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अगर पहाड़ी युवा में एक्यबद्धता है तो यह एकता मधेशी युवाओं में भी मौजूद है : दिलिपकुमार यादव

 

दिलिप कुमार यादव, कपिलवस्तु, पौष २० गते |

विगत ५ महीने से जारी मधेश अन्दोलन में युवाओं की अवस्था क्या है ? उनका हक क्या है, अधिकार क्या है, इच्छा क्या है, योग्यता क्या है, भविष्य क्या है ? किसी भी देश का भविष्य युवा होता है । युवाओं ने चाहा तो देश परिवर्तन हो सकता है । उसी तरह भरतीय चिरपरिचित नेता तथा भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र दमोदर दास मोदी ने अपने मन्तव्य देते हुए कहा कि युवा ही देश की सम्पत्ति है । उसी तरह हमारे नेपाल के चाहे मधेसी नेता हो या फिर खसबादी क्षत्रिय नेता सब की एक ही धारणा है कि युवा जाग चुके हैं । ऐसे मे सवाल यह आता है कि यदि युवा देश के कर्णधार हंै, देश का भविष्य है, तो उन्हें क्यों विभिन्न जगहों में गलत काम में प्रयोग किया जाता है । क्या उन्हें कुछ करने का हक नहीं है । मै बात करता हुँ आज के दिन का, पहले यदि पेट्रोलियम पदार्थ का मुल्य पैसों में बढ़ता था तो चाहे मधेश के युवा हों, या फिर पहाड़ के, या हिमाल का सब कीमत वृद्धि के विरोध में मिलकर आन्दोलन करते थे । आज देखा जाए तो युवा भी देश की धार की तरह दो तरफ बटे हुए हैं । मतभेद की इस भावना को बढाने वाले कोई और नहीं बल्कि इस देश के शासक वर्ग ही हैं जिन्होंने खोखली राष्ट्रबाद का नारा देकर दिलों में जहर भरने का काम किया है ।

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आज काठमाडों मे देखा जाए तो पेट्रोलियम पदार्थ आसमान छू रहा है । आज कहाँ हैं वो युवा जो विरोध में सड़क पर उतर आया करते थे ? आज उनकी खामोशी बता रही है कि खसवादी सब मिलकर अपना एक गुट बना चुके हैं और मधेश में देखा जाए तो वही युवा अपने अधिकार के लिए शान्तिपूर्ण अन्दोलन कर रहे है । आज बात यह उठती है कि जब मिलकर आन्दोलन किया जा रहा था, तब वही मधेशी युवाओं ने साथ दिया । आज मधेश आन्दोलन में लाखों मधेशी युवा सड़क पर है । अपना अधिकार माँग रहे हैं । हम भी इसी देश के नागरिक हंै, हमें भी अधिकार चाहिए, हम भी योग्य हैं, यह कह कर अपना अधिकार माँग रहे हंै । इतनी ही नहीं बल्कि अपने शान्तिपूर्ण आन्दोलन में खसवादी सरकार के ही पहरेदार मधेशी युवाओं को मौत की घाट उतार रहे हैं । विश्व में कहीं भी परिर्वतन आया है तो शान्तिपूर्ण अन्दोलन से आया है । आज मधेश जिस तरह अपने संयम का परिचय दे रहा है वो इस से पहले नेपाल के इतिहास में कभी नहीं हुआ है । नेपाल के निरङ्कुश राणा शासन के अन्त के लिए ४ लोगों ने बलिदान दिया । उसी तरह राजतन्त्र अन्त करने के लिए २४ लोगों ने बलिदानी दिया और गणतन्त्र की स्थापना हुई । उसी तरह स्वायत्त मधेश प्रदेश स्थापना, जनसंख्या के आधार में निर्वाचन क्षेत्र, सरकार के हरेक निकाय में समानुपतिक सहभागिता तथा नागरिकता जैसे मुख्य विषय को लेकार शान्तिपूर्ण आन्दोलन में २०६३⁄०६४ में ५४ और २०७२ मे हाल तक में ५६ मधेशियोँ की कायरतापूर्वक हत्या सरकार की ओर से हो चुकी है । अब बात यह है कि राणा शासन गलत था तो उसे अन्त करने के लिए ४ लोगों ने बालिदानी दिया और बदलाव आया । राजतन्त्र अन्त करने के लिए २४ लोगों ने बलिदान दिया और रायतन्त्र का अन्त हो गया । पर आज ६३⁄६४ और ०७२ के मधेश आन्दोलन में क्रमश ५४ और ५६ लोंगो ने अपनी आजादी, अधिकार के लिए शान्तिपूर्ण अन्दोलन में कुर्बानी दे चुके हैं किन्तु ये खसवादी आज भी अपनी निरंकुशता का परिचय दे रहे हैं । क्या अधिकार माँगना गलत है ? है तो उसका कारण सरकार दे या फिर अपनी गलत नीति को सरकार जल्द से जल्द सुधारे ।

