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भारत के प्रधानमंत्री मोदी, रामलला प्राण-प्रतिष्ठा के लिए 11 दिनों का कठोर उपवास करेंगे

 

अयोध्या 13 जनवरी 24

 

अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा का अनुष्ठान पूर्ण होने तक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी 11 यजमानों को आहार-विहार, शयन आदि के संबंध में यम-नियम के कठोर 45 व्रतों का पालन करना होगा। अनुष्ठान के प्रमुख आचार्य काशी के विद्वान पं. गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने यजमानों के लिए यम-नियम की आचार संहिता जारी की है। इसके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी यजमानों को 11 दिनों तक एक समय सेंधा नमक युक्त सात्विक आहार ग्रहण करना होगा।

पीएम मोदी दिन में फलाहार कर सकते हैं। अनुष्ठान पूर्ण होने तक चारपाई पर सोना या बैठना वर्जित है। लकड़ी के तख्त का प्रयोग कर सकते हैं। आसन के रूप में कंबल होगा। बिस्तर पर सोना या बैठना, नियमित दाढ़ी बनाना व नाखून निकालना वर्जित होगा। यथासंभव मौन रहने अथवा मितभाषी होने का अभ्यास करना होगा।

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यम-नियम का संकल्प लेकर शुरू किया पालन
पीएम मोदी ने शुक्रवार से ही यम-नियम का संकल्प लेकर उसका पालन आरंभ कर दिया है। आचार्य शास्त्री ने इस संबंध में एक पत्र पूर्व में ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरि को भेजकर यजमानों को अवगत करा देने का आग्रह किया था। हालांकि उन्होंने इस व्रत का पालन करने के लिए शास्त्रों के अनुसार न्यूनतम एक सप्ताह की अवधि तय करते हुए 15 जनवरी से पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया था।

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नित्य सुबह करेंगे स्नान, त्यागना होगा बाहरी भोजन
पं. गणेश्चर शास्त्री द्रविड़ द्वारा शास्त्रों के आलोक में दी गई व्यवस्था के अनुसार सभी यजमानों को नित्य सुबह स्नान करना होगा। बाहरी भोजन का त्याग करना होगा। क्रोध, लोभ, मद, मोह, अहंकार से मुक्त रहकर ध्यान-साधना के माध्यम से मन को एकाग्र रखना होगा। सत्यव्रत का पालन करना होगा।

सिले वस्त्रों से दूरी, भोजन भी होगा सादा
आचार्य द्रविड़ के अनुसार यजमानों को इस अवधि में यथासंभव सिले हुए वस्त्र से दूर रहना होगा। रेशमी, ऊनी वस्त्र, कंबल, शाल, स्वेटर आदि धारण कर सकते हैं। सद्विचार, सत्चिंतन से युक्त रहना होगा। अनुष्ठान अवधि में हल्दी, तेल, राई, सरसों, लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, अंडा, तेल से बने भोज्य पदार्थ, गुड़, भुजिया चावल, चना आदि नहीं खाना है। दवा के लिए मनाही नहीं है, तांबुल भी ले सकते हैं। खाने-पीने के सभी पदार्थों को भगवान को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे।

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