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१८ करोड़ की महारानी

 

व्यग्ंय( बिम्मी कालिंदी शर्मा

 


बिल्ली के भाग से छींका टूटने पर जब कोई देश का उच्च पदस्थ बन जाता है तब उस में महाराज या महारानी के जैसा भाव आ जाना और उसी तरह बर्ताव करना कोई अचरज की बात नहीं है । पति ने १८ सौ रुपए की साईकल भी नहीं चढी होगी पर अब पत्नी जी चली है १८ करोड़ की गाड़ी चढ़ने । भई राष्ट्रपति है क्यों न चढ़ें ?उनका तो हक बनता है । वह चाहें तो देश के नागरिकों के कंधे पर सवार हो कर भी चल सकती हैं । फिर ऐसा मौका मिले या न मिले ईसी लिए अपनी मन की मुराद पूरी कर लेनी चाहिए । आखिर राष्ट्रपति भी तो हम सभी ने मिल कर बनाया है उन्हें । अब अगर वह महारानी बनना चाहती है तो गलत क्या है ? हमीं ने जब सिर में चढाया है तो भुगते भी हम । उनको १८ करोड़ की महारानी हमीं ने बनाया है उनका ज्यादामान, सम्मान कर के ।
एक साधारण रोडपति आदमी उसी रोड पर चलते हुए दिन भर में १८ बार ठोकर खाता है । पर भाग्यशाली हमारे देश की महारानी जी उसी रोड पर हिचकोले खाते हुए १८ करोड़ की गाड़ी चढ़ती हैं । सब अपने, अपने किस्मत की बात है । कोई फाका करता है तो छप्पन भोग खाता है । महारानीजी सत्ता का तर माल उड़ा रही है तो शिकायत क्यों ?कल कोई दूसरा उस पद पर पहुंचेगा तो वह भी यही करेगा जो महारानीजी ने किया है । क्योंकि इस देश की आबोहवा ही ऐसी है कि यहाँ कोई चाह कर भी ईमानदार और नैतिकवान नहीं बन सकता तो महारानी जी किस खेत की मूली हैं ? १८ लाख की गाडी चढ्ने की हैसियत नहीं पर माग रहीं है १८ करोड़ की गाड़ी । जैसे दहेज में लोग अपनी हैसियत से ज्यादा मांगते हैं ठीक वैसे ही । और उनकी माँग पूरा करने के लिए जनता का खून, पसीना हाजिर है । कहते हैं न कुत्ते को घी नहीं पचता और बकरी के मुंह मे कद्दू नहीं अटता ।
ठीक ऐसा ही हाल है हमारे देश के नए नवेले राजाओं का । जैसे २ हजार के नोट को भजा कर सिक्के में बदल दिया गया हो ठीक वैसे ही । अब सिक्के है तो बजेंगे ही । अब नोट थोडेÞ ही हैं कि चुपचाप बिना आवाज शान्ति से एक जगह बैठें रहें । पहले जब राजतन्त्र था, तब राजा नोट की मानिंद चुपचाप थे तो बर्दाश्त नहीं हुआ अब भुगतो ? छोटे, छोटे सिक्के जैसे राजा और सामंत इसी लिए तो शोर मचा रहे हैं कि उनकी तरफ भी ध्यान दिया जाए, उनकी माँग पूरी की जाए । और नेपाल की जनता तो है ही इतनी उदार की कोई उँगली माँगे तो सिर ही काट कर दान में दे दें । इसी लिए तो महारानीजी ने अपने पद में रहते हुए ही बेटी की शादी अपने सरकारी निवास सें बड़ी तामझाम के साथ सरकारी सुविधाओं का लुत्फ उठाते हुए किया । अब जब उनको १८ करोड़ की गाड़ी चढ़नी है तो चढ़नी है । उनका मन है और उन्ही के दल का दो तिहाई के बहुमत से बनी हुई सरकार है । वह जो मर्जी चाहे करे । कोई रोकने या टोकने वाला क्यों हो ?
आखिर में जितनी भी महँगी और बड़ी गाड़ी में चढ़े रोड की हालत तो वैसे ही खस्ताहाल है । और उनकी सवारी के दौरान घंटो लंबा टैफ्रिक जाम भी होना तय है । महारानीजी के लिए तो सब से अच्छा हेलिकप्टर खरीद देना चाहिए ताकि वह बिना ट्रैफिक जाम कराए और किसी को परेशान किए अपने वाछिंत गन्तव्य में पहुंच सके । पर सरकार को तो अक्ल देर से आती है, इसीलिए महारानीजी की सेवा में १८ करोड की कार हाजिर है । महारानी होना और उस पद की गरिमा बनाए रखना बहुत मुश्किल है । इसी लिए तो महारानीजी पद की गरिमा के अनुसार १८ करोड़ की गाड़ी चढ़ने के लिए मांग कर रही हैं । तो कौन सी बड़ी बात है अन्त में वह यह गाड़ी अपने साथ शमसान घाट में तो नहीं ले जाएगी । उनके बाद उन के ही चेला चपाटी चढेगें । तो महारानीजी की माँग बिल्कुल जायज हैं । कुत्ते को उगंली दोगे चबाने को तो वह उगंली के साथ, साथ आपका बाहं भी चबाजाएगा ।
हम स्कूल में वाद, विवादप्रतियोगिता में हिस्सा लेते हुए विद्या या धन में से कौन बड़ा कह कर तर्क वितर्क करते थे । और ज्यादातर विद्यार्थी विद्या के पक्ष में तर्क देते थे । पर यह उल्टा है विद्या को ही विद्या नहीं चाहिए बल्कि धन चाहिए । इसी लिए तो १८ करोड़ की गाड़ी चढ़ना चाहती है । ईसी लिए तो सरस्वतीपूजा से ज्यादा धूमधाम से लक्ष्मीपूजा यानी की दीपावली मनाई जाती है । हमारे देश की महारानी विद्या देवी ने भी लक्ष्मीजी का हाथ थामा है और बिना बोले सब को कह दिया है कि विद्या से बडा धन होता है । क्योंकि धन से विद्या को खरीदा जा सकता है । इसी लिए विद्या देवी इस लोक तांत्रिक देश की महारानी हैं । सबमिल कर उनका यश गावें और जस पाएं । आखिर में वह १८ करोड़ की महारानी है कोई कम थोडे ही हैं । वह चाहें तो १८ अर्ब भी मांग सकती हैं । उनकी मर्जी ।

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