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आज लाखों युवा अपने अधिकार के लिए सड़क पर हैं और सरकार की गलत नीति और मधेश के प्रति उदासीनता के कारण जयकृष्ण गोईत तथा सिके राउत के पक्ष में धीरे धीरे जा रहे हैं । अब यदि यहाँ के खस शासकाें ने अपने व्यवहार को नहीं बदला तो जो युवा सड़क पर है वो सभी अलग देश के पक्ष में जा खड़े होंगे और मैने पहले ही कहा है कि युवा शक्ति में देश परिर्वतन की क्षमता होती है । अब अगर मधेशी युवाओं ने ठान लिया और आन्दोलन नेताओं के कब्जे से बाहर गया तो विखण्डन तय है । अब तो यह भी जाहिर हो गया है और नेताओं ने भी मान लिया है कि मधेश में अलग देश की सभी मान्यताएँ मौजूद हैं और आज नहीं तो कल विश्व भी इसके पक्ष में आ ही जाएगा । आज अगर पहाड़ी युवा अपनी एक्यबद्धता दिखा रहे हैं तो यह एकता मधेशी युवाओं में भी मौजूद है । वो भी अपनी शक्ति दिखा सकते हैं । आज पहाड़ी समुदाय जिस तरह मधेश आन्दोलन के विपक्ष में खड़ा है उससे तो यह जाहिर हो गया है कि इनकी मानसिकता क्या है । इन्हें न तो कल मधेशियों की चिन्ता थी और न आज है ये सिर्फ अपने लिए सोचते रहे हैं और भी आज भी सोच रहे हैं ।

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मधेश आन्दोलन अब नेताओं के हाथ में नहीं रहा है यह जनता के हाथ में है और सम्मान को गिरवी रखकर कोई भी समझौता इन्हें मान्य नहीं होगा । मधेश के युवाओं ने आज तक देश के हर निकाय में विभेद को झेला है पर अब नहीं । अगर यह देश और यहाँ की सरकार सम्पूर्ण देशवासियों की है तो इन्हें मधेश की जनता और वहाँ के युवाओं को अधिकार देना ही होगा वरना कल नेपाल का इतिहास बदm सकता है और इसकी पूरी जिम्मेदारी खसवादी शासकों की होगी । आज अधिकार देने के बदले गोली दे रहे है ं। क्या मधेशी युवा इस देश के नागरिक नहीं है ? क्या मधेशी युवा सिर्फ देश को चलाने के लिए खाड़ी मुल्क मे जाकर रेमिटन्स देने के लिए हैं ? क्या सरकारी संयन्त्र में जैसे सेना, प्रहरी, सशस्त्र प्रहरी, खरीदार, नायबसुब्बा, अधिकृत, एल.डि.यो. , सि.डि.यो. बनने की इनमें काबीलियत नहीं है ? अगर देश की चिन्ता इन खसवादियो को है तो आधिकार दे वरना परिणाम के लिए तैयार रहें ।

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“ मधेशी युवाओं को दो अधिकार

अब न सहेंगे अत्याचार ।”

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