नेपाली कांग्रेस द्वारा सरकार से की गई मांग
काठमांडू, भाद्र २३ – नेपाली कांग्रेस ने भोटेकोसी–त्रिशूली बाढ़ के कारण सुरंग में फंसे नागरिकों के उद्धार के लिए अन्तर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों और प्रविधि परिचालन की सरकार से मांग की है ।
पार्टी सभापति गगनकुमार थापा के सभापतित्व में रविवार और सोमवार को हुई केन्द्रीय कार्यसम्पादन समिति की बैठक में उद्धार, राहत, सड़क पुनःस्थापना और प्रेस स्वतन्त्रता के विषय में निर्णय किया है ।
नेपाली कांग्रेस ने बाढी प्रभावितों के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष में एक करोड रुपये की सहयोग की है । इस बात की जानकारी देते हुए राहत और पुनर्निर्माण को प्रभावकारी बनाने के लिए सरकार का ध्यानाकर्षण कराया है ।
बैठक में सुरंग के भीतर फंसे लोगों के आपत्कालीन उद्धार के लिए भी सरकार से मांग की है ।
अपर त्रिशूली १, रसुवागढी, लाङटाङ खोला, चिलिमे आदि जलविद्युत् परियोजनाओं के सुरंग में फंसे प्राविधिक तथा श्रमिकों के उद्धार के लिए बहुविषयगत प्राविधिक अभियान सञ्चालन करने की बैठक ने मांग की है ।
इस्के साथ ही बैठक में उद्धार में नेपाली सेना, विपद् व्यवस्थापन प्राधिकरण और अन्तर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ टीम तैनात करने तथा घायलों का इलाज निःशुल्क करने की मांग की है ।
पासाङल्हामु और पृथ्वी राजमार्ग के कृष्णभीर के क्षेत्र में अवरोध के कारण आपूर्ति ठप् होने के संकट को जताते हुए सड़क विभाग के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम गठन कर तत्काल अस्थायी ट्रैक खोलने का आग्रह किया है ।
बैठक में बेत्रावती तथा अन्य संवेदनशील स्थानों में तत्काल बेलीब्रिज रखने का सुझाव दिया है । राहत सामग्री जमा करने लेकिन पीडि़तों तक नहीं पहुँच रहे हैं । इसमें समस्या दिखने के कारण प्रदेश और स्थानीय सरकारों के नेतृत्व में ‘सहजीकरण साझा संयन्त्र’ तथा एकद्वार प्रणाली माध्यम से त्रिपाल, खाद्यान्नों और औषधि युद्धस्तर में वितरण करने का आह्वान किया है ।
बैठक में भोटेकोसी बाढ़ से हुए क्षति, उद्धार, पुनर्निर्माण और जलवायु न्याय के विषय में एकीकृत नीति तैयार करने का केन्द्रीय सदस्य प्रा. डा. गोविन्दराज पोखरेल के संयोजकत्व में समिति गठन की गई है । इसके साथ ही सरकार द्वारा निजी क्षेत्रों के संचार माध्यम को सरकारी विज्ञापन से वंचित करने, लोक कल्याणकारी विज्ञापनों के कार्यविधि बदलने तथा राष्ट्रीय समाचार समिति (रासस) के बुलेटिन शुल्क बढाने के निर्णय प्रति ध्यानाकर्षण कराते हुए इन सभी निर्णयों को तत्काल वापस लेने की सरकार से मांग की है ।


