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अब कांग्रेस के साथ राजपा, राप्रपा और लोकतान्त्रिक फोरम के बीच एकीकरण !

 

काठमांडू, १८ आश्वीन । नेकपा एमाले, माओवादी केन्द्र और नयां शक्ति के बीच अनौपचारिक एकीकरण तथा चुनावी तालमेल होने के बाद राजनीति में तरंग सिर्जना हो रही है । ‘वाम एकता’ तथा ‘प्रगतिशील और राष्ट्रवादी शक्ति’यों के बीच तालेमेल के नाम में जो राजनीतिक ध्रुवीकरण हो रही है, इसका असर अन्य राजनीतिक दलों में भी दिखाई दे रही है । तीन पार्टियों के बीच चुनावी तालमेल घोषणा होने के बाद राजनीति के कुछ पुराने खिलाड़ियो में भी विचलन दिखाई दिया है, वे लोग अपना दल बदल कर दूसरे दल में प्रवेश कर रहे हैं । ऐसी ही अवस्था में देश के सबसे पुरानी और प्रजातान्त्रिक शक्ति नेपाली कांग्रेस के अन्दर भी भू–चाल पैदा हो गई है ।

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तीन पार्टियों के बीच चुनावी तालमेल घोषणा होने के तुरंत बाद नेपाली कांग्रेस के शीर्ष नेता आपस में इकठ्ठा हो गए थे । उक्त अनौपचारिक बैठक का निष्कर्ष है कि अब प्रजातान्त्रिक शक्तियों के बीच भी एकता होना चाहिए । आगामी प्रतिनिधिसभा और प्रदेशसभा निर्वाचन को लक्षित कर कांग्रेस पदाधिकारी ने यह निष्कर्ष निकाला है । नेपाली कांग्रेस के कुछ नेताओं को मानना है कि अब कांग्रेस के पास राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) नेपाल, राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) और फोरम लोकतान्त्रिक पार्टी के साथ चुनावी तालमेल करने का विकल्प नहीं है । उन लोगों को मानना है कि इन पार्टियों के साथ ‘बृहत प्रजातान्त्रिक एकता’ होना चाहिए । इसके संबंध में विचार–विमर्श करने के लिए नेपाली कांग्रेस ने आज (बुधबार) पार्टी कार्य सम्पादन समिति का बैठक आह्वान करने की तैयारी की है । लेकिन मंगलबार सम्पन्न कांग्रेस शीर्ष नेताओं की बैठक का निष्कर्ष यह भी है कि एमाले–माओवादी–नयां शक्ति बीच घोषित चुनावी तालमेल सिर्फ सत्ता के लिए है, यह गठबंधन कांग्रेस को कुछ भी नहीं कर सकता ।
समाचार स्रोतका कहना है कि मंगलबार ही नेपाली कांग्रेस के कुछ नेता तथा प्रधानमन्त्री शेरबहादुर देउवा ने लोकतान्त्रिक फोरम के अध्यक्ष विजयकुमार गच्छदार, राजपा के अध्यक्ष महन्थ ठाकुर के साथ अनौपचारिक बातचीत किया है । कांग्रेस नेता रमेश लेखक को मानना है कि एमाले और माओवादी के बीच चुनावी तालमेल होने से कांग्रेस को कोई भी असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह प्रजातन्त्र के लिए खतरा हो सकता है ।

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