भारत ने चार जलविद्युत परियोजनाओं से बिजली निर्यात की अनुमति नवीनीकृत की
काठमांडू —
भारत ने चार जलविद्युत परियोजनाओं से 96.50 मेगावाट बिजली के निर्यात की अनुमति फिर से नवीनीकृत कर दी है। नवीनीकृत अनुमति वाली परियोजनाओं में ऊपरी चमेलिया, सेती नदी, ऊपरी तादीखोला और ऊपरी दोर्दी ‘ए’ जलविद्युत परियोजना शामिल हैं।
ऊपरी चमेलिया जलविद्युत परियोजना की 38.8 मेगावाट बिजली के निर्यात की अनुमति सबसे पहले समाप्त हुई थी। सेती नदी की 24.25 मेगावाट और ऊपरी तादीखोला की 10.70 मेगावाट बिजली के निर्यात की अनुमति 31 जुलाई को समाप्त हुई थी। इसी तरह ऊपरी दोर्दी ‘ए’ की 24.25 मेगावाट बिजली के निर्यात की अनुमति पिछले अगस्त में समाप्त हुई थी। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, भारत ने पिछले सप्ताह इन अनुमतियों के नवीनीकरण की जानकारी दी।
प्राधिकरण का कहना है कि निर्यात के मौसम में अनुमति का नवीनीकरण नहीं होने से बिजली निर्यात प्रभावित हो सकता था, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं रहेगी।
नेपाल वर्षा ऋतु में घरेलू खपत के बाद बची बिजली भारत और बांग्लादेश को निर्यात करता है। वहीं, सर्दियों में घरेलू मांग पूरी करने के लिए भारत से ही बिजली आयात करनी पड़ती है।
भारत के ऊर्जा मंत्रालय ने 400 केवी ढल्केबर-मुजफ्फरपुर और 132 केवी टनकपुर-महेन्द्रनगर लाइनों के माध्यम से नेपाल को आगामी पुस तक 654 मेगावाट बिजली खरीदने की अनुमति नवीनीकृत कर दी थी, लेकिन बिजली निर्यात की अनुमति का नवीनीकरण नहीं किया था। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, नेपाल इस समय भारत को प्रतिदिन औसतन 600 मेगावाट बिजली निर्यात कर रहा है।
दूसरी ओर, भारत और बांग्लादेश को बिजली निर्यात की अनुमति प्राप्त त्रिशूली और चिलिमे जलविद्युत परियोजनाएं भोटेकोशी में आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसके कारण बांग्लादेश को बिजली निर्यात रोक दिया गया है। भारत ने भारतीय ऊर्जा एक्सचेंज (आईईएक्स) के डे-अहेड मार्केट (डीएएम) तथा रियल-टाइम मार्केट (आरटीएम) में प्रतिस्पर्धी दर पर बिजली बेचने की अनुमति प्राप्त काबेली ‘बी-1’ और सोलुखोला जलविद्युत परियोजनाओं की बिजली बांग्लादेश को बेचने की स्वीकृति नहीं दी है।
देवीघाट जलविद्युत परियोजना की बिजली को भारत निर्यात करने की अनुमति थी। यह परियोजना भी भोटेकोशी बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई है। देवीघाट की जगह भारत के आईईएक्स बाजार में स्वीकृति प्राप्त निचली मोदी जलविद्युत परियोजना की बिजली द्विपक्षीय बाजार में बेचने के लिए प्राधिकरण ने अनुमति मांगी है, लेकिन भारत ने अभी तक इसकी अनुमति नहीं दी है। प्राधिकरण के अनुसार, वह हर दिन अनुमति के संबंध में जानकारी ले रहा है, लेकिन भारत की ओर से अब तक स्वीकृति नहीं मिली है।
भारत को बिजली निर्यात की अनुमति प्राप्त परियोजनाओं की अनुमति हर वर्ष नवीनीकृत करानी पड़ती है। बिजली आयात करने के लिए भी भारत से समय-सीमा बढ़वानी पड़ती है। इस कारण नेपाल को बिजली खरीदने और बेचने के मामले में भारत की नीतियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
इस बीच, वर्षा ऋतु में बिजली बिक्री के समय भोटेकोशी बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त तथा अन्य कारणों से प्रभावित कुल 431.1 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं में बिजली उत्पादन बंद है। अब तक नेपाल को भारत और बांग्लादेश में कुल 37 जलविद्युत परियोजनाओं से 1,200 मेगावाट बिजली निर्यात करने की अनुमति मिल चुकी है।

