ओशो का उपदेश
मनोज मिश्र ओशो सन्यासी, १ मई | 
ओशो ने किसी भी घटना को साझी होकर देखने को कहा है | देखें आज घर जाकर अौर जब पत्नी गाली देने लगे या पति गर्दन दबाने लगे, तब इस तरह देखें, जैसे कोई साझी देख रहा है | अौर जब रास्ते पर चलते हुए लोग दिखाई पड़े, दुकानें चलती हुई दिखाई पड़े, दफ्तर की दुनीया हो, तब खयाल रखें, जैसे किसी नाटक में प्रवेश कर गये हो अौर चारो तरफ एक नाटक चल रहा हो | एक दिन भर इसका स्मरण रखकर देखें अौर आप कल दूसरे आदमी हो जायेंगे | दिन तो बहुत बड़ा है, एक घंटे भी कोई आदमी साझी होने का प्रयोग करके देखें, उसकी जिन्दगी में एक मोड़ आ जायेगा | वह आदमी फिर वही कभी नही हो सकेगा, जो एक घंटे पहले था | क्योंकि एक घंटे मे जो उसे दिखाई पड़ेगा, वह हैरान कर देने वाला हो जायेगा | अौर उस एक घंटे में उसके भीतर, जो परिवर्तन होगा, जो ट्रांसफार्मेशन होगा, उससे कीमिया ही बदल जायेगी | वह उसके भीतर चेतनाके नये बिंदुओं को जन्म दे देगी | एक घंटे के लिए एेसे करके देखें |

