संविधान दिवस पर प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह का संबोधन
1 month ago
काठमांडू।
संविधान दिवस और राष्ट्रीय दिवस 2083 के अवसर पर सैनिक मंच में आयोजित विशेष समारोह में प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह ने कहा कि प्रतिस्पर्धात्मक बहुदलीय लोकतंत्र, मानवाधिकार और विधि का शासन नेपाल के राष्ट्रीय जीवन की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार संविधान के अक्षर और उसकी भावना—दोनों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
संविधान केवल दस्तावेज़ नहीं, जनता से किया गया वादा है
माननीय राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधान न्यायाधीश, संसद के दोनों सदनों के अध्यक्ष, मंत्रिगण, जनप्रतिनिधियों, स्थानीय तहों के प्रमुखों, कूटनीतिक समुदाय तथा देश-विदेश में रह रहे सभी नेपाली नागरिकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सबसे पहले लोकतंत्र और सुशासन के आंदोलनों में शहीद हुए सभी ज्ञात-अज्ञात शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने ऐतिहासिक जेनजी सुशासन आंदोलन में जान गंवाने वालों को भी श्रद्धांजलि दी और हाल की रसुवा–भोटेकोशी बाढ़ में मारे गए नेपाली तथा विदेशी नागरिकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नेपाल का संविधान जनता से एक महत्वपूर्ण वादा करता है—विविधता में एकता, हर प्रकार के भेदभाव और असमानता का अंत, तथा विकास, समृद्धि और सामाजिक न्याय पर आधारित समानतामूलक समाज का निर्माण।
उनके अनुसार, बहुदलीय लोकतंत्र, मानवाधिकार और कानून का शासन कोई बाहरी शर्तें नहीं, बल्कि नेपाल के राष्ट्रीय जीवन की नींव हैं।
संविधान को जीवित रखने के लिए ईमानदार शासन जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे लागू करने वाले हाथ ईमानदार और निरंतर सक्रिय नहीं होंगे तो वह केवल कागज़ का दस्तावेज़ बनकर रह जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह केवल शुरुआत है, अंत नहीं। भ्रष्टाचार और दंडहीनता की जड़ें गहरी हैं, लेकिन उन्हें उखाड़ने का संकल्प सरकार ने लिया है।
सुशासन सरकार की प्राथमिकता
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास के लिए सुशासन अनिवार्य है। सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाने का दावा किया, जिनमें शामिल हैं—
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प्रशासनिक ढांचे का उपयुक्त पुनर्गठन।
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भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति।
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प्रशासनिक तंत्र में राजनीतिक तटस्थता।
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सरकारी और सार्वजनिक पदों पर योग्यता आधारित नियुक्तियां।
उन्होंने कहा कि सुशासन केवल नारा नहीं, बल्कि कार्य संस्कृति है और सरकार इसी दिशा में काम कर रही है।
डिजिटल नेपाल और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पारंपरिक विकास मॉडल तक सीमित नहीं रहेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक और साइबर सुरक्षा को साथ लेकर ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डिजिटल गवर्नेंस ब्लूप्रिंट के अनुसार डिजिटल आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है और युवाओं द्वारा मांगे गए सुशासन को तकनीक के माध्यम से भी सुनिश्चित किया जाएगा।
रसुवा–भोटेकोशी बाढ़ से सीख लेने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने कहा कि रसुवा–भोटेकोशी की हालिया बाढ़ ने देश को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है।
उन्होंने राहत और बचाव कार्य में सहयोग देने वाले मित्र देशों, अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संस्थाओं, निजी क्षेत्र, सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों का आभार व्यक्त किया।
साथ ही उन्होंने कहा कि नेपाल विश्व के उच्च आपदा जोखिम वाले देशों में है, इसलिए आपदा आने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले तैयारी करना आवश्यक है। सरकार पूर्व चेतावनी प्रणाली, जोखिम न्यूनीकरण और आपदा तैयारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी।
जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान दिवस हर वर्ष आता है, लेकिन संविधान के उद्देश्यों को पूरा करने का दिन ईमानदार निर्णयों, पारदर्शी नियुक्तियों और नागरिकों तक प्रभावी सेवाएं पहुंचाकर ही आएगा।
उन्होंने कहा कि जनता ने सुशासन, विकास, समृद्धि और सामाजिक न्याय की मांग की है और सरकार का हर कदम इन्हीं आकांक्षाओं की पूर्ति की दिशा में रहेगा।
अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा—
“शहीदों ने अपने रक्त से संविधान लिखा है, हम उसे अपने काम से पूरा करेंगे।”
उन्होंने सभी नेपाली नागरिकों को संविधान दिवस एवं राष्ट्रीय दिवस 2083 की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।


