भोटेकोशी बाढ़ : 22 भदौ को राष्ट्रीय शोक, 23 को ‘जेन–जी शहीद दिवस’ पर सार्वजनिक अवकाश
काठमांडू, 3 सितंबर। रसुवा के भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वालों के सम्मान में नेपाल सरकार ने 22 भदौ को राष्ट्रीय शोक दिवस मनाने का निर्णय किया है।
सिंहदरबार में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता एवं शिक्षा तथा खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने बताया कि राष्ट्रीय शोक के दिन नेपाल के सभी सरकारी कार्यालयों तथा विदेशों में स्थित नेपाली दूतावासों और नियोगों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया जाएगा।
सरकार ने 23 भदौ को ‘जेन–जी शहीद दिवस’ के अवसर पर देशभर में सार्वजनिक अवकाश देने का निर्णय भी किया है।
राहत और पुनरुत्थान के लिए 5 मिलियन डॉलर
भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित नागरिकों के उद्धार और राहत के लिए सरकार ने एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से मिलने वाले 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुदान को स्वीकार करने का फैसला किया है।
बाढ़ प्रभावित नागरिकों, उद्योगों तथा व्यापार–व्यवसाय को तत्काल पुनः संचालित करने के लिए एकीकृत व्यावसायिक पुनरुत्थान योजना लागू की जाएगी। इसके तहत राहत, कर एवं सीमा शुल्क में छूट सहित विभिन्न सहूलियत और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसी बैठक में साल्ट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड और खाद्य व्यवस्था तथा व्यापार कंपनी लिमिटेड को एक प्रतिशत सीमा शुल्क पर 25 हजार मीट्रिक टन चीनी आयात करने की अनुमति देने का निर्णय किया गया।
बचावकर्मियों को जोखिम भत्ता, मृतक परिवारों को 10 लाख
सरकार ने भोटेकोशी बाढ़ के बाद खोज एवं बचाव कार्य में तैनात सुरक्षाकर्मियों और राष्ट्रसेवक कर्मचारियों को विशेष सुविधा देने का निर्णय किया है।
बचाव अभियान में खटने वाले कर्मचारियों को जोखिम भत्ता और खाजा खर्च दिया जाएगा। अभियान के दौरान घायल होने पर निःशुल्क उपचार की व्यवस्था की जाएगी।
वहीं, बचाव कार्य के दौरान किसी राष्ट्रसेवक कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को 10 लाख नेपाली रुपये की राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
नारायणप्रसाद भट्ट बने कोशी प्रदेश के प्रमुख सचिव
मंत्रिपरिषद ने नेपाल प्रशासन सेवा के राजपत्रांकित विशिष्ट श्रेणी के सचिव पद पर नारायणप्रसाद भट्ट को पदोन्नत करने का निर्णय किया है।
उन्हें कोशी प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय का प्रमुख सचिव बनाया गया है।
सरकार के इन फैसलों को भोटेकोशी बाढ़ में जान गंवाने वालों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और आर्थिक गतिविधियों को जल्द सामान्य बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


