ओली की भारत यात्रा
मधेशी आन्दोलन के समय भारत को दुश्मन बताने वाले ओली ने भारत में एक बार भी अघोषित नाकाबन्दी की चर्चा नहीं की और सज्जन पुरुष बने रहे हैं ।
भ्रमण के पहले दिन हवाई अड्डे पर ओली को भारतीय विदेश मन्त्री सुषमा स्वराज्य के स्वगत से ही संतोष करना पड़ा वहीं दूसरी ओर मधेशी युवकों ने प्रधानमन्त्री ओली को काले झण्डे भी दिखाए
प्रो. नवीन मिश्रा :नेपाली प्रधानमन्त्री ओली की भारत यात्रा से पूर्व कुछ अजीबोगरीब घटनाएँ देखने को मिली । सर्वप्रथम एक तरफ प्रधानमन्त्री ओली की भारत यात्रा की तैयारी जोर शोर से चल रही थी वहीं दूसरी ओर वर्तमान ओली सरकार पञ्चायती व्यवस्था की तर्ज पर मधेशी आन्दोलन में सक्रिय मधेशी युवाओं को झूठे मुकदमे में फँसा कर तथा उन्हें गिरफ्तार कर प्रताडि़त करने में लगी हुई थी । इन युवाओं के अभिभावक जब हताश में मदद की गुहार लगाने बड़े पार्टियों के स्थानीय नेताओं के पास पहुँचे तब उनका जवाब मिला कि तुमलोग आज तक हमारी पार्टी में थे, तो कभी कोई
भ्रमण के पहले दिन हवाई अड्डे पर ओली को भारतीय विदेश मन्त्री सुषमा स्वराज्य के स्वगत से ही संतोष करना पड़ा वहीं दूसरी ओर मधेशी युवकों ने प्रधानमन्त्री ओली को काले झण्डे भी दिखाए । भ्रमण के दूसरे दिन नेपाली प्रधानमन्त्री ओली की मौजूदगी में भारतीय प्रधानमन्त्री मोदी ने
मोदी ने कहा कि नेपाल की स्थिरता भारत की सुरक्षा से जुड़ी हुई है । हम दोनों देश आतंकवाद तथा अतिवाद के खतरों से मुकाबला के लिए प्रतिवद्ध तथा सहमत हैं । हम आतंकवादियों और अतिवादियों को अपनी खुली सीमा का दुरुपयोग नहीं करने देंगे । उन्होंने फिर दुहराया कि नेपाल में शान्ति, स्थिरता तथा सम्पन्नता दोनों देशों के हित में है । मोदी नेपाल की सहमति से नेपाल में एक आयुर्वेदिक कॉलेज की स्थापना चाहते हैं जो दोनों ही देशों के सांस्कृतिक और व्यापारिक हित में होगा । मोदी के भाषण पश्चात ओली ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नेपाल–भारत सम्बन्ध का आधार सार्वभौमिकता, समानता, भौगोलिक अखण्डता तथा पारस्परिक सम्मान है । उन्होंने यह भी कहा कि अब दोनों देशों के बीच की असमझदारी दूर हो गई है ।
इस भ्रमण के दौरान सात बुँदे समझदारी पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए । पहली समझदारी भूकम्प के बाद होनेवाले पुनर्निर्माण से सम्बन्धित है, जबकि दूसरी तराई के हुलाकी सड़क से सम्बन्धित । तीसरा विसाखापटनम बन्दरगाह के उपयोग से जुड़ा है । चौथा, ढ़ल्केबर, मुजप्mफरपुर ट्रान्समिशन लाइन सञ्चालन, पाँचवां काकड़भिट्टा, बंगलाबन्ध मार्ग की अनुमति, छठा प्रबुद्ध समूह गठन तथा सातवां संगीत नाटय अकादमी तथा संगीत नाटक अकादमी बीच सहयोग आदान प्रदान से सम्बन्धित विषय हैं । मधेशी आन्दोलन के समय भारत को दुश्मन बताने वाले ओली ने भारत में एक बार भी अघोषित नाकाबन्दी की चर्चा नहीं की और सज्जन पुरुष बने रहे हैं । लेकिन पता नहीं नेपाल वापस आने के बाद फिर उनकी बोली बदल जाए । वैसे भी प्रचण्ड़ का मानना है कि भारत के साथ असमझदारी अभी भी समाप्त नहीं हुई है । साथ में माधव नेपाल भी भारत के विरोध में आग उगलने से बाज नहीं आ रहे हैं । कम से कम ओली के भ्रमण तक परहेज कर लेते ।
मधेश आन्दोलन की समाप्ति की भले ही औपचारिक घोषणा नहीं हुई है और मधेशी मोर्चा के नेता कह रहे हंै कि आन्दोलन अभी खत्म नहीं हुआ है और जल्द ही फिर नाकेबन्दी की जाएगी लेकिन वास्तविकता यही है कि व्यवहार में मधेशी आन्दोलन पूर्णतः समाप्त हो चुका है । इसका कारण या तो प्रधानमन्त्री ओली की भारत यात्रा हो या फिर मधेशी जनता की थकान । ६ महीने की अवधि कम नहीं होती है । ६ महीने में मधेशी जनता थक चुकी है, भर चुकी है । अब इसे मधेशी आन्दोलन में कुशल और सबल नेतृत्व का अभाव कहें या फिर सरकार की हठधर्मिता की मधेशी आन्दोलन सफल नहीं हो सका । मधेशी आन्दोलन की एक विशेषता रही है कि यह जब भी हुआ है, स्वस्फुरित हुआ है । इसे कभी भी दिशा नहीं मिली, जिससे यह अपने उद्देश्य की प्राप्ति में सफल नहीं हुआ । सरकारी तन्त्रों का कहना है कि मधेश प्रदेश को अलग होने से देश के टुकड़ा होने का खतरा है । उन्हें यह समझ में नहीं आता है कि बार बार मधेशियों की भावनाओं का दमन करने से यह खतरा और भी बढ़ जाएगा । फिलहाल तो देखना है कि ओली के भारत भ्रमण के पश्चात क्या होता है ।


