जेन-जी प्रदर्शन में गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोगों के मामले वापस नहीं लिए जा सकते
जेन-जी प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लिया जा सकता है या नहीं, इसका अध्ययन करने के लिए गठित समिति ने 24 भदौ की हिंसक घटनाओं में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोगों के मामले वापस नहीं लिए जा सकने की राय दी है। अधिकतम आरोपियों के मामले वापस लिए जा सकने की सिफारिश के साथ रिपोर्ट तैयार करने का दबाव होने के बावजूद समिति ने केवल 300 लोगों के मामले वापस लिए जा सकने की राय दी है।
उच्च अदालत के पूर्व न्यायाधीश बाबुराम रेग्मी के नेतृत्व में गठित समिति ने जेन-जी आंदोलन से संबंधित 445 मामलों में शामिल 1,778 आरोपियों में से 300 के मामले वापस लिए जा सकने, जबकि शेष आरोपी गंभीर प्रकृति के आपराधिक अपराधों में संलिप्त रहे होने के कारण उनके मामले वापस लेने में कानूनी प्रावधान बाधक होने की राय दी है। समिति ने 15 असोज को गृहमंत्री सुधन गुरुङ को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। समिति द्वारा अध्ययन किए गए मामलों में से 53 मामलों में अदालत अपना फैसला भी सुना चुकी है।
समिति के सूत्रों के अनुसार, गृहमंत्री गुरुङ ने ही कहा था कि ‘प्रतिशोध लेने के लिए जेन-जी प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ मनमाने ढंग से मामले चलाए गए हैं, इसलिए हत्या में संलिप्त लोगों को छोड़कर बाकी के मामले वापस लेने की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट दें।’

