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आईपीयू महासभा में नेपाल का जलवायु आपदा संबंधी आपातकालीन प्रस्ताव दो-तिहाई बहुमत से पारित

 

काठमांडू।

अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की 153वीं महासभा में नेपाल द्वारा प्रस्तुत जलवायुजन्य आपदा संबंधी आपातकालीन प्रस्ताव दो-तिहाई बहुमत से पारित हो गया है।

तंजानिया के अरुशा में जारी महासभा में सभामुख डोलप्रसाद अर्याल ने नेपाल में हाल के दिनों में सामने आई प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु संकट से संबंधित ‘इमरजेंसी प्रस्ताव’ प्रस्तुत किया था।

प्रस्ताव पर हुए मतदान में इसके पक्ष में 901, विपक्ष में 78 और 140 मत तटस्थ रहे। दो-तिहाई बहुमत के लिए पक्ष और विपक्ष में पड़े कुल 979 मतों में से 653 मत आवश्यक थे। आवश्यक दो-तिहाई से अधिक मत मिलने के बाद नेपाल का प्रस्ताव महासभा के आपातकालीन एजेंडे में शामिल किया गया।

प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सभामुख अर्याल ने हिमालय को मानवता की साझा विरासत और एशिया के ‘वाटर टावर’ के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय, हिमनदों और हिमतालों पर बढ़ता जोखिम अब मानव सभ्यता के सामने गंभीर चुनौती बन गया है।

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उन्होंने नेपाल द्वारा हाल के समय में झेली गई जलवायुजन्य आपदाओं का उल्लेख करते हुए जलवायु न्याय और संसदीय जवाबदेही के लिए विश्व की संसदों के बीच साझा दायित्व और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

अर्याल ने जलवायुजन्य आपदाओं से निपटने के लिए संसदीय जलवायु कूटनीति को प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव का पारित होना केवल नेपाल के लिए ही नहीं, बल्कि आईपीयू के सभी सदस्य देशों और सांसदों की भी साझा जिम्मेदारी है।

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नेपाल के प्रस्ताव में सदस्य देशों के बीच जलवायु एवं मौसम संबंधी सीमापार पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने तथा आवश्यक प्रौद्योगिकी तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कानूनी व्यवस्था करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

इसी तरह, जलवायु परिवर्तन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन के लिए संबंधित देशों की कार्यपालिका को संसदीय स्तर पर जवाबदेह बनाने का मुद्दा भी प्रस्ताव में शामिल है।

सभामुख अर्याल ने कहा कि जलवायु संकट के लिए विश्व समुदाय पर दोषारोपण करने के बजाय आपदा प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा, न्याय और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए साझा समाधान तलाशना आवश्यक है।

आईपीयू महासभा के नियम 11(ख) के अनुसार, यदि एक से अधिक आपातकालीन प्रस्ताव आवश्यक बहुमत हासिल करते हैं तो सबसे अधिक सकारात्मक मत प्राप्त करने वाले प्रस्ताव को कार्यसूची में शामिल किया जाता है। मतदान में नेपाल के प्रस्ताव को सर्वाधिक सकारात्मक मत मिलने के कारण इसे आपातकालीन विषय के रूप में चयनित किया गया।

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नेपाल के प्रस्ताव पर आईपीयू की 153वीं महासभा में आज चर्चा होगी। चर्चा के दौरान जलवायुजन्य आपदाओं से उत्पन्न चुनौतियों, हिमालय और हिमनदों के संरक्षण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी प्रणाली, प्रौद्योगिकी एवं वित्तीय सहयोग तथा जोखिम वाले क्षेत्रों में लचीलापन बढ़ाने के लिए आवश्यक संसदीय पहलों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

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