जिसकी मस्ती जिंदा है,उसकी हस्ती जिंदा है : बिमल सरार्फ
बिमल सरार्फ, रक्सौल, 01 अक्टूबर 2026 । जीवन का असली आनंद दूसरों से आगे निकलने की होड़ में नहीं, बल्कि अपनी सोच, मेहनत और अच्छे कर्मों के साथ आगे बढ़ने में है। ईमानदारी और लगन से काम करने वाला व्यक्ति सम्मान का भूखा नहीं होता, क्योंकि उसके कर्म ही उसकी पहचान बन जाते हैं।
जीवन में हर व्यक्ति के सामने कठिनाइयाँ आती हैं। कोई उनसे टूट जाता है, तो कोई उन्हीं परिस्थितियों से सीखकर और मजबूत बनता है। सफलता के लिए निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच जरूरी है। जैसे रुका हुआ पानी अपनी उपयोगिता खो देता है, वैसे ही प्रयास छोड़ देने से जीवन की प्रगति रुक जाती है।
त्याग वहीं करना चाहिए, जहाँ उसकी कद्र हो। रिश्ते स्वार्थ और अवसर से नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम और समर्पण से मजबूत होते हैं। षड्यंत्र से कुछ हासिल किया जा सकता है, लेकिन सच्ची श्रेष्ठता केवल ईमानदारी और अच्छे आचरण से मिलती है।
दूसरों की निःस्वार्थ सेवा और सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती। जीवन में सुख और संतोष का आधार दूसरों से तुलना करना नहीं, बल्कि स्वयं पर विश्वास रखना और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाना है।
दुनिया की आपाधापी में अपनी पहचान और जीवन का उद्देश्य नहीं खोना चाहिए। मेहनत की कमाई और अच्छे कर्म ही स्थायी सम्मान देते हैं। जो व्यक्ति स्वयं कठिनाइयों में रहते हुए भी दूसरों के लिए सहारा बनता है, वही वास्तव में जीवन की सार्थकता और आनंद को समझता है।

