बरिष्ठ साहित्यकार डा. रेवती रमण लाल का निधन से जनकपुरधाम में शोक की लहर
जनकपुरधाम/ मिश्री लाल मधुकर । नेपाल के मैथिली भाषा के बरिष्ठ साहित्यकार डा. रेवती रमण लाल का शनिवार की रात जनकपुरधाम में निधन हो गया हैं।उनका जन्म 2 मार्च 1943 को धनुषा जिले के पूर्व देवडीहा पंचायत बार्ड 3 खिरखिरिया गांव में हुआ था मैथिली में Ph.D. की। वे राष्ट्रबैंक के रिटायर्ड कर्मचारी थे। उन्होंने विभिन्न विधाओं में लिखा है- कथा, कविता, गीत, लेख, पटकथा, साक्षात्कार, यात्रा वृत्तांत, लोक साहित्य आदि। उनकी पहली प्रकाशित मैथिली कृति – सरस्वती वंदना (गीत) मैथिली कृतियों में: साक्षरता (लेखकों के साथ साक्षात्कार), माधव नाही ऐला मधुपुरसा (कहानियों का संग्रह), हमार विदेश भ्रमण (यात्रा वृत्तांत), महाकवि विद्यापति (पटकथा), खिस्सा पिहानी (लोकगीत)। अन्य कृतियाँ: धनुषाधाम और मणिमंडप (पर्यटन संबंधी)। वे मैथिली तिमाही ‘नैमिकानन’ के संपादक भी थे। उनकी कई रचनाएँ स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल हैं। वे विभिन्न संगठनों से जुड़े थे। वे विविध मैथिली मंच के संस्थापक सचिव, मैथिली साहित्य परिषद के सदस्य और मैथिली साहित्यकार सभा के सलाहकार थे। उन्हें वैदेही टैलेंट अवॉर्ड, त्रिमूर्ति अवॉर्ड, मिथिला रत्न, ज्योतिरिश्वर साहित्य सम्मान, नेपाल सरकार का रीजनल टैलेंट अवॉर्ड मिला है। कुछ दिन पहले बरिष्ठ साहित्यकार डा. राजेन्द्र विमल का निधन हो गया हैं। प्राज्ञ राम भरोस कापड़ि भ्रमर, मैथिली विकास कोष के अध्यक्ष जीवनाथ चौधरी, प्राज्ञ रमेश रंजन झा, साहित्यकार प्रेम विदेह ललन, जनकपुरधाम के मेयर मनोज कुमार साह, साहित्यकार तथा नाट्यकार अशोक दत्त, प्रेस स्वतंत्रता सेनानी तथा साहित्यकार राम भरत साह, मिथिला नाट्य कला परिषद के अध्यक्ष सुनील मल्लिक, जनकपुरधाम उप महानगरपालिका बार्ड 23 के बार्ड अध्यक्ष सह नेपाल हिंदी प्रतिष्ठान के अध्रक्ष राघवेंद्र साह सहित कई लोगों ने इनके निधन पर शोक व्यक्त किया हैं तथा उनकी आत्मा को शांति मिले, ईश्वर से कामना किया हैं।

