Sat. Aug 15th, 2020

निजगढ विमानस्थल निर्माण कार्य रोकने के लिए सर्वोच्च ने दिया आदेश

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काठमांडू, ७ दिसम्बर । बारा जिला में निर्माणाधिन निजगढ विमानस्थल निर्माण कार्य रोकने के लिए सर्वोच्च अदालत ने आदेश दिया है । न्यायाधीश टंकबहादुर मोक्तान की एकल इजलास ने शुक्रबार आदेश जारी करते हुए कहा है कि निर्माण कार्य जहां है, वही रुकिए, अगली आदेश ना होने तक निर्माण कार्य जहां है, वहां से आगे मत बढिएगा ।
पूर्व सचिव द्वारिकालाल ढुंगेल, सुकदेव खत्री, वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्णमुरारी भण्डारी जैसे व्यक्तित्व ने सर्वोच्च अदालत में विमानस्थल निर्माण कार्य रोकने के लिए एक मुद्दा पंजीकृत किए थे । उन लोगों का मानना है कि विमानस्थल निर्माण के नाम में ५ सौ से अधिक पुराने वृक्ष का विनास करने का काई हो रहा है । इसीलिए सरकारी निर्णय को अमान्य और बदर घोषणा करने की मांग के साथ उन लोगों ने सर्वोच्च में मुद्दा पंजीकृत किए थे । उसी पर शुक्रबार फैसला करते हुए सर्वोच्च ने निर्माण कार्य रोकने के लिए आदेश दिया है । साथ में वादी–प्रतिवादी दोनों को विचार–विमर्श के लिए सर्वोच्च ने बुलाया है ।
रिट निवेदकों का कहना है कि वि.सं. २०७२ साल में निजगढ वन क्षेत्र के बारे में हुए मन्त्रिपरिषद् का निर्णय भी खारीज होना चाहिए । उन लोगों का मानना है कि अगर निजगढ में अन्तर्राष्ट्रीय विमानस्थल निर्माण की जाएगी तो ८ हजार से अधिक वृक्ष को काटना पड़ेगा, उसके बदले अन्य वृक्षारोपण की तैयारियां भी नहीं है, जिससे जंगली जनावरों की बासस्थान नष्ट हो जाएगी, जैविक विविधता और पानी का स्रोत भी नहीं रहेगे । जिसके चलते तराई–मधेश मरुभूमि में रुपान्तरण हो सकती है ।

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