Fri. Oct 30th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

सन् ८ दिसेम्बर १८१६ से मधेश पर किए गए चरम विभेद का वास्तविक तथ्य : प्रदीप यादव

 

 सन् ८ दिसेम्बर १८१६ के बाद से मधेश और मधेशी उपर किए गए नेपाली षड़यन्त्र और चरम विभेद का वास्तविक तथ्य…

प्रदीप स्वराज यादव, लहान १, सिरहा |

षड़यन्त्र नं. १ : वि.सं. २०१४, चितवन, में “राप्ती भ्याली विकास योजना(Rv-Dv)” नतिजा : २०२७ साल में ३७,००० धर्तीपुत्र थारू मधेशियों को चितवन से भगाकर वहाँ दशगुणा पहाडी/नेपाली पहाड से लाकर बसाया गया | आज चितवन पूर्णत: नेपालियों के कब्जा में है और थारू लाचार पड़ा है |

षड़यन्त्र नं. २ : वि.सं. २०२०, “नेपाल पुनर्वास कम्पनी” का स्थापना हुआ नतिजा : * नेपाली सरकारद्वारा पहाड़ से नेपालियों को लाकर मुफ्त में अनाज, राज्य से धनकोष और सार्वजनिक जमीन देकर बसाया गया, * नई बस्तियों में उनके लिए स्कुल और अस्पताल बनवाया गया । * जिनको जमीन उपलब्ध नहीं हो सका, उनके लिए नेपाली सरकार जंगल विनास कर १,१६,५५० बिघा मधेशी जमीन उन्हें दे दिया गया।

यह भी पढें   हुंकार मधेश द्वारा २५ जिलों में 'संपर्क व्यक्ति' नियुक्त, 'हुंकार हुलाकी यात्रा' की तैयारी तेज

षड़यन्त्र नं. – ३ जमीन कब्जा पर सरकारी छुट : नतिजा : अनधिकृत् रूप में ३,५४,४०० विघा जमीन जंगल फडानी कर पहाडी लोग वैसे ही आकर बस गए, मधेशी लाचार होकर देखता ही रह गया |

षड़यन्त्र नं. – ४ पुनरवास कम्पनी खोलना और मधेशी जमीन कब्जा करना, असर : नेपालियोंद्वारा मधेश कब्जा करने के लिए मधेश भर ६ पुनर्वास कम्पनियाँ षड्यन्त्र पूर्वक खोला गया : १. झापा पुनर्वास कम्पनी २. सर्लाहि पुनर्वास कम्पनी ३. नवलपरासी पुनर्वास कम्पनी ४. ताराताल पु.क. ५. कैलाली ” ” ६. कंचनपूर पुनर्वास कम्पनी |

षड़यन्त्र नं. – ५ वन शुद्धिकरण का नाटक : नतिजा : “वन शुद्धिकरण” के नाम पर सन् १९९०(वि.सं. ०४७) तक लाखौं पहाडी/नेपालियों को जमीन दे दिया गया | नेपाली लोग बिना नियम के जंगल कटानी कर उसे बेनामी बताकर कब्जा कर लेते थे और अपना नाम करबा लेते थे। जिसका शिकार पूरव के राजवंशी लोग हुवे ।

यह भी पढें   हुंकार मधेश द्वारा २५ जिलों में 'संपर्क व्यक्ति' नियुक्त, 'हुंकार हुलाकी यात्रा' की तैयारी तेज

षड़यन्त्र नं. – ६ हुलाकी राजमार्ग का बिकल्प महेन्द्र पथका निर्माण, असर : हुलाकी मार्ग आसपास मधेशियों का जमीन पहले से था, जहाँ नेपालियों को लाना और बसाना संभव नहीं था |

इस तथ्यको देखकर सरकार नें षड़यन्त्र पूर्वक पूर्व-पश्चिम राजमार्ग जंगल के बीचोबीच बनाया ताकि उसके आसपास नेपालियों का बसोबास हो और शहर बसे | नीजगढ़, बर्दीबास, लालगढ़, पथलैया, नारायणघाट, ईटहरी, बिर्तामोड़, उर्लाबारी, काकरभिट्टा, बुटवल, कोहलपुर, अतरिया आादि वही नवीन शहर है। जो राजमार्ग राणा काल में बना था वह आज भी वैसे ही है लेकिन पहाडी लोक-मार्ग आज पहाड के बिचोविच दौड़ रहा है |

यह भी पढें   हुंकार मधेश द्वारा २५ जिलों में 'संपर्क व्यक्ति' नियुक्त, 'हुंकार हुलाकी यात्रा' की तैयारी तेज

कोशी सम्झौता, काली सम्झौता, गण्डक, कर्णीली जैसे नदियों के सम्झौते से आज मधेशी भूमि पानी विहीन बाँझ पड़ा है | हर अन्तराष्ट्रिय सन्धी सम्झौते से ९०% लाभ नेपालियों को ही मिलता है, बाँकी १०% दिखाने और मधेशी नेताओं को फुसलाने हेतु मधेश को भी देता है | इस तरह हम मधेशी धीरेधीरे कंगाल होते जा रहे हैं | बेघर भुमिहीन बनते जा रहे हैं | श्रोत साधन समाप्त होता जा रहा है | हम लुटते जा रहे हैं | बरवाद होते जा रहे हैं | बस, स्वतन्त्र मधेश ही है एक विकल्प…

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com