डा. विजय दत्त की कृति ‘शनिश्रचरा से प्रथम शीर्ष तक’ का लोकार्पण
काठमांडू, आश्विन १० – डा. विजय दत्त की कृति ‘शनिश्रचरा से प्रथम शीर्ष तक’ का आज भव्य लोकार्पण किया गया । नेपाल चित्रगुप्त समाज के आयोजन में दिव्य शताब्दी पुरुष डा.गौरी शंकर लाल दास सम्मान कार्यक्रम के अवसर पर मधेशी आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा. विजय दत्त की कृति ‘शनिश्रचरा से प्रथम शीर्ष तक’ का लोकार्पण किया गया । कृति का लोकार्पण दिव्य पुरुष डा.गौरी शंकर लाल दास के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ ।
कार्यंक्रम में अपने विचारों को रखते हुुए मुख्य अतिथि डा.गौरी शंकर लाल दास ने कहा कि – आज का दिन उनके लिए अत्यंत विशेष है, क्योंकि उन्होंने आज अपने १०३ वर्ष पूरे किए हैं । इस अवसर पर नेपाल चित्रगुप्त समाज द्वारा प्रदान किया गया ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट’ सम्मान उनके लिए अत्यंत गर्व और सम्मान की बात है ।
उन्होंने ‘शनिश्रचरा से प्रथम शीर्ष तक’ कृति की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक सभी को अवश्य पढ़नी चाहिए । इस पुस्कत में डा. विजय ने नेपाल की सनातन संस्कृति, समाज , वर्गीय संरचना, धार्मिक पक्ष, राजनीतिक पक्षों का गहन अध्ययन करउसे आत्मसात करते हुए बहुत ही संवेदशील ढंग से प्रस्तुत किया है । विशेष रुप से नई पीढ़ी के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी है ।
कृति ‘शनिश्रचरा से प्रथम शीर्ष तक’ की समीक्षा त्रिभुवन विश्वविद्यालय हिन्दी केन्द्रीय विभाग की विभागाध्यक्ष डा.श्वेता दीप्ति ने की । उन्होंने कहा कि – इस पुस्तक के प्रकाशन से हिन्दी साहित्य समृद्ध हुआ है । यह कृति ‘शनिश्रचरा से प्रथम शीर्ष तक’ अनुभवों की एक गाथा है । अपने जीवन की उपलब्धियों को दिखाने के साथ ही अपने संघर्ष, कठिनाईयों को भी लिखा है । साथ ही मेहनत रंग लाती है यह भी एक संदेश दिया है । उन्होंने कहा कि जिस उद्देश्य से आपने इस कृति की रचना की है उसमें आप पूर्णतः सफल हुए हैं । आपकी यह साहिसत्यक यात्रा निरंतर चलती रहे ।
डा. विजय दत्त की ‘शनिश्रचरा से प्रथम शीर्ष तक’यह पहली हिन्दी कृति है । इससे पूर्व उन्होंने नेपाली और मैथिली में अनेक रचनाएं की हैं ।ं नेपाली में ‘कमली’ लघु उपन्यास , ‘महागंगा आरती’ सांस्कृतिक इतिहास तथा मैंथिली में ‘चमेलिया’लघुकथा संग्रह, ‘पिरीतिया’ गीति काव्य संग्रह जैसी कृतियां काफी चर्चित रही हैं ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता नेपाल चित्रगुप्त समाज के अध्यक्ष संतोष किशोर लाभ ने किया ।



