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मधेश का सी.के राउत के धार में जाने का संकेत : खगेन्द्र संग्रौला

 

मनोज बनैता, लाहान , १३ कार्तिक । नेपाल के महान लेखक एवम् साहित्यकार खगेन्द्र सङ्ग्रौला ने मधेश के न्यायपूर्ण आन्दोलन को अगर गोली और बम से दबाने की कोशिस की गई तो मजबूर होकर के मधेश डा. सी के राउत के धार में जाने का संकेत किया है। मधेश आन्दोलन के बारे में स्थलगत रिर्पोट लेने के लिए संग्रौला कुछ दिनों से मधेश के विभिन्न स्थान के दौड़ धूप में लगे हैं ।
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उनका कहना है कि जारी मधेश आन्दोलन को और सशक्त एवम निर्णायक बनाने की जरुरत है । मधेश मिडिया मिसन द्धारा आयोजित ‘मधेश आन्दोलन किन ?’ विषयक अन्र्तक्रिया कार्यक्रम में उन्होंने ऐसा कहा है। । उनके अनुसार आन्दोलन ज्यादा लम्बा समय तक चलने से बहुत समस्या आ सकती है । आन्दोलन को को दिशाहीन करने के लिए बहुत षडयन्त्र रची जा सकती है । आन्दोलन में घुसपैठ की सम्भावना बढ़ सकती है। आन्दोलनकारीयों का मनोवल घट सकता है । इसलिए इस आन्दोलन को अब परिणाम मुखी बनाने की जरुरत है ।

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मधेशियों के शान्तिपूर्ण आन्दोलन को राज्यपक्ष ने सम्बोधन करने के बजाय उल्टा निहत्था जनता के सिर और छाती में गोली मारकर दबाने का प्रयास किया गया है । ‘न्यायपूर्ण आन्दोलन को गोली से दबाने का काम न रोका गया तो ‘मरता क्या न करता’ मधेश आन्दोलन स्वतन्त्र मधेश की राह में निकल सकता है । राज्यसत्ता का व्यवहार और शैली को देखकर ऐसी अवस्था आने का संदेह संग्रौला ने किया है।

khage-2मधेश में विभेद उत्पीडन के श्रृंखला को अन्त करके समान हक मधेश खोज रहे मधेशी की आवाज को खस शासक दबाकर अपना शासन सत्ता कायम करना चाह रही है । मधेश मे सदियौं से बसोबास कर रहे थारु और मधेशी अत्यधिक पीड़ित होने के कारण ही इस आन्दोलन की जरुरत आ पड़ी है।

उन्हाेंने कहा कि काठमाडौं का मिडिया जारी आन्दोलन को शासकवर्ग की दृष्टि से देखने के के कारण ही आन्दोलन को बदनाम करने वाला समाचार तथा सूचना सम्प्रेषण कर रही है। ‘बौद्धिक समुदाय चुपचाप है और खस मिडिया अपना भ्रमजाल फैला रही है । मधेश आन्दोलन दिल्ली के इशारा में हो रहने का दुष्प्रचार भी किया जा रहा है ।

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संग्रौला ने कहा कि इस देश में स्वतन्त्रता के लिए जब लोगाें ने आवाज बुलन्द करने की कोशिश की तो कुछ न कुछ आरोप लगे । राणा शासन काल में देश द्रोही कह के संवोधन किया गया । पञ्चयात काल में अराष्ट्रिय तत्व और उग्रवादी कहा , संसदीय पद्धति में आतंककारी कहा गया । और अब प्रगतिशील परिवर्तन के पक्ष में बोलने वाले को विखण्डनकारी कहा जा रहा है । बस इतना ही नही कुछ तो दिल्ली का दलाल भी कहने लगे । यथास्थितिबादियों ने अपना सत्ता आन्दोलन के कारण डगमगाते देख विभिन्न तरह के आरोप लगाते आए है । ऐसे आरोप से मधेशीयों को जरा भी विचलित होने कि आवश्यकता नही है। संघियता तोड़ने के लिए नही बल्कि जोड़ने के लिए है। मधेश आन्दोलन नेपालको विखण्डित करने के लिए नहि बल्की अखण्ड करने के लिए है । पहाड़ीयों को दिए हुए अधिकार के बराबर अधिकार मधेशीयों की माँग है । अगर इस न्याय के आवाज को सरकार अनसुनी करने की कोशिस की तो मधेश स्वराज घोषणा करने की देर नही करेगी । इसका जिम्मेवार ये खस सरकार होगा ।

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khage-3कार्यक्रम में लेखक युग पाठक, लहान मधेश आन्दोलन के अगुवा कृष्णबहादुर यादव, सदभावना पार्टी सह–महासचिव राजु गुप्ता, काँग्रेस का महेश चौधरी, पत्रकार महासंघ के सचिव जिवछ उदासी, सदभावना पार्टी के महमुद आलम , रामरिझन यादव, तमरा के भाग्यनारायण यादव लगायत संचारकर्मी, अधिकारकर्मी और आन्दोलन में रहे नेता एवंम कार्यकताओं की उपस्थिति थी । कार्यक्रम वरिष्ठ पत्रकार दिनेश्वर प्रशाद गुप्ता के सभापतित्व में किया गया ।

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