बाढ़ और भूस्खलन से बेनी–जोमसोम–कोरला सड़क को भारी नुकसान, पुनर्निर्माण के लिए 3 से 4 अरब रुपये की जरूरत
हाल ही में मानसूनजनित आपदा के कारण चीन और भारत को जोड़ने वाली बेनी–जोमसोम–कोरला सड़क पर लगभग एक अरब रुपये की भौतिक संरचनाओं के क्षतिग्रस्त होने का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। सड़क की पूरी तरह मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए 3 से 4 अरब रुपये के बजट की आवश्यकता होने की जानकारी बेनी–जोमसोम–कोरला सड़क परियोजना ने दी है।
गत 8 से 11 असोज तक हुई लगातार बारिश के बाद भूस्खलन, कालीगंडकी नदी में आई बाढ़ और कटाव से सड़क को व्यापक नुकसान पहुंचा है। परियोजना प्रमुख तेजस्वी शर्मा के अनुसार, कालीगंडकी नदी की बाढ़ ने 10 स्थानों पर सड़क को बहा दिया या क्षतिग्रस्त कर दिया, जबकि 50 स्थानों पर भूस्खलन से नुकसान हुआ है।
शर्मा ने बताया कि सड़क को हुए 80 से 90 करोड़ रुपये के नुकसान का प्रारंभिक आकलन किया गया था। अस्थायी मरम्मत के बाद दो सप्ताह के भीतर यातायात फिर से शुरू कर दिया गया, लेकिन सड़क को उसकी पुरानी स्थिति में लाने के लिए अतिरिक्त 3 से 4 अरब रुपये की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि भूस्खलन और नदी कटाव को नियंत्रित करने के साथ-साथ म्याग्दी खंड में पहले डीबीएसडी तकनीक से कालीकरण की गई सड़क को अब निर्धारित डिजाइन के अनुसार एस्फाल्ट पिचिंग के माध्यम से विकसित करना होगा।
पर्वत जिले के मालढुंगा से म्याग्दी के बेनी होते हुए मुस्तांग के कोरला सीमा नाके तक जाने वाली इस 202 किलोमीटर लंबी सड़क का सबसे अधिक नुकसान म्याग्दी खंड के 33 किलोमीटर क्षेत्र में हुआ है। पहले से भूस्खलन और कटाव के जोखिम वाले स्थानों के अलावा कई नए स्थानों पर भी कटाव और भूस्खलन की समस्या पैदा हुई है।
संघीय सड़क पर्यवेक्षण कार्यालय, पोखरा के प्रमुख नरेंद्र सुवेदी ने बताया कि वर्ष 2073/74 में निर्माण शुरू हुई बेनी–जोमसोम–कोरला सड़क को अब तक की सबसे बड़ी क्षति इसी आपदा में पहुंची है। परियोजना के संस्थापक प्रमुख रहे सुवेदी के अनुसार, म्याग्दी खंड में हाल ही में सड़क के उन्नयन का काम पूरा किया गया था, लेकिन इस बार वहां भी भारी नुकसान हुआ है।
एक घंटे का सफर अब तीन से चार घंटे में
बाढ़ और भूस्खलन से पहले म्याग्दी खंड को पार करने में लगभग एक घंटा तीन मिनट लगता था, लेकिन अब इसमें तीन से चार घंटे लग रहे हैं। पर्वत के फर्से, केराबारी, लामाबगर तथा म्याग्दी के तिल्केनीचौर, राहुपारे, बैसरी, सिरुवारी, कुनौटा, महभीर, भिरकाटे, धिरच्यांग, रातोपानी, नौनीबगर, तातोपानी, गुइठेभीर, खामभित्ता और सुकेबगर सहित कई स्थानों पर भूस्खलन और कटाव से भारी क्षति हुई है।
कालीगंडकी नदी में बह गए पोखरेबगर सड़क पुल के स्थान पर अस्थायी मार्ग बनाकर यातायात संचालित किया जा रहा है। जहां भूस्खलन और कटाव हुआ है, वहां फिलहाल एकतरफा यातायात की व्यवस्था की गई है। इसके कारण वाहनों के फंसने और जाम लगने की समस्या बनी हुई है।
म्याग्दी उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष सुविन श्रेष्ठ ने बताया कि कोरला नाके से आने-जाने वाले मालवाहक कंटेनरों, सीमा नाके से प्रवेश करने वाले वाहनों तथा मुस्तांग जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही अधिक होने के कारण यातायात का दबाव लगातार बना हुआ है।
कोरला सीमा नाके के साथ-साथ पर्यटन और आंतरिक परिवहन की दृष्टि से भी बेनी–जोमसोम–कोरला सड़क अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कुछ दिन पहले क्षतिग्रस्त सड़क का निरीक्षण करने पहुंचे नेपाल सरकार के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री महावीर पुन ने आश्वासन दिया था कि भौतिक संरचनाओं के पुनर्निर्माण के लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने संबंधित निकायों को पुनर्निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाने का निर्देश भी दिया।


