Mon. Oct 26th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

माँ के श्राद्ध से एक दिन पहले बेटे की आँखों के सामने जली विरासत

 

कवि एवं साहित्यकार बसन्त चौधरी के घर में भीषण आग : पाँच दशकों का घर राख में तब्दील

काठमांडू, 13  सितम्बर।
पिछले शनिवार की शाम थमेल क्षेत्र में फैली भीड़ और हंगामे के बीच लगी भीषण आग ने एक परिवार की आधी सदी पुरानी विरासत को राख में बदल दिया। करीब सात बजे के आसपास शुरू हुई घटना में पीड़ित अपने घर को जलते हुए सिर्फ़ असहाय नज़रों से देखते रह गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग घर के बाहर जुटे। उन्होंने नारेबाज़ी की, पत्थर फेंके, खिड़कियाँ तोड़ीं और ज़बरन घर में घुस गए। पीड़ित व्यक्ति ने folded hands जोड़कर भीड़ से विनती की, लेकिन उनकी आवाज़ शोर में दब गई। इस अफरा-तफरी के बीच कुछ अज्ञात युवकों ने मानवता का परिचय देते हुए उन्हें और उनकी पत्नी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

यह भी पढें   तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, कम से कम 16 लोगों की मौत; सैकड़ों मकान ध्वस्त

“यह वही घर था जहाँ मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी बिताई, जहाँ मेरे पिता के सपनों ने सांस ली थी और जहाँ अनगिनत यादें जन्मी थीं,” पीड़ित ने आँसू भरी आँखों से कहा। “जब मैंने जलती छत की ओर देखा, तो लगा मानो मेरे सिर से छत ही गायब हो गई हो।”

विशेष विडंबना यह रही कि अगले ही दिन उनकी माँ का श्राद्ध था। वर्ष २००० में माँ के निधन के बाद से उन्होंने लगातार २५ वर्षों तक यह धार्मिक कर्तव्य निभाया था। मगर इस बार वे अपने ही घर और परिस्थितियों के चलते असमर्थ हो गए।

यह भी पढें   राजा विराढ गढ पर बैष्ण्वी दुर्गा पूजा बाल भंडारा के बाद संपन्न

पीड़ित ने कहा, “आज मैं अपने पिता और माँ दोनों को याद करता हूँ तो हृदय असहनीय बोझ से भर जाता है। जीवन हमेशा संघर्ष रहा है, और शायद यह एक और संघर्ष है जिसे मुझे सहना है। लेकिन मुझे विश्वास है—दीवारें जल सकती हैं, घर राख हो सकता है, पर परिवार का स्नेह, मूल्य और स्मृतियाँ कभी नष्ट नहीं होतीं। वे शाश्वत रहती हैं।”

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com