नहीं रहे मैथिली के सशक्त हस्ताक्षर डा. रेवतीरमण लाल
काठमांडू, भाद्र २१ – मैथिली के सशक्त हस्ताक्षर डा. रेवतीरमण लाल नहीं रहे । लाल का जन्म २ मार्च १९४३ को धनुषा जिला के देवडिहा गा.वि.स. वा.न. ३ खिरखिरिया गाँम में हुआ था । इन्होंने मैथिली विषय में पीएच.डी. किया था और राष्ट्र बैंक से अवकाश प्राप्त कर्मचारी थे ।
मैथिली में इनकी अनेकों प्रकाशित कृतियां हैं जिनमें प्रमुख है —भेंटवार्ता साहित्य—साक्षात्कार(साक्षात्कार संग्रह), कथा संग्रह—माधव नहि अएलाह मधुपुरसँ (१९८८ई.), खिस्सा पिहानी, लोक कथा संग्रह, यात्रा साहित्य—हमर विदेश भ्रमण, कविता संग्रह—काल प्रवाह, नाटक नेपथ्य (२००९ई.), अनुसन्धान÷आलोचना—मिथिलाक सांस्कृतिक परम्परा (२००८), मैथिली लोक साहित्यक स्वरुप, मैथिली गल्पमे चित्रित अन्तर्वस्तुक अध्ययन, (२०११ई.), सम्पादन—२०५९ साल (२००३ ई०) ।
इसके साथ ही लाल नैमिकानन, त्रैमासिक पत्रिका के प्रकाशक और प्रधान सम्पादक भी थे । इसके अलावे अस्मिता, अक्षर कलश, भूमिजा (सामायिक संकलन) का संपादन भी इन्होंने किया था ।
लाल को बहुत से सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है । उन्हें वैदेही प्रतिभा पुरस्कार, त्रिमूर्ति पुरस्कार, मिथिला रत्न,ज्योतिरीश्वर साहित्य सम्मान, नेपाल सरकार द्वारा प्रादेशिक प्रतिभा पुरस्कार से सम्मानित किया ।
मधेशी आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा. विजय दत्त ने सामाजिक संजाल पर लिखा है कि – पुनः आचार्यविहिन हुआ मिथिला ! नहीं रहे मैथिली के सशक्त हस्ताक्षर डा.रेवतीरमण लाल !
उनकी अन्त्येष्टि आज २१ गते रविवार दिन के ११.०० बजे की जाएगी ।


