संयुक्त राष्ट्र महासभा से लौटे प्रधानमंत्री बालेन शाह, त्रिभुवन एयरपोर्ट पर हुआ स्वागत
प्रधानमंत्री बालेन शाह संयुक्त राष्ट्रसंघ की 81वीं महासभा में भाग लेकर स्वदेश लौट आए हैं। वे कुछ समय पहले ही त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल पर पहुंचे।
प्रधानमंत्री शाह के स्वागत के लिए विमानस्थल पर कार्यवाहक प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले, गृह मंत्री सुधन गुरुङ तथा संस्कृति, नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन मंत्री खडकराज पौडेल उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री शाह गत मंगलवार शाम संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए अमेरिका रवाना हुए थे। उन्होंने 8 असोज को महासभा को संबोधित किया और नेपाल की प्राथमिकताओं तथा वैश्विक मुद्दों पर अपना पक्ष रखा।
जलवायु संकट पर नेपाल की चिंता
महासभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री बालेन शाह ने हाल ही में नेपाल में आई भोटेकोशी–त्रिशूली बाढ़ को जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न वैश्विक संकट का एक स्पष्ट उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव सबसे अधिक उन देशों पर पड़ रहा है, जिन्होंने इस संकट को पैदा करने में सबसे कम योगदान दिया है। नेपाल भी ऐसे ही देशों में शामिल है, जिसे हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती आपदाओं की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
प्रधानमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते खतरों की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि “जलवायु परिवर्तन सीमाओं को नहीं पहचानता।” हिमनदों के तेजी से पिघलने, भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं का असर केवल नेपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन और भारत सहित पूरे क्षेत्र पर पड़ रहा है।
जलवायु न्याय की नई परिभाषा
प्रधानमंत्री शाह ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु न्याय को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने हिमालयी समुदायों, छोटे द्वीपीय देशों, भू-परिवेष्ठित राष्ट्रों, अति कम विकसित देशों और आने वाली पीढ़ियों की आवाज़ को भी अंतर्राष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में समान महत्व दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भागीदारी के दौरान प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के अधिकारियों से द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय मुलाकातें भी कीं। इन बैठकों में नेपाल और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच सहयोग, जलवायु परिवर्तन, विकास और वैश्विक साझेदारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

