संविधान दिवस पर नेपाली कांग्रेस का सरकार पर आरोप: “सरकार ही संविधान पर हमला कर रही है”
नेपाल के प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के संसदीय दल के नेता भीष्मराज आङ्देम्बे ने आरोप लगाया है कि संविधान लागू करने की जिम्मेदारी जिस सरकार पर है, वही सरकार संविधान पर चारों ओर से हमला कर रही है।
संविधान दिवस के अवसर पर शनिवार को जारी शुभकामना संदेश में उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन के नाम पर उसके मूल सिद्धांतों और भावना पर प्रहार करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सरकार द्वारा गठित संविधान संशोधन बहसपत्र कार्यदल की रिपोर्ट को खारिज करने की मांग भी की।
नई समिति बनाने की मांग
आङ्देम्बे ने कहा कि संविधान संशोधन को सत्ता के स्वार्थ का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, संविधान संशोधन की प्रक्रिया को राष्ट्रीय सहमति के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया कि कार्यरत सर्वोच्च अदालत के किसी न्यायाधीश या पूर्व प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता में नया संविधान संशोधन कार्यदल गठित किया जाए।
उन्होंने कहा,
“इसलिए उस रिपोर्ट को खारिज किया जाए। संविधान संशोधन को सत्ता स्वार्थ का विषय न बनाया जाए। सर्वोच्च अदालत के कार्यरत न्यायाधीश या पूर्व प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता में नया संविधान संशोधन कार्यदल बनाया जाए।”
कार्यदल पर पहले भी जताई गई थी आपत्ति
उन्होंने बताया कि संविधान संशोधन के लिए गठित कार्यदल के अधिकार क्षेत्र और संविधान के मूल मूल्यों में हस्तक्षेप की आशंका को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने पहले ही लिखित असहमति दर्ज कराई थी।
हालांकि कार्यदल का कहना है कि उसने विभिन्न विशेषज्ञों, राजनीतिक दलों, संस्थाओं और नागरिकों से सुझाव लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की है।
सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप
आङ्देम्बे ने कहा कि संविधान के क्रियान्वयन का सवाल भी उतना ही गंभीर है। उनके अनुसार, सरकार के व्यवहार से ऐसा महसूस हो रहा है कि वही संविधान की भावना के विपरीत काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि कार्यपालिका को विधायिका और न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए। संवैधानिक निकायों को कार्यपालिका के अधीन या उसके “कारिंदे” संस्थानों में बदलने का प्रयास स्वीकार्य नहीं है।
उनके शब्दों में,
“नेपाली कांग्रेस को ऐसा प्रतीत होता है कि संविधान पर चारों तरफ से हमला सरकार की ओर से ही हो रहा है। सरकार संविधान की गरिमा को ठेस न पहुँचाए, उसकी मूल भावना से खिलवाड़ न करे और संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को कम न करे।”
संशोधन हो, लेकिन संविधान की आत्मा सुरक्षित रहे
आङ्देम्बे ने कहा कि समय की आवश्यकता के अनुसार संविधान में सुधार और संशोधन किए जा सकते हैं, लेकिन संशोधन के नाम पर संविधान की आत्मा, मूल भावना और आधारभूत मूल्यों पर प्रहार नहीं होना चाहिए।

