रसुवा और नुवाकोट की जलविद्युत परियोजनाओं में 898 लोग अब भी लापता, 361 का बचाव
13 भाद्र, काठमांडू।
भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने रसुवा और नुवाकोट जिले की जलविद्युत परियोजनाओं में बड़ा मानवीय संकट पैदा कर दिया है।
बाढ़ के कारण विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में फँसे और कार्यरत लोगों में से 898 लोग अब भी संपर्क से बाहर (लापता) हैं। वहीं, राहत एवं बचाव दल अब तक 361 लोगों को सुरक्षित निकालने में सफल रहा है।
स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादकों की संस्था, नेपाल (इप्पान) के अनुसार भोटेकोशी बाढ़ से रसुवा और नुवाकोट की 11 जलविद्युत परियोजनाएँ प्रभावित हुई हैं। इन परियोजनाओं में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों और श्रमिकों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है।
अपर त्रिशूली–1 परियोजना में सबसे बड़ा संकट
216 मेगावाट क्षमता वाली अपर त्रिशूली–1 जलविद्युत परियोजना से अब तक 254 कर्मचारियों और श्रमिकों का सफलतापूर्वक बचाव किया गया है।
हालाँकि, इस परियोजना की सुरंग के भीतर अभी भी करीब 300 लोगों के फँसे होने का अनुमान है। ऊर्जा, जलस्रोत एवं सिंचाई मंत्रालय के अनुसार इन लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए चीन से विशेषज्ञ बचाव दल भी नेपाल पहुँच चुका है।
इसके अलावा—
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20 मेगावाट लाङटाङ खोला जलविद्युत परियोजना से 18 लोगों को जीवित निकाला गया।
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37 मेगावाट अपर त्रिशूली–3बी परियोजना से 91 लोगों का सफल बचाव किया गया।
इन सभी परियोजनाओं को मिलाकर अब तक कुल 361 लोगों का उद्धार किया जा चुका है।
रसुवा की सात परियोजनाएँ प्रभावित
इप्पान के अनुसार रसुवा जिले में बाढ़ से सात प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ प्रभावित हुई हैं—
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216 मेगावाट अपर त्रिशूली–1
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111 मेगावाट रसुवागढ़ी
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120 मेगावाट रसुवा–भोटेकोशी
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6.42 मेगावाट अपर मैलुङ–ए
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20 मेगावाट लाङटाङ खोला
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22 मेगावाट चिलिमे
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5 मेगावाट मैलुङ खोला जलविद्युत परियोजना
बाढ़ का सीधा असर इन परियोजनाओं पर पड़ा है, जिससे वहाँ कार्यरत कर्मचारियों और श्रमिकों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। संपर्क स्थापित न हो पाने के कारण खोज और बचाव अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
नुवाकोट की छह परियोजनाएँ भी प्रभावित
नुवाकोट जिले में भी कई जलविद्युत और ऊर्जा परियोजनाएँ बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। इनमें शामिल हैं—
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24 मेगावाट त्रिशूली जलविद्युत परियोजना
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14.1 मेगावाट देवीघाट जलविद्युत परियोजना
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60 मेगावाट अपर त्रिशूली–3ए
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37 मेगावाट अपर त्रिशूली–3बी
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15.6 मेगावाट मिडिल त्रिशूली गंगा
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25 मेगावाट नुवाकोट सौर्य (सोलर) विद्युत परियोजना
सुरंग में फँसे लोगों का बचाव सबसे बड़ी चुनौती
बाढ़ के बाद परियोजनाओं की सुरंगों और संरचनाओं में फँसे लोगों का सुरक्षित उद्धार सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। विशेष रूप से अपर त्रिशूली–1 की सुरंग में लगभग 300 लोगों के फँसे होने की आशंका बचाव अभियान की जटिलता को दर्शाती है।
उन्हें बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त तकनीकी विशेषज्ञों, भारी उपकरणों और विशेष बचाव दलों की आवश्यकता पड़ रही है। चीन से विशेषज्ञ टीम के नेपाल पहुँचने के बाद बचाव कार्य में और तेजी आने की उम्मीद की जा रही है।
मानवीय संकट गहराया
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान लगातार जारी है, इसलिए लापता लोगों की स्थिति से जुड़ी नई जानकारी आने की संभावना है। अभी तक उपलब्ध आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार—
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स्थिति |
संख्या |
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सुरक्षित बचाए गए लोग |
361 |
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अब भी संपर्कविहीन / लापता |
898 |
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प्रभावित जलविद्युत परियोजनाएँ |
11 |
यह स्पष्ट है कि भोटेकोशी की बाढ़ केवल जलविद्युत परियोजनाओं की भौतिक क्षति तक सीमित नहीं रही, बल्कि वहाँ कार्यरत सैकड़ों श्रमिकों और कर्मचारियों के जीवन से जुड़ा एक गंभीर मानवीय संकट बन गई है।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता सभी संपर्कविहीन लोगों का पता लगाना और उन्हें यथासंभव सुरक्षित बाहर निकालना है।

