क्या हुआ मधेश आन्दोलन के वक्त उदघोष की गई वो बातें ?
आज कूछ दिन पहले तक मधेश के नेताओं ने मधेश आन्दोलन, मधेशी हक अधिकार, शहिदों की सहादत का हवाला देकर पार्टी एकता और बिना संशोधन चुनाव बहिस्कार का खुब डिंग मारते थे, किन्तु चुनाव की तारिख जैसे जैसे नजिक आति जा रही है ईन्कि बोलति बन्द होने लगी है । क्या ये अवसरवादि राजनीति करते है या मधेशी जनता की कूर्बानी से सत्ता प्राप्ति की राजनीति करते है ?
क्यूँ मधेशी दल के नेता अपने वादों से पिछे हटते दिखाई दे रहे हैं, अगर चुनाव में ही हिस्सेदारी लेनी थी तो ईतना हंगामा क्यों, मधेशी जनता के सामने बडे(बडे ढकोसला क्यों ? अभीतक ईतने बडे पैमाने पर मधेशीयों की जनधन की क्षती क्यों ? मधेशी जनता को राजनैतीक दलाल से सावधान रहकर अपना अस्तित्व रक्षा के लिए संघर्ष करना आवश्यक है, निर्भिक रुपसे भोट माँगने वाले नेताओं से सवाल करैं हम उन्हे भोट क्यों देरु चाहे वो किसी भी पार्टी के क्यों ना हो ।
उन्होने आजतक आपके लिए क्या किया और आनेवाले दिनों में क्या आपकी पहिचान स्थापित कर सकता है । वैसे तो ये स्थानीय तह का निर्वाचन है जिससे स्थानिय सम्सयाओं का समाधान किया जाएगा, किन्तु जब मधेशीयों को कोई स्थान ही नही है तो समाधान क्या काम की, पहले अपना पहिचान स्थापित होना चाहिए, अपनी अस्तित्व सुरक्षित होनी चाहिए उसके बाद जाकर स्थानिय सम्सया और निवारण के विषय पर सोचा जाता है । मधेशीयों की ईस जिल्लत भरी जिवन में स्थानिय तह की सम्सया समाधान होने से कूछ प्राप्ति नही होने वाला है । सभार : फेसबुक


