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बदलते दौर में रिश्तों की संवेदना,प्रेम और विश्वास का पर्व है रक्षाबंधन : बिमल सरार्फ

 

बिमल सरार्फ, रक्सौल, 28 अगस्त 2026 । रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बाँधने और मिठाई खिलाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, अपनापन और जिम्मेदारी का वह पवित्र बंधन है, जो समय के साथ और भी मजबूत होता जाता है। राखी का एक छोटा-सा धागा दो दिलों को ऐसे रिश्ते में बाँधता है, जिसकी मजबूती किसी भी कठिन परिस्थिति से बड़ी होती है।

आज का समय तेजी से बदल रहा है। परिवार छोटे हो रहे हैं, रिश्तों के लिए समय कम होता जा रहा है और मोबाइल तथा सोशल मीडिया ने संवाद के तरीके बदल दिए हैं। ऐसे समय में रक्षाबंधन हमें याद दिलाता है कि जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिन्हें केवल शब्दों से नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदना और साथ से निभाया जाता है।

भाई-बहन का रिश्ता दुनिया के सबसे सहज और खूबसूरत रिश्तों में से एक है। बचपन की नोंक-झोंक, छोटी-छोटी बातों पर रूठना, फिर कुछ ही देर में एक-दूसरे के करीब आ जाना—यही इस रिश्ते की खूबसूरती है। उम्र बढ़ने के साथ भले ही जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं, दूरियाँ आ जाती हैं और मिलने का समय कम हो जाता है, लेकिन दिल में एक-दूसरे के लिए अपनापन कभी कम नहीं होता।

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रक्षाबंधन की राखी केवल भाई की कलाई पर नहीं बंधती, बल्कि यह विश्वास के उस धागे को मजबूत करती है, जिसमें भाई-बहन दोनों एक-दूसरे के सुख-दुःख में साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हैं। आज इस पर्व को केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा करने तक सीमित करने के बजाय इसे एक-दूसरे की भावनाओं, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के व्यापक अर्थ में समझने की आवश्यकता है।

आज की बहन केवल संरक्षण की अपेक्षा रखने वाली नहीं, बल्कि परिवार और समाज के निर्माण में बराबर की भागीदार है। वह अपने भाई की सफलता में खुश होती है, उसके संघर्ष में साथ देती है और जरूरत पड़ने पर उसका हौसला भी बढ़ाती है। इसी तरह भाई का दायित्व भी केवल बहन की रक्षा करना नहीं, बल्कि उसके सपनों, सम्मान और स्वतंत्र पहचान का सम्मान करना है।

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रक्षाबंधन हमें यह संदेश भी देता है कि रिश्ते महंगे उपहारों से नहीं, बल्कि समय, सम्मान और सच्चे व्यवहार से मजबूत होते हैं। एक फोन, एक मुलाकात, कुछ पल साथ बैठकर बातचीत और दिल से कही गई दो बातें कई बार बड़े से बड़े उपहार से अधिक मूल्यवान होती हैं।

आज जब स्वार्थ और व्यस्तता के कारण रिश्तों में दूरी बढ़ती जा रही है, तब रक्षाबंधन जैसे पर्व हमें अपनी जड़ों और अपने रिश्तों से जोड़ने का काम करते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन कितना भी व्यस्त क्यों न हो, अपनों के लिए समय निकालना जरूरी है।

राखी का धागा हमें यह भी याद दिलाता है कि सच्चे रिश्ते परिस्थितियों के बदलने से नहीं बदलते। बचपन में जो बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती है, वही बहन आगे चलकर उसके जीवन के सुख-दुःख की साथी बनती है। इसी तरह भाई भी बहन के जीवन में केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि भरोसे और भावनात्मक सहारे का मजबूत आधार बन सकता है।

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रक्षाबंधन वास्तव में धागे का नहीं, दिलों का पर्व है। यह प्रेम को विश्वास में, विश्वास को जिम्मेदारी में और जिम्मेदारी को जीवनभर के रिश्ते में बदलने का अवसर है।

आइए, इस रक्षाबंधन पर केवल राखी बाँधने की परंपरा न निभाएँ, बल्कि अपने भाई-बहन के साथ रिश्ते को और मजबूत करने का संकल्प लें। एक-दूसरे के सुख में खुश हों, दुःख में साथ खड़े हों, सपनों का सम्मान करें और हर परिस्थिति में विश्वास की इस पवित्र डोर को थामे रखें।

क्योंकि समय बदल सकता है, परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन भाई-बहन के सच्चे प्रेम और विश्वास का रिश्ता जीवनभर दिल के सबसे करीब रहता है।

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