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स्वर्ग से सुंदर स्वर्गद्वारी

 

Ashram-and-the-residential-areas-of-the-Young
सीमा
नेपाल के पश्चिमी पहाड़ी इलाकों के बारे में चर्चा–परिचर्चाएं होते हुए सामान्यतः हम नहीं पाते हैं । लेकिन यहीं कई जगह ऐसे भी है जो ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं । ऐसा ही एक स्थान है, प्यूठान की स्वर्गद्वारी ।
माना जाता है कि प्यूठान स्वर्गदारी की नगरी होने के कारण संसार भर के हिन्दुओं का श्रद्धास्थल है । यात्रा साधन के इस विकसित युग में अब तो वर्ष भर श्रद्धालु तीर्थयात्री भारत और विश्व के अन्य भागों से भी आते रहते हैं । विशेषकर माघ महीने में मकर संक्रान्ति के अवसर पर यहाँ मेला ही लगा करता है । धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, पर्यटकीय हिसाब से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है, स्वर्गद्वारी । यहाँ से नेपाल के उत्तर में अवस्थित अन्नपूर्ण, मछापुच्छ«े एवं धवलागिरी चोटियों के दृश्यावलोकन करने का मजा ही कुछ और है ।
स्वर्गद्वारी के आधार शिविर भिंगृ से स्वर्गद्वारी तक यातायात बाहनों के उपर्युक्त सड़कों के निर्माण होने के कारण दिन–प्रतिदिन यहाँ आनेवाले पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हो रही है । दांग से ५६ किलोमीटर की दूरी पर यह अवस्थित है । यहाँ तक यातायात की सुविधा है । और पैदल तथा घोड़ा चढ़कर भी स्वर्गद्वारी की यात्रा कर सकते हैं ।

Map
स्वर्गद्वारी पहुँचने वाले किसी भी तीर्थयात्री के लिए यहाँ भोजन और निवास के लिए आश्रम की सुंदर व्यवस्था है । इस क्षेत्र में बृहत् संख्या में गोपालन होने के कारण दूध–दही आसानी से मिल जाता है । करीब ४ वर्ष पूर्व दर्शनार्थी द्वारा मन्दिर में चढ़ाए गए १ करोड़ से भी अधिक रूपये की मदद से पाँच सौ से अधिक गायों के पालन–पोषण, गाय पालकों के लिए पारिश्रमिक, कर्मचारियों के पारिश्रमिक, आवासीय विद्यार्थियों के पठन–पाठन और जीर्ण भौतिक संरचना के पुनरुद्धार में खर्च किया गया । स्वर्गद्वारी के मन्दिर में १४० कर्मचारी और करीब १०० की संख्या में आवासीय विद्यार्थियों का निवास है ।
स्वर्गद्वारी में आनेवाले पर्यटकों के ही कारण प्यूठान जिले की आर्थिक अवस्था में अच्छी प्रगति दृष्टिगोचर हो रही है । पर्यटकों की दिनानुदिन बढ़ती संख्या के कराण अन्य व्यापार–व्यवसाय आदि में भी अच्छी श्रीवृद्धि हुई है ।
स्वर्गद्वारी में विशेषतः वैशाख पूर्णिमा, कार्तिक आमवश्या, दशहरे और दीपावली, मकर संक्रान्ति आदि के अवसर पर भक्त दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ती है । यहाँ के मठ–मन्दिर के अवलोकन से और मन्दिरों में किए गए पूजा–पाठ आदि से भक्तजनों की मन की हर आकांक्षा पूर्ण होती है, ऐसा जनविश्वास है ।
पर्यटकों के लिए ऐतिहासिक मनोरम तालाब, पाँच पाण्डव स्वर्गारोहण तथा महाप्रभु की तपस्या गुफा वेद पाठशाला, गौशाला एवं अनेक मठ–मन्दिर और आश्रम परिसर के विशालकाय वृक्ष आदि यहाँ के मुख्य आकर्षक विन्दु हैं ।
स्वर्गद्वारी आश्रम की स्थापना बाल तपस्वी महानन्दप्रभु हंसानन्द गिरी द्वारा वि.सं. १९५२ में हुई है । बाल तपस्वी महाप्रभु अतिमानव त्रिकालदर्शी संत के रूप में माने जाते हैं । उनका जन्म वि.सं. १९१६ साल में रोल्पा के रुम्टी में हुआ था । उनके द्वारा किया गया साधना स्थल ही आज स्वर्गद्वारी के नाम से परिचित है ।
स्वर्गद्वारी की यज्ञशाला के बीच में मुख्य हवनकुंड है । चारों दिशाओं में कुंड सहित के मंदिर और पांचायन देवता के चार मन्दिर भी अवस्थित है । स्वर्गद्वारी मंदिर से हटकर ऊंचे पहाड़ो पर एक गुफा है । इस गुफा में कम से कम ५ लोग प्रवेश कर सकते हैं । स्वर्गद्वारी मंदिर से चार घंटे की दूरी मांडवी नदी बहती है । इस नदी में स्थान करने से मानवांछित कामना पूरी होती है, ऐसा जनविश्वास है ।

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