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राष्ट्रसंघ में प्रधानमंत्री ओली का सम्बोधन संक्रमणकालीन न्याय प्रक्रिया निष्कर्ष पर पहुँचाने की दृढता

 

काठमाडौं ।

प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली ने संक्रमणकालीन न्याय प्रक्रिया को नेपाल की प्रतिवद्धता अनुरुप निष्कर्ष में पहुँचाने के लिए दृढ होने की बात कही है ।  संयुक्त राष्ट्रसंघ के ७५वे महासभा के भर्जुअल सम्बोधन में प्रधानमन्त्री ओली ने संक्रमणकालीन न्याय प्रक्रिया में पीडित की समस्या सम्बोधन करने के लिए प्रतिवद्धता व्यक्त की।

संक्रमणकालीन न्याय के दो  निकाय सत्यनिरुपण तथा मेलमिलाप और बेपत्ता खोजविन आयोग स्थापना होने के ५ बर्ष बाद भी कोई खास प्रगति नहीं हुई है और द्वन्द्व पीडित द्वारा पिछली बार पदाधिकारी नियुक्ति पर असन्तुष्टि जताने के समय  प्रधानमन्त्री की यह धारणा  सामने आई है ।

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उन्होंने कहा, ‘मानव अधिकार के गम्भीर उल्लघंन में नेपाल दण्डहीनता सहन नहीं करेगा । जारी संक्रमणकालीन न्याय की प्रक्रिय को  हमारी प्रतिवद्धता के अनुरूप हम निष्कर्ष में ले जाएँगे तथा पीडित की समस्या सम्बोधन भी करेंगे।’

प्रधानमन्त्री केपी ओली ने   यह भी कहा कि नेपाल, जो अब मानवाधिकार परिषद का सदस्य है, एक समग्र और निष्पक्ष तरीके से समग्र मानवाधिकारों के प्रचार में योगदान दे रहा है। यह कहते हुए कि नेपाल ने 2021 बीएस से 2033 बीएस के लिए फिर से नामांकित किया है, प्रधान मंत्री ने सभी देशों से अपना समर्थन बढ़ाने का आग्रह किया।

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प्रधानमन्त्री ओली का सम्वोधन रेकर्ड कर राष्टसंघ भेजा गया था।  सम्बोधन के क्रम में प्रधानमन्त्री ओली ने कोभिड-१९ के कारण विश्व असाधारण समय से गुजरने का भी चर्चा की ।

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