्थापना के लिए आवश्यक तकनीकी जनशक्ति और संसाधनों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है।
प्राधिकरण के अनुसार—
- प्रभावित क्षेत्रों में बिजली सेवा जल्द से जल्द बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।
- वैकल्पिक विद्युत आपूर्ति व्यवस्था भी अपनाई गई है।
- उपलब्ध सभी संसाधनों को बिजली आपूर्ति सामान्य करने में लगाया गया है।
ऊर्जा, जलस्रोत एवं सिंचाई मंत्रालय ने भी प्रभावित इलाकों में तत्काल बिजली पहुँचाने के लिए सौर ऊर्जा आधारित अस्थायी व्यवस्था शुरू करने की जानकारी दी है।
जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फँसे कर्मचारी
बाढ़ के कारण रसुवा जिले की जलविद्युत परियोजनाओं में काम कर रहे कई कर्मचारी और मजदूर सुरंगों (टनलों) के भीतर फँस गए हैं।
चिलिमे जलविद्युत परियोजना में 6 कर्मचारी फँसे
चिलिमे जलविद्युत कंपनी लिमिटेड के अनुसार, भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ के कारण कंपनी की सुरंग में 6 कर्मचारी फँस गए हैं।
उन्हें निकालने के लिए नेपाली सेना और अन्य बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तेज बहाव और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अभी तक राहतकर्मी सुरंग तक नहीं पहुँच पाए हैं।
लाङटाङ परियोजना में 60 कर्मचारी संपर्क से बाहर
बाढ़ से 20 मेगावाट क्षमता वाली लाङटाङ जलविद्युत परियोजना को भी भारी नुकसान पहुँचा है।
कंपनी के अनुसार—
- परियोजना की सुरंग में 35 मजदूर फँसे हुए हैं।
- इंजीनियरों सहित 25 अन्य कर्मचारी अब तक संपर्क से बाहर हैं।
कंपनी के प्रबंध निदेशक तथा स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादकों की संस्था (इप्पान) के सचिव विजयमोहन भट्टराई ने बताया कि परियोजना में कार्यरत करीब 60 कर्मचारी और मजदूर फिलहाल लापता या संपर्कविहीन हैं।
उन्होंने बताया कि परियोजना का निर्माण अंतिम चरण में था और सुरंग में कंक्रीट का काम पूरा होने में केवल दो दिन बाकी थे। इसी दौरान तिब्बत की ओर से आई भीषण बाढ़ ने नदी का जलस्तर इतना बढ़ा दिया कि नदी के स्तर से लगभग 100 मीटर ऊपर तक तबाही मच गई और सुरंग में काम कर रहे मजदूर भीतर ही फँस गए।
पावरहाउस पूरी तरह तबाह
भट्टराई के अनुसार, सुरंग में फँसे मजदूरों के अलावा इंजीनियर, ओवरसियर, रसोइया और वाहन चालक सहित अन्य कर्मचारी भी संपर्क में नहीं हैं। हालांकि, परियोजना के हेडवर्क्स पर काम कर रहे कुछ कर्मचारी सुरक्षित बताए गए हैं।
बाढ़ ने लाङटाङ जलविद्युत परियोजना के पावरहाउस को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन खराब मौसम और कठिन भू-भाग के कारण अभियान में भारी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।